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ईरान इजरायल जंग का क्रूड ऑयल से लगाकर सोने तक क्या पड़ेगा असर, चांदी महंगे होने के आसार, जानें पूरी बात?

Crude Oil Price: दोनों बेंचमार्क इंडेक्ससेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार 27 फरवरी को लगभग 1% नीचे बंद हुए, जिसकी वजह लगातार जियोपॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया.

Crude Oil Price: दोनों बेंचमार्क इंडेक्ससेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार 27 फरवरी को लगभग 1% नीचे बंद हुए, जिसकी वजह लगातार जियोपॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल था. सेंसेक्स 961 पॉइंट्स या 1.17% गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 318 पॉइंट्स या 1.25% गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ. बड़े बाज़ारों पर भी दबाव रहा. BSE 150 मिडकैप इंडेक्स 1.09% और BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.86% गिरा.

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च के SVP, अजीत मिश्रा ने कहा कि लगातार जियोपॉलिटिकल टेंशन ईरान जंग और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमजोरी की वजह से इक्विटी मार्केट इस हफ़्ते काफी दबाव में खत्म हुए. शुरुआत में अच्छी शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स हफ़्ते के बीच में सुस्त रहे. हालांकि, आखिरी सेशन में तेज गिरावट ने बुल्स को पीछे धकेल दिया. 

अगले हफ़्ते स्टॉक मार्केट का आउटलुक

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मनोरंजन शर्मा के मुताबिक, यूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता टेंशन 28 फरवरी, 2026 को तेज़ी से बढ़ गया. इससे ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर काफी असर पड़ा. शर्मा ने कहा, ‘इंडियन इक्विटी मार्केट पहले ही रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट के साथ रिस्पॉन्स दे चुके हैं. बेंचमार्क इंडेक्स के नीचे खुलने की उम्मीद है, साथ ही इन्वेस्टर्स के जियोपॉलिटिकल और कमोडिटी से जुड़े रिस्क को फिर से देखने की वजह से वोलैटिलिटी भी बढ़ेगी. लगभग 1–1.5% का शॉर्ट-टर्म करेक्शन हो सकता है, जिसमें ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल और FMCG जैसे सेक्टर नीचे की ओर दबाव का सामना कर रहे हैं. इसके उलट IT कंपनियों और कुछ एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड बिजनेस को ग्लोबल रिस्क से बचने और US डॉलर के मजबूत होने के बीच रिलेटिव सपोर्ट मिल सकता है.’

कच्चे तेल की कीमतें

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ईरान के खिलाफ US-इज़राइली हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई से कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और कीमतें सालों में नहीं देखी गई ऊंचाई तक पहुंच सकती हैं. AFP की रिपोर्ट से पता चला है कि ईरान दुनिया के टॉप दस तेल देशों में से एक बना हुआ है. अभी, देश हर दिन लगभग 3.1 मिलियन बैरल तेल पंप करता है, जो पांच दशक पहले के उसके पीक प्रोडक्शन का लगभग आधा है.

शिनहान बैंक इंडिया के ट्रेजरी हेड कुणाल सोढानी के अनुसार, भारत के कुल कच्चे तेल के इंपोर्ट (2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन) का लगभग 50% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुज़रता है. यह फारस की खाड़ी और खुले समुद्र के बीच एक बड़ा चोकपॉइंट है. इसमें रुकावट से भारत की आधी तेल सप्लाई को सीधा खतरा होगा और ग्लोबल तेल की कीमतों में रिस्क प्रीमियम बढ़ जाएगा.

सोने और चांदी के रेट

मिडिल ईस्ट में हुए नए डेवलपमेंट से जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने और इन्वेस्टर की अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है. इससे सोमवार को मार्केट खुलने पर खास एसेट क्लास खासकर इक्विटी, सोना और चांदी के रिस्पॉन्स देने की उम्मीद है. US-ईरान में बढ़ते टेंशन के बीच  SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि युद्ध से जुड़ी बढ़ती चिंताओं से अनिश्चितता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे इन्वेस्टर सेफ-हेवन एसेट के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख करेंगे. उन्हें कीमती मेटल्स के लिए गैप-अप ओपनिंग की उम्मीद है.

ग्लोबल मार्केट

रेलिगेयर ब्रोकिंग के मिश्रा के अनुसार, US और ईरान के बीच चल रहे तनाव और ट्रेड से जुड़े डेवलपमेंट के बीच ग्लोबल मार्केट, खासकर US के परफॉर्मेंस पर करीब से नज़र रखी जाएगी. शुक्रवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण टेक्नोलॉजी शेयरों पर भारी असर पड़ा, जिससे नैस्डैक मार्च 2025 के बाद से अपनी सबसे तेज़ मंथली गिरावट की ओर बढ़ गया. दिन में बाद में आने वाले ज़रूरी महंगाई के डेटा से पहले इन्वेस्टर भी सतर्क रहे.  S&P 500 0.4% फिसला, जो पिछले 10 महीनों में इसका सिर्फ़ दूसरा मंथली नुकसान है. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.1% गिरा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.9% गिरा.

FII और DII एक्टिविटी

कई महीनों तक लगातार बिकवाली के बाद विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने रुख बदला और फरवरी में भारतीय इक्विटी में नेट बायर बन गए. घरेलू मार्केट में चल रहे उतार-चढ़ाव के बावजूद, उन्होंने 17 महीनों में अपना सबसे ज़्यादा मंथली इनफ्लो दर्ज किया. अब तक, FIIs ने सेकेंडरी मार्केट में लगभग $2.14 बिलियन और प्राइमरी मार्केट में लगभग $299 मिलियन का इन्वेस्टमेंट किया है. इससे कुल नेट इनफ्लो लगभग $2.44 बिलियन हो गया है. यह सितंबर 2024 के बाद सबसे ज़्यादा मंथली इनफ्लो है, जब इन्वेस्टमेंट लगभग $5.95 बिलियन तक पहुंच गया था. देखना होगा कि चीजें आगे कैसे बढ़ती हैं?

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