Piccadily Agro news: पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज ने 23 सितंबर को करनाल जिला न्यायालय से एक अंतरिम निषेधाज्ञा प्राप्त की, जिसमें रेडिको खेतान को वोडका ब्रांड नाम "कश्मीर" का उपयोग करने से रोक दिया गया. अदालत ने कहा कि यह नाम पिकाडिली के पंजीकृत ट्रेडमार्क "कैशमीर" और "कैशमीयर" से भ्रामक रूप से मिलता-जुलता है.
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Piccadily Agro: पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने रेडिको खेतान लिमिटेड के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल की है. करनाल जिला न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश जारी कर रेडिको खेतान को अपने वोडका उत्पादों के लिए ‘कश्मीर’ ब्रांड का उपयोग करने से रोक दिया है, जो दोनों शराब निर्माताओं के बीच चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.
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यह विवाद लक्ज़री वोदका उत्पादों के लिए पिकाडिली के पंजीकृत ट्रेडमार्क ‘कैशमीयर’ और ‘कैशमीर’ को लेकर है. पिकाडिली ने 2015 में ‘कैशमीयर’ पंजीकृत कराया था और उसके बाद 2023 में ‘कैशमीर’ हासिल किया. कंपनी ने 23 मई, 2025 को ‘कैशमीर’ ब्रांड के तहत अपना पहला लक्ज़री वोडका लॉन्च किया.
पिकाडिली के लॉन्च के बाद, रेडिको खेतान ने 28 जुलाई, 2025 को ‘कश्मीर’ ब्रांड नाम के तहत एक वोडका उत्पाद पेश किया. इस कदम ने पिकाडिली को रेडिको खेतान के खिलाफ एक वाणिज्यिक मुकदमा दायर करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ का आरोप लगाया गया.
23 सितंबर, 2025 को करनाल जिला न्यायालय ने पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज के पक्ष में एक अंतरिम आदेश जारी किया. न्यायालय ने रेडिको खेतान, उसकी सहायक कंपनियों, अधिकारियों और एजेंटों को निम्नलिखित कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया:
यह निषेधाज्ञा मामले के अंतिम निर्णय तक प्रभावी रहेगी.
पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज ने कहा है कि उसे इस मुकदमे से कोई वित्तीय नुकसान होने की उम्मीद नहीं है. मामले में दावों की राशि अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है.
स्टॉक एक्सचेंजों को दिए गए अपने खुलासे में पिकाडिली ने ‘कश्मीर’ और उसके पंजीकृत चिह्नों के बीच ध्वन्यात्मक समानता पर जोर देते हुए तर्क दिया कि रेडिको खेतान का उत्पाद उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा कर सकता है, विशेष रूप से यह देखते हुए कि दोनों वोदका एक ही श्रेणी और मूल्य बिंदु में हैं.
यह मामला भारत के प्रीमियम वोडका बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और शराब उद्योग में बौद्धिक संपदा संरक्षण के महत्व को उजागर करता है. चूँकि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए उद्योग जगत के पर्यवेक्षक भारतीय स्पिरिट क्षेत्र के दो प्रमुख खिलाड़ियों के बीच इस उच्च-दांव वाले ट्रेडमार्क विवाद के अंतिम परिणाम पर उत्सुकता से नज़र रखेंगे.
पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज ने सेबी विनियमों के तहत अपने दायित्वों के अनुरूप, मामले में आगे की जानकारी उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है, जैसे ही कोई महत्वपूर्ण घटनाक्रम घटित होगा.
हाल ही में जेफ़रीज़ ने रैडिको खेतान पर कवरेज शुरू करते हुए इसे ‘खरीदने’ की रेटिंग दी और कहा कि उसे उम्मीद है कि कंपनी राजस्व में मजबूत दो अंकों की वार्षिक वृद्धि दर्ज करेगी, साथ ही लाभांश मार्जिन बढ़ाने की बड़ी संभावनाएँ भी हैं. जेफ़रीज़ ने यह भी बताया कि भारत की स्पिरिट्स इंडस्ट्री बहुत बड़ी है और जटिल राज्य-स्तरीय विनियमों से संरक्षित है, जो नए खिलाड़ियों के लिए ऊँची प्रवेश बाधाएँ खड़ी करती हैं और मौजूदा कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देती हैं.
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