Sridhar Vembu: ज़ोहो के CEO श्रीधर वेम्बू का मानना है कि भारत में भविष्य में एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की क्षमता है. उनकी बातें ऐसे समय में आई हैं जब देश ने खुद को दुनिया की टॉप पांच मैन्युफैक्चरिंग इकॉनमी में से एक बना लिया है.
Zoho CEO Sridhar Vembu
Zoho CEO Sridhar Vembu: ज़ोहो के CEO श्रीधर वेम्बू का मानना है कि भारत में भविष्य में एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की क्षमता है. उनकी बातें ऐसे समय में आई हैं जब देश ने खुद को दुनिया की टॉप पांच मैन्युफैक्चरिंग इकॉनमी में से एक बना लिया है. वेम्बू ने उन खास एरिया की ओर इशारा किया जिन पर हमें जल्द ही यह कामयाबी हासिल करने के लिए फोकस करने की ज़रूरत है.
X पर, ज़ोहो के को-फाउंडर ने एक पोस्ट का जवाब दिया जिसमें मैन्युफैक्चरिंग में भारत की टॉप-पांच रैंकिंग पर ज़ोर दिया गया था. पोस्ट के मुताबिक, भारतीय मैन्युफैक्चरिंग $443.91 बिलियन पर थी, जो चौथे नंबर पर मौजूद जर्मनी से पीछे थी. टॉप तीन जगहों पर चीन, US और जापान थे.
श्रीधर वेम्बू ने भारत और दूसरी मैन्युफैक्चरिंग ताकतों के बीच अंतर बताया. पोस्ट का जवाब देते हुए, श्रीधर वेम्बू ने यूज़र्स से इस बात पर गहराई से सोचने को कहा कि भारत उन देशों से कैसे अलग है जिनकी आबादी कम है और लेबर कॉस्ट ज़्यादा है. उन्होंने कहा, “ध्यान दें कि जापान और जर्मनी कितनी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग पावर हैं, जिनकी आबादी भारत से बहुत कम है और लेबर कॉस्ट भारत या चीन से भी बहुत ज़्यादा है.” वेम्बू ने आगे कहा, “स्विट्जरलैंड और नीदरलैंड्स भी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में अपनी काबिलियत से कहीं ज़्यादा असरदार हैं.”
वेम्बू ने अपने मैन्युफैक्चरिंग दबदबे का क्रेडिट “कैपिटल गुड्स जैसे कि एडवांस्ड और हाई प्रिसिजन मशीनरी में महारत” को दिया. ज़ोहो चीफ ने आगे कहा कि ये देश एडवांस्ड मटीरियल, सेंसर और मुश्किल इंडस्ट्रियल प्रोसेस में भी स्पेशलाइज़्ड हैं. उन्होंने समझाया कि ये सेक्टर ज़्यादा सैलरी वाले माहौल में भी, वैल्यू एडिशन और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस के लिए ज़रूरी हैं. श्रीधर वेम्बू ने बताया कि चीन भी इन एरिया में आगे बढ़ रहा है, और एक “हाई सैलरी वाला देश” बन रहा है.
श्रीधर वेम्बू ने इनकम लेवल बढ़ाने और अपनी ग्लोबल पोजीशन को मज़बूत करने के लिए भारत के एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग फील्ड में महारत हासिल करने के महत्व पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा, “सच में एक महान मैन्युफैक्चरिंग देश बनने और अपने लोगों के लिए ज़्यादा इनकम पाने के लिए, भारत को इन सभी एरिया में महारत हासिल करने की ज़रूरत है.” वेम्बू ने ज़ोर देकर कहा कि देश के पास यह काम करने के लिए रिसोर्स और पोटेंशियल है. ज़ोहो चीफ़ ने आगे कहा, “हम यह कर सकते हैं.” उनके एनालिसिस से पता चलता है कि कम लेबर कॉस्ट के बजाय टेक्नोलॉजी और प्रोसेस मास्टरी के ज़रिए वैल्यू क्रिएशन, लंबे समय तक मैन्युफैक्चरिंग में सफलता के पीछे ड्राइवर है.
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