Gas Cylinder Weight: भारत में पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर को लेकर चर्चा लगातार जारी है. गैस सिलेंडर 14. 2 किलोग्राम का आता है और यह पिछले कई सालों से आ रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गैस सिलेंडर केवल 14.2 किलोग्राम का ही क्यों आता है 15 या फिर पूरे 14 किलोग्राम का क्यों नहीं होता है. शायद ही यह बात कभी किसी के दिमाग में आती होगी, लेकिन इसके पीछे का लॉजिक आपके लिए जानना बेहद जरूरी है.
एलपीजी गैस सिलेंडर (Gas Cylinder Price) में यह नंबर होता है, लेकिन जब आप कमर्शियल गैस लेते हैं तो वह आपको इससे ज्यादा वजन के साथ मिलती है. चलिए जानते हैं आखिर गैस सिलेंडर 14.2 किलोग्राम का ही क्यों क्यों होता है.
14.2 किलोग्राम का ही क्यों होता है सिलेंडर?
भारत में साल 1950 के दशक में बर्मा शेल नामक कंपनी द्वारा गैस सिलेंडर के 14.2 किलोग्राम होने का मानक तय किया था. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण माना जा रहा था कि एक औसतन व्यक्ति 14.2 किलोग्राम के वजन को आसान से उठा सकता है. इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी सिलेंडर कसा वजन 14.2 किलो रखा गया है. दरअसल, गर्मियों के मौसम में गैस का दबाव बढ़ जाता है, जिसके चलते कई बार गैस फैलने या आग लगने का खतरा रहता है. वहीं, 14.2 किलो गैस होने से सिलेंडर में गैस फैलने की जगह रहती है और ऐसी स्थिति में गैस नियंत्रित रहती है. माना जाता है कि इससे ज्यादा गैस भरने से सिलेडडर में ओवरप्रेशर होने का खतरा बढ़ जाता है.
इन पहलुओं का भी रखा गया ध्यान
दरअसल, गैस के वजन को कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया गया है. माना जाता है कि 14.2 किलो कसे ज्यादा के सिलेंडर को न तो उपभोक्ता ठीक से उठा पाएंगे और ऐसे में सिलेंडर पहुंचाने वाले डिलीवरी मैन को भी समस्या हो सकती है. गैस भरते समय इसके दबाव को झेलने के लिए भी इतने किलो का सिलेंडर सटीक माना जासता है. माना जाता है कि प्रोपेन और ब्यूटेन की डेंसिटी को नियंत्रित रखने के लिए भी गैस का 14.2 किलोग्राम वजन होना ठीक है.