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Home > धर्म > 1700 साल पुराना मंदिर और चमत्कार ऐसा कि दिन में 3 बार बदलती है देवी की मूर्ति का रंग,जानें सच

1700 साल पुराना मंदिर और चमत्कार ऐसा कि दिन में 3 बार बदलती है देवी की मूर्ति का रंग,जानें सच

Chaitra Navratri 2026: इस समय चैत्र नवरात्रि का पावन समय चल रहा है, जिसके चलते चारों ओर भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिल रहा है. इस खास अवसर पर आज हम आपको एक ऐसे अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी कहानी बेहद चौंकाने वाली है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 23, 2026 16:12:10 IST

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन समय चल रहा है और देशभर में भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं. इन नौ दिनों को साधना, व्रत और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पूरे श्रद्धा भाव से की गई पूजा से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और जीवन के दुख-दर्द दूर कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसी खास अवसर पर आज हम आपको एक ऐसे अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसकी मान्यताएं सुनकर हर कोई चौंक जाता है.

इस मंदिर को लेकर एक बेहद दिलचस्प कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि इसका निर्माण केवल एक रात में हुआ था. गांववालों ने मंदिर बनाने के लिए ईंटें तो तैयार की थीं, लेकिन जब सुबह वहां पहुंचे तो देखा कि बिना किसी भट्ठे के ही ईंटें पूरी तरह पकी हुई थीं. यही नहीं, मंदिर को जोड़ने के लिए न तो सीमेंट का उपयोग हुआ और न ही चूना, बल्कि बेल और गुड़ के मिश्रण से इसे मजबूत बनाया गया था.

उत्तराखंड की वादियों में बसा चमत्कारी धाम

उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है. इन्हीं पहाड़ियों के बीच अल्मोड़ा जिले के शीतलाखेत क्षेत्र के पास स्थित है स्याही देवी मंदिर, जिसे कई लोग शाही देवी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनोखे चमत्कारों और रहस्यों के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है.इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध कत्युरी राजवंश के समय से माना जाता है. इसकी प्राचीनता लगभग 900 से लेकर 1700 साल तक बताई जाती है. इतने लंबे समय से यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आज भी इसकी मान्यता में कोई कमी नहीं आई है.

52 गांवों की आस्था का केंद्र

स्याही देवी को आसपास के करीब 52 गांवों की इष्ट देवी माना जाता है. कई परिवार इन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं. स्थानीय लोगों का गहरा विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि दूर-दराज से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, खासकर नवरात्रि के दौरान यहां भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलता है.

दिन में तीन बार बदलता है माता का रंग

इस मंदिर की सबसे खास और रहस्यमयी बात यह है कि यहां स्थापित देवी की मूर्ति का रंग दिन में तीन बार बदलता हुआ दिखाई देता है. सुबह, दोपहर और शाम के समय प्रतिमा का रंग अलग-अलग नजर आता है. श्रद्धालु इसे माता की जीवंत शक्ति और दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं, जो इस मंदिर को और भी खास बना देता है.मान्यता है कि वर्ष 1898 में स्वामी विवेकानंद भी इस पवित्र स्थल पर आए थे. उन्होंने यहां ध्यान और साधना की थी, जिसके बाद से यह स्थान साधकों और संतों के लिए भी विशेष महत्व रखने लगा. आज भी कई लोग यहां शांति और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में पहुंचते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 23, 2026 16:12:10 IST

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन समय चल रहा है और देशभर में भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं. इन नौ दिनों को साधना, व्रत और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पूरे श्रद्धा भाव से की गई पूजा से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और जीवन के दुख-दर्द दूर कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसी खास अवसर पर आज हम आपको एक ऐसे अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसकी मान्यताएं सुनकर हर कोई चौंक जाता है.

इस मंदिर को लेकर एक बेहद दिलचस्प कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि इसका निर्माण केवल एक रात में हुआ था. गांववालों ने मंदिर बनाने के लिए ईंटें तो तैयार की थीं, लेकिन जब सुबह वहां पहुंचे तो देखा कि बिना किसी भट्ठे के ही ईंटें पूरी तरह पकी हुई थीं. यही नहीं, मंदिर को जोड़ने के लिए न तो सीमेंट का उपयोग हुआ और न ही चूना, बल्कि बेल और गुड़ के मिश्रण से इसे मजबूत बनाया गया था.

उत्तराखंड की वादियों में बसा चमत्कारी धाम

उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है. इन्हीं पहाड़ियों के बीच अल्मोड़ा जिले के शीतलाखेत क्षेत्र के पास स्थित है स्याही देवी मंदिर, जिसे कई लोग शाही देवी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनोखे चमत्कारों और रहस्यों के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है.इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध कत्युरी राजवंश के समय से माना जाता है. इसकी प्राचीनता लगभग 900 से लेकर 1700 साल तक बताई जाती है. इतने लंबे समय से यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आज भी इसकी मान्यता में कोई कमी नहीं आई है.

52 गांवों की आस्था का केंद्र

स्याही देवी को आसपास के करीब 52 गांवों की इष्ट देवी माना जाता है. कई परिवार इन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं. स्थानीय लोगों का गहरा विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि दूर-दराज से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, खासकर नवरात्रि के दौरान यहां भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलता है.

दिन में तीन बार बदलता है माता का रंग

इस मंदिर की सबसे खास और रहस्यमयी बात यह है कि यहां स्थापित देवी की मूर्ति का रंग दिन में तीन बार बदलता हुआ दिखाई देता है. सुबह, दोपहर और शाम के समय प्रतिमा का रंग अलग-अलग नजर आता है. श्रद्धालु इसे माता की जीवंत शक्ति और दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं, जो इस मंदिर को और भी खास बना देता है.मान्यता है कि वर्ष 1898 में स्वामी विवेकानंद भी इस पवित्र स्थल पर आए थे. उन्होंने यहां ध्यान और साधना की थी, जिसके बाद से यह स्थान साधकों और संतों के लिए भी विशेष महत्व रखने लगा. आज भी कई लोग यहां शांति और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में पहुंचते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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