5 Reasons for Gold Price Drop: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट पर साफ दिखने लगा है. ताज्जुब की बात यह है कि जिसे सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता था उस सोने की चमक भी आज फीकी पड़ गई है. पिछले चार दशकों में सोने की साप्ताहिक कीमतों में यह सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. ग्लोबल मार्केट में सोना 4,354 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है जबकि 13 मार्च को यह 5,200 डॉलर के स्तर पर था. आखिर क्यों गिर रहे हैं दाम? आइए जानते हैं इसके 5 मुख्य कारण भारतीय बाजार (MCX) का हाल भारतीय बाजार में भी सोमवार को सोना-चांदी बुरी तरह टूटे हैं. दोपहर 1:00 बजे के करीब MCX पर सोना करीब 13,601 रुपए (9.41%) की गिरावट के साथ 1,30,891 रुपए पर आ गया जबकि चांदी करीब 23,157 रुपए (10.21%) लुढ़क कर ₹2,03,615 पर पहुँच गई. 1. भारी मुनाफावसूली पिछले कुछ महीनों में कीमतों में जो जबरदस्त उछाल आया था उसके बाद अब निवेशक अपना मुनाफा समेटने में लगे हैं. युद्ध की शुरुआत में लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से खूब सोना खरीदा था अब वही लोग इसे बेचकर पैसा निकाल रहे हैं. 2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने संकेत दिए हैं कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं. जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो लोग सोने के बजाय बॉन्ड्स में निवेश करना बेहतर समझते हैं क्योंकि वहां रिटर्न पक्का मिलता है. 3. डॉलर की मजबूती अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में खरीदा-बेचा जाता है. डॉलर की मजबूती की वजह से सोने की डिमांड पर सीधा असर पड़ा है जिससे इसकी कीमतों में सुधार देखने को मिल रहा है. 4. चीन का बड़ा फैसला चीन दुनिया में सोने के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है. वहां के सेंट्रल बैंक ने फिलहाल सोना खरीदना बंद कर दिया है जिसका असर पूरी दुनिया के बाजार पर पड़ा है. 5. बड़े निवेशकों की बिकवाली बड़े संस्थागत निवेशक अब अपना पोर्टफोलियो बदल रहे हैं. वे सोने से पैसा निकालकर उन जगहों पर लगा रहे हैं जहाँ कम समय में ज्यादा मुनाफा मिल सके. साथ ही गोल्ड ETF से भी लगातार पैसा बाहर निकल रहा है. जानकारों की राय जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार का कहना है कि दुनिया भर में इस वक्त अनिश्चितता का माहौल है. इसका असर सिर्फ शेयर बाजार पर ही नहीं बल्कि सोना-चांदी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स पर भी पड़ा है. उनका कहना है कि ऐसे समय में निवेशकों को पैनिक में आकर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए बल्कि शांत रहना चाहिए.