IAS Story: जब एम. देवराज ( IASM Devraj) मीटिंग रूम में प्रवेश करते हैं, तो माहौल अपने आप बदल जाता है. अधिकारी सतर्क हो जाते हैं, फाइलें तेजी से खुलती हैं और बहानों की जगह जवाबदेही ले लेती है. 1996 बैच के इस वरिष्ठ IAS अधिकारी ने लगभग तीन दशकों में अपनी ऐसी छवि बनाई है, जिसमें सख्ती और पारदर्शिता दोनों साथ चलते हैं. उन्होंने एम.एससी.(कृषि) एम.ए.(पर्यावरण) और एम.ए. (डेव.एसटीडी.) की पढ़ाई पूरी की हैं.
तमिलनाडु के विरुधुनगर में जन्मे देवराज आज उत्तर प्रदेश सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी (अपॉइंटमेंट और पर्सनल) हैं और साथ ही स्टेट टैक्स विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं. यह पद राज्य की नौकरशाही की धड़कन माना जाता है, जहां से नियुक्तियां, तबादले और प्रमोशन जैसी अहम फाइलें गुजरती हैं.
दस जिलों के DM, मैदान में गढ़ी पहचान
राज्य की सत्ता के केंद्र तक पहुंचने से पहले देवराज ने लंबा फील्ड अनुभव हासिल किया. उन्होंने रामपुर, बरेली, बदायूं, झांसी और उन्नाव सहित करीब दस जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया. DM के तौर पर वे कानून-व्यवस्था से लेकर विकास परियोजनाओं तक हर मोर्चे पर सक्रिय रहे. उनकी कार्यशैली साफ शॉर्टकट नहीं, सिर्फ नियम थी.
UPPCL में सख्त फैसले और विरोध
बाद में टेक्निकल एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी और फिर Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उन्होंने सिस्टम में बड़े बदलाव किए. दो वर्षों में 250 से अधिक इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई. विरोध और धरने भी हुए, लेकिन सरकार ने उनका साथ नहीं छोड़ा और उन्होंने अपनी सख्ती बरकरार रखी.
GST और राजस्व पर फोकस
अगस्त 2024 में उन्हें स्टेट टैक्स विभाग की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद GST वसूली और निरीक्षण में तेजी आई. सरप्राइज चेक, वीकेंड रिव्यू और लक्ष्य आधारित मॉनिटरिंग से विभाग में नई सक्रियता आई. हालांकि, व्यापारियों और कुछ अधिकारियों ने दबाव की शिकायत भी की.
मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक, Yogi Adityanath उन्हें अपने भरोसेमंद अधिकारियों में गिनते हैं. जब किसी विभाग में सख्ती और अनुशासन की जरूरत होती है, तो देवराज को आगे किया जाता है. कुछ लोग उन्हें कठोर प्रशासक कहते हैं, तो कुछ उन्हें व्यवस्था सुधारने वाला अधिकारी मानते हैं. लेकिन एक बात तय है एम. देवराज को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है. उनकी कार्यशैली ने उन्हें उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक प्रभावशाली और निर्णायक चेहरा बना दिया है.