8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के ज़रिए अपनी सैलरी और पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है. सरकार ने नवंबर में आयोग के ‘संदर्भ की शर्तें’ (Terms of Reference) की घोषणा की थी, और उम्मीद है कि आयोग 18 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा. हालांकि, अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि 8वें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें 1 जनवरी, 2026 से लागू होंगी या बाद की किसी तारीख से.
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें 1 जनवरी, 2026 से लागू की जाएं. उसका कहना है कि आयोग की सिफ़ारिशें औपचारिक रूप से चाहे जब भी लागू हों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी, 2026 से बकाया (arrears) मिलना चाहिए. वेतन आयोग ने अपनी वेबसाइट पर 18 सवाल पोस्ट किए थे, जिनमें कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, यूनियनों और अन्य संबंधित पक्षों से इन मामलों पर राय माँगी गई थी. AITUC ने इसी अनुरोध के जवाब में यह माँग रखी है.
सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी?
अभी हर किसी के मन में यही सवाल है: कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी? विशेषज्ञों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग (Pay Commission) के लागू होने के बाद, सैलरी में 20% से 35% तक की बढ़ोतरी हो सकती है. अनुमान है कि ‘फिटमेंट फैक्टर’ सैलरी को एडजस्ट करने के लिए इस्तेमाल होने वाला गुणांक 2.4 और 3.0 के बीच रहेगा. हालांकि, अंतिम फैसला आखिरकार देश की आर्थिक स्थिति पर ही निर्भर करेगा. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल के प्रतीक वैद्य ने इस मामले पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि महंगाई के रुझान, सरकार की राजकोषीय स्थिति और भारत के वित्त आयोग की सिफारिशें अंतिम नतीजे को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
क्या है मांग?
AITUC का तर्क है कि वेतनमान, भत्ते, पेंशन और अन्य लाभों में बदलाव 1 जनवरी, 2026 से लागू किए जाने चाहिए, न कि बाद की किसी तारीख से. अगर सरकार इन बदलावों को बाद की किसी तारीख से लागू करने का फ़ैसला करती है, तो इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है. 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2026 को समाप्त हो गया था. यह एक आम चलन है कि कोई भी वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट तभी सौंपता है, जब उससे पिछले आयोग का कार्यकाल समाप्त हो चुका हो.
हालांकि, पहले के मामलों में, सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया राशि का भुगतान ठीक उसी दिन से शुरू कर दिया था, जो पिछले वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त होने के ठीक बाद का दिन था. उदाहरण के लिए, 6वें वेतन आयोग ने मार्च 2008 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी; फिर भी, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी एरियर (बकाया राशि) दिया गया. इसी तरह, 7वें वेतन आयोग ने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे जून 2016 में मंज़ूरी दी. इसके बावजूद, सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी, 2016 से प्रभावी एरियर दिया.
इसमें परेशानी क्या है?
हालाँकि, 8वें वेतन आयोग के मामले में एक परेशानी है. 7वें वेतन आयोग के मामले में, जब सरकार ने सितंबर 2013 में इसकी घोषणा की थी, तो उसने इसकी सिफ़ारिशों को लागू करने की संभावित तारीख का संकेत दिया था. लेकिन, 8वें वेतन आयोग के संबंध में ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है. ठीक इसी वजह से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या इसे 1 जनवरी, 2026 से लागू किया जाएगा या नहीं.