Adani Solar Ranking 2026: अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ANIL) की सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, अडानी सोलर, वुड मैकेंज़ी की ग्लोबल सोलर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल निर्माता रैंकिंग 2026 में छठे स्थान पर रही. इस सालाना मूल्यांकन में यह सबसे ऊंची रैंकिंग वाली भारतीय कंपनी बन गई है.
Adani Solar Ranking 2026
Adani Solar Ranking 2026: अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ANIL) की सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, अडानी सोलर, वुड मैकेंज़ी की ग्लोबल सोलर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल निर्माता रैंकिंग 2026 में छठे स्थान पर रही. इस सालाना मूल्यांकन में यह सबसे ऊंची रैंकिंग वाली भारतीय कंपनी बन गई है. एनर्जी रिसर्च और कंसल्टेंसी फर्म वुड मैकेंज़ी की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने पिछली रैंकिंग में आठवें स्थान से सुधार किया है और ग्लोबल टॉप 10 में शामिल होने वाली एकमात्र भारतीय निर्माता है. 2026 की स्टडी में 48 सोलर मॉड्यूल निर्माताओं का मूल्यांकन कई पैमानों पर किया गया, जिनमें क्षमता का उपयोग, टेक्नोलॉजी की परिपक्वता, वित्तीय प्रदर्शन, सप्लाई चेन की मजबूती और ऑपरेशनल क्षमता शामिल हैं.
वुड मैकेंज़ी ने अडानी सोलर को ‘ग्रेड A’ का दर्जा दिया है. इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, वित्तीय स्थिति, सप्लाई चेन की मजबूती और ऑपरेशनल मेट्रिक्स में कंपनी के प्रदर्शन का हवाला दिया गया है. यह रैंकिंग ऐसे समय में आई है जब भारत घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाना चाहता है और आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है. कंपनी द्वारा बताए गए इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, भारत की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2014 में 2.5 गीगावाट (GW) से कम थी जो 2026 में 170 GW से अधिक हो गई है, जबकि घरेलू सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 27 GW तक पहुंच गई है. वुड मैकेंज़ी की सूची में टॉप छह स्थानों पर चीनी कंपनियां हैं. LONGi ग्रीन एनर्जी सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद Jinko Solar, JA Solar और Trinasolar हैं.
अडानी सोलर गुजरात के मुंद्रा में अपनी इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की सालाना क्षमता को 10 GW तक बढ़ाने के काम के अंतिम चरण में है. कंपनी अभी 2 GW की इंगॉट और वेफर क्षमता और 4-4 GW की सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का संचालन करती है. सोलर वैल्यू चेन के केवल एक हिस्से में काम करने वाले कई निर्माताओं के विपरीत, अडानी सोलर के ऑपरेशन इंगॉट, वेफर, सोलर सेल और तैयार मॉड्यूल तक फैले हुए हैं.
कंपनी को 2026 की दूसरी तिमाही में BloombergNEF टियर-1 निर्माता के रूप में भी मान्यता मिली थी और Kiwa PVEL द्वारा किए गए स्वतंत्र सोलर मॉड्यूल विश्वसनीयता मूल्यांकन में इसे लगातार टॉप परफॉर्मर का दर्जा दिया गया है. वुड मैकेंज़ी ने कहा कि ग्लोबल रैंकिंग में चीनी मैन्युफैक्चरर्स का दबदबा बना हुआ है, जबकि भारत, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर की कंपनियाँ भौगोलिक रूप से ज़्यादा विविध सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में योगदान देने वाली कंपनियों के तौर पर उभर रही हैं.
भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते सोलर मार्केट में से एक बन गया है और 2025 में सालाना सोलर क्षमता जोड़ने के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया है. देश ने अपनी क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में 155 GW से ज़्यादा सोलर पावर क्षमता स्थापित की है. भारत की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2014 में 2.5 गीगावाट (GW) से कम थी, जो 2026 में बढ़कर 170 GW से ज़्यादा हो गई है; इसमें 27 GW की घरेलू सोलर सेल क्षमता का भी सहयोग है. सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों की संख्या 2021 में 21 थी जो आज बढ़कर लगभग 100 हो गई है, जो इस सेक्टर के तेज़ी से विस्तार को दिखाता है.
भारत सालाना सोलर उत्पादन क्षमता जोड़ने के मामले में भी अमेरिका से आगे निकल गया है और 2025 में सोलर ग्रोथ के लिहाज़ से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है. इसने 155 GW से ज़्यादा की स्थापित सोलर क्षमता का आँकड़ा पार कर लिया है, जिससे देश को नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का 50 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और समय से पहले अपने ‘नेशनली डिटरमिन्ड कंट्रीब्यूशन्स’ (NDCs) को पूरा करने में मदद मिली है.
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