Cheque Bounce Explained: हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को बाउंस चेक की एक गलती के कारण जेल जाना पड़ा. इस घटना से लोगों के मन में चेक बाउंस को लेकर कई सवाल हैं. तो चलिए जानते हैं सबकुछ इस लेख में.
चेक बाउंस
Cheque Bounce Explained Story: चेक बाउंस होना भले ही मामूली सी गलती लगे, लेकिन इससे जल्दी ही जुर्माना, क्रेडिट स्कोर में गिरावट और यहां तक कि कानूनी पचड़े भी खड़े हो सकते हैं. एक साधारण भुगतान की गलती गंभीर वित्तीय नुकसान में तब्दील हो सकती है. क्या आप इन जोखिमों से अवगत हैं? हाल ही में कुछ ऐसा अभिनेता राजपाल यादव के साथ हुआ. जानिए चेक बाउंस के क्या हैं नियम, और क्या है कानूनी जोखिम. साथ ही जानेंगे इस गलती से बचने के उपाय.
चेक बाउंस होने का सबसे आम कारण अपर्याप्त धनराशि है. यदि खाते में चेक पर लिखी राशि के बराबर धनराशि नहीं है, तो बैंक उसे स्वीकार करने से इनकार कर देगा. थोड़ी सी भी धनराशि की कमी होने पर चेक वापस आ सकता है. हस्ताक्षरों का मेल न खाना भी एक आम कारण है. बैंक अपने रिकॉर्ड के अनुसार चेक पर मौजूद हस्ताक्षरों का सावधानीपूर्वक मिलान करते हैं. यदि हस्ताक्षर मेल नहीं खाते हैं, तो धोखाधड़ी से बचाव के लिए चेक को अस्वीकार किया जा सकता है. इतना ही नहीं, चेक की डिटेल्स भरन में साधारण गलतियां भी समस्याएं पैदा कर सकती हैं.
Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत यदि किसी व्यक्ति का चेक बैंक में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो जाता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है. इस स्थिति में अदालत दोषी व्यक्ति पर चेक की राशि के दोगुना तक जुर्माना लगा सकती है या अधिकतम दो वर्ष तक की कारावास की सजा दे सकती है. या दोनों दंड एक साथ भी दिए जा सकते हैं. इसके अलावा, संबंधित पक्ष चेक की राशि की वसूली के लिए अलग से दीवानी मुकदमा भी दायर कर सकता है, जिसमें आपराधिक सजा के बजाय केवल रकम की वसूली का उद्देश्य होता है.
बैंक आमतौर पर चेक बाउंस होने पर जारीकर्ता और भुगतान प्राप्तकर्ता दोनों से शुल्क लेते हैं, जो विभिन्न वित्तीय संस्थानों में अलग-अलग होता है. इसके अलावा, यदि मामला अदालत तक पहुंचता है तो कानूनी शुल्क भी लग सकता है. अगस्त 2021 में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक निर्देश जारी किया जिसमें कहा गया कि जो ग्राहक चेक पर बहुत अधिक निर्भर हैं या उनका उपयोग करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने बैंक खातों में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखनी होगी. यदि आवश्यक न्यूनतम शेष राशि नहीं रखी जाती है, तो चेक बाउंस हो जाएगा। इसके अलावा, चेक जारी करने वाले पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
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