NPS या म्यूचुअल फंड, रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर है? जानिए NPS के टैक्स फायदे, UPI से 3 क्लिक में खाता खोलने की सुविधा और निवेश के नियम क्या हैं.
NPS vs Mutual Funds: अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का इंतजाम करना चाहते हैं, तो आपके सामने दो बड़े विकल्प होते हैं- म्यूचुअल फंड और नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS. दोनों में निवेश के अपने फायदे हैं, लेकिन टैक्स छूट और निवेश की स्कीम बदलने की सुविधा के मामले में NPS को बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
पेंशन फंड नियामक PFRDA के चेयरमैन शिवसुब्रमणियन रमन का कहना है कि टैक्स बेनेफिट और बिना अतिरिक्त टैक्स के निवेश विकल्प बदलने की सुविधा के कारण लंबी अवधि में NPS म्यूचुअल फंड के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. इतना ही नहीं, अब NPS में निवेश करना भी पहले से आसान होने जा रहा है. PFRDA ने UPI के जरिए सिर्फ तीन क्लिक में पेंशन खाता खोलने की सुविधा शुरू की है. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को रिटायरमेंट सेविंग से जोड़ना है.
NPS और म्यूचुअल फंड की तुलना करते समय सबसे अहम सवाल टैक्स और निवेश की फ्लेक्सिबिलिटी का है. PFRDA चेयरमैन के मुताबिक, NPS में निवेश करने वाले सब्सक्राइबर को अपनी निवेश स्कीम बदलने की सुविधा मिलती है. इसके लिए अलग से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना पड़ता और स्कीम बदलने पर कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगता.
इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा ट्रांसफर करना टैक्स के लिहाज से महंगा पड़ सकता है. ऐसा करने पर कैपिटल गेन टैक्स की देनदारी बन सकती है.
हालांकि, NPS में मिलने वाले टैक्स बेनेफिट के साथ एक बात समझना जरूरी है. रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली एन्युटी यानी नियमित पेंशन से होने वाली आमदनी पर निवेशक के लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. इसलिए सिर्फ टैक्स छूट के आधार पर दोनों विकल्पों में से किसी एक को बेहतर नहीं कहा जा सकता.
NPS में निवेश को आसान बनाने के लिए PFRDA ने NPS Tatkal सुविधा शुरू की है. इसके जरिए लोग UPI ऐप की मदद से सिर्फ तीन क्लिक में अपना पेंशन अकाउंट खोल सकते हैं.
इस प्रक्रिया में बैंक के पास पहले से मौजूद KYC जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी नया खाता खोलने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम होगी.
PFRDA चेयरमैन शिवसुब्रमणियन रमन के मुताबिक, देश में करीब 80 करोड़ लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में UPI का नेटवर्क NPS को आम लोगों तक पहुंचाने का बड़ा जरिया बन सकता है. बैंकों को भी इसके लिए अलग से नया डिजिटल सिस्टम तैयार करने की जरूरत नहीं होगी. वे अपने मौजूदा सिस्टम के जरिए ग्राहकों को NPS से जोड़ सकते हैं.
PFRDA सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि बैंकों को भी NPS से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है. इसकी वजह यह है कि बैंकों के पास पहले से करोड़ों ग्राहकों का नेटवर्क और उनकी KYC से जुड़ी जानकारी मौजूद है.
बैंक अपने मौजूदा ग्राहकों को NPS से जोड़कर बिना ज्यादा अतिरिक्त खर्च के नए खाते खुलवा सकते हैं. इससे ग्राहकों के साथ उनका जुड़ाव बढ़ेगा और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचने के अवसर भी मिलेंगे.
NPS के तहत पॉइंट ऑफ प्रेजेंस यानी PoP को निवेश की कुल रकम (AUM) पर सालाना करीब 0.2 फीसदी कमीशन मिलता है. ऐसे में NPS का विस्तार बैंकों और दूसरे डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स के लिए भी कमाई का जरिया बन सकता है.
PFRDA को उम्मीद है कि डिजिटल सुविधाओं और जागरूकता अभियान के जरिए अगले 2 से 3 साल में NPS से 4 से 5 करोड़ नए लोग जुड़ सकते हैं.
फिलहाल NPS में करीब 1.5 करोड़ सरकारी और 1 करोड़ गैर-सरकारी सब्सक्राइबर हैं. वहीं, NPS और अटल पेंशन योजना (APY) को मिलाकर करीब 10 करोड़ लोग इन योजनाओं से जुड़े हुए हैं.
PFRDA का फोकस अब सरकारी कर्मचारियों के अलावा निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, छोटे कारोबारियों और आम निवेशकों तक भी पेंशन की सुविधा पहुंचाने पर है.
NPS में निवेश शुरू करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं है. PFRDA चेयरमैन के मुताबिक, UPI के जरिए लोग रोजाना या हर घंटे 10 रुपये जैसी छोटी रकम भी जमा कर सकते हैं. इस सुविधा के जरिए छोटे निवेशकों को भी रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करने का मौका मिलेगा.
लेकिन NPS और म्यूचुअल फंड के बीच एक बड़ा अंतर लिक्विडिटी यानी पैसा निकालने की सुविधा का है. NPS में निवेश पर निकासी से जुड़े नियम और प्रतिबंध लागू होते हैं. इससे रिटायरमेंट के लिए जमा की गई रकम को बीच में खर्च करने की संभावना कम होती है.
दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड में निवेश की रकम जरूरत के मुताबिक निकाली जा सकती है. हालांकि, इसमें भी फंड की कैटेगरी और एग्जिट लोड जैसे नियम लागू हो सकते हैं.
यानी अगर आपका मकसद रिटायरमेंट के लिए अनुशासित तरीके से लंबी अवधि की बचत करना है, तो NPS एक विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर आपको निवेश में ज्यादा लिक्विडिटी और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की आजादी चाहिए, तो म्यूचुअल फंड पर विचार किया जा सकता है.
PFRDA के सामने NPS का दायरा बढ़ाने के साथ इसके कुल निवेश को भी तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य है. फिलहाल NPS का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.
संस्था का अनुमान है कि 2040 तक यह रकम बढ़कर 100 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. डिजिटल तरीके से खाता खोलने की सुविधा, UPI के जरिए छोटे निवेश और बैंकों की भागीदारी इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
कुल मिलाकर, NPS को ज्यादा आसान और सुलभ बनाने की PFRDA की कोशिश रिटायरमेंट प्लानिंग के बाजार को बड़ा कर सकती है. हालांकि, NPS और म्यूचुअल फंड में से सही विकल्प चुनने से पहले टैक्स बेनेफिट, रिटर्न, निकासी के नियम और निवेश की जरूरतों को समझना जरूरी है.
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