Gold Silver History: सोना-चांदी वर्षों से लोगों की पसंद बना हुआ है. इसके पीछे का इतिहास कहता है कि ये दोनों ऐसे धातु हैं जो आसानी से हवा, पानी, एसिड या नमी के संपर्क में आने के बाद आसानी से रिएक्ट नहीं करती है, इसलिए ये लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. इसके अलावा, पुराना जमाने से ये धातुएं लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. इसलिए इसे दुर्लभ धातु कहा जाता है.
सोने-चंदी के रेट
Gold Silver History: क्या आपको पता है कि पूरी दुनिया में सोने-चांदी के अलावा कितने धातु मौजूद हैं? अगर आपको इस बात की जानकारी नहीं है तो आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि पीरियोडिक टेबल दुनिया में मौजूद 95 ज्ञात धातुओं को दिखाती है. इनमें लोहा, तांबा और एल्युमिनियम से लेकर प्लैटिनम जैसी दुर्लभ धातुएं शामिल हैं. हालांकि, हजारों सालों से सिर्फ सोना और चांदी ही ऊंची कीमत वाली धातुएं बनी हुई हैं. सोना और चांदी हर सभ्यता में हमेशा से कीमत, सुंदरता और धन के प्रतीक रहे हैं.
मिस्र, रोम, भारत और चीन हर जगह उनकी पूजा की जाती थी, उनसे गहने बनाए जाते थे और सिक्के ढाले जाते थे. आज भी शादियों और कई दूसरे कामों के लिए सोने और चांदी की बहुत ज्यादा मांग है.
आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि सोना-चांदी को दुनिया की नोबल धातुओं में गिना जाता है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह है कि सोना और चांदी को ऐसी धातुओं में शुमार किया जाता है जो हवा, पानी, एसिड या नमी के साथ आसानी से रिएक्ट नहीं करती है. इसके अलावा, अगर सोने की बात करें तो यह धातु सबसे कम रिएक्टिव धातु है और ऑक्सीजन के साथ भी रिएक्ट नहीं करता. इसमें जंग नहीं लगता और चाहे कोई भी हालात हों, इसकी चमक सालों तक बरकरार रहती है. चांदी कुछ खास स्थितियों में सल्फर के साथ रिएक्ट करती है लेकिन धातु पर इसका असर काफी कम होता है.
पीरियोडिक टेबल की दूसरी धातुओं की बात करें तो वो बहुत अलग तरह से व्यवहार करती हैं. हवा के संपर्क में आने पर लोहे में जंग लग जाता है, तांबा हरा हो जाता है और एल्युमिनियम पर ऑक्साइड की परत जम जाती है. यही वजह है कि पुराने समय में जब लोगों को दफनाया जाता था तो सोने और चांदी की चीजें सदियों बाद भी अक्सर वैसी ही रहती थीं. यही असाधारण स्थिरता उन्हें लगभग अमर धातुएं बनाती है.
सोना और चांदी पुराने जमाने के लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पहली धातुएं बनीं क्योंकि वे अक्सर अपने शुद्ध, प्राकृतिक रूप में पाई जाती थीं और उनके लिए एडवांस्ड गलाने की टेक्नोलॉजी की जरूरत नहीं थी. पहले जमाने का लोग उन्हें नदियों या चट्टानों से इकट्ठा कर सकते थे और हथौड़े से पीटकर उन्हें आकार दे सकते थे. सोने का इस्तेमाल लगभग 5000-6000 ईसा पूर्व के आसपास शुरू हुआ, जिसके सबसे पुराने सबूत बुल्गारिया की वर्ना संस्कृति से मिलते हैं, जबकि चांदी का इस्तेमाल लगभग 4000 ईसा पूर्व के आसपास शुरू हुआ.
सोना-चांदी केफिजिकल गुणों ने उन्हें आदर्श बनाया. सोने को बहुत पतली चादरों में पीटा जा सकता है, जबकि चांदी गर्मी और बिजली का एक बेहतरीन कंडक्टर है. उनके अपेक्षाकृत ऊंचे गलनांक ने भी उन्हें लंबे समय तक चलने वाले गहनों के लिए उपयुक्त बनाया. समय के साथ सोना और चांदी कीमत के प्रतीक बन गए क्योंकि उनमें जंग नहीं लगता, उन्हें बांटना आसान है, उनकी नकल करना मुश्किल है और वे अलग-अलग कल्चर में बड़े पैमाने पर स्वीकार किए जाते हैं.
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