UPSC IAS Success Story: राजस्थान की एक लड़की ने सिर्फ 26 साल में यूपीएससी में ऑल इंडिया 237वीं रैंक हासिल कर दिखाया कि आत्मविश्वास और मेहनत से कोई मंज़िल मुश्किल नहीं है.
IAS Success Story: हौसले मजबूत हों तो मंज़िलें खुद रास्ता दे देती हैं. इस सोच को राजस्थान के नवां गांव की फराह हुसैन (Farha Hussain) ने सच कर दिखाया है. सिर्फ 26 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी में ऑल इंडिया 237वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन और आत्मविश्वास के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती. साल 2016 में वे राजस्थान की दूसरी मुस्लिम महिला आईएएस अधिकारी बनीं.
उनकी सफलता को और खास बनाता है यह तथ्य कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में यह कठिन परीक्षा पास की. फराह की कहानी बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार, तो सपने सच होना तय है.
आज के दौर में जहां अधिकांश अभ्यर्थी वर्षों तक कोचिंग और गाइडेंस पर निर्भर रहते हैं, वहीं फराह ने आत्मविश्वास, अनुशासन और सही रणनीति के दम पर सफलता हासिल की. उन्होंने यह दिखाया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी ईमानदारी से की जाए, तो संसाधनों की कमी भी बाधा नहीं बनती. उनकी सफलता खासकर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों या साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और सिविल सेवा का सपना देखते हैं.
फराह हुसैन ऐसे परिवार से आती हैं जहां प्रशासनिक सेवा एक परंपरा जैसी है. उनके परिवार में 3 आईएएस, 1 आईपीएस और 5 आरएएस अधिकारी शामिल हैं. उनके पिता अशफाक हुसैन जिला कलेक्टर रह चुके हैं. इसके अलावा उनके चाचा और चचेरे भाई भी पुलिस और राज्य प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत हैं. ऐसे माहौल में पली-बढ़ी फराह के लिए प्रशासनिक सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और समाज सेवा का माध्यम रही है. परिवार से मिले मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया.
सिविल सेवा में आने से पहले फराह ने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. उन्होंने क्रिमिनल लॉयर के रूप में भी कार्य किया, जिससे उन्हें कानून, न्याय व्यवस्था और प्रशासन की बारीकियों को समझने का व्यावहारिक अनुभव मिला. यही अनुभव आगे चलकर उनकी UPSC तैयारी में मददगार साबित हुआ. कानूनी ज्ञान ने उन्हें उत्तर लेखन और इंटरव्यू में गहराई प्रदान की.
फराह हुसैन के पति कमर उल ज़मान चौधरी भी जोधपुर में आईएएस अधिकारी के रूप में तैनात रहे. दोनों मिलकर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. फराह की कहानी यह बताती है कि सफलता सिर्फ कोचिंग या संसाधनों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि आत्मविश्वास, निरंतर मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य पर आधारित होती है.
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