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UPSC IAS Story: 6 बार फेल, मां बीमार… फिर भी नहीं टूटी हिम्मत, 7वीं बार में बनीं IAS Officer

IAS UPSC Success Story: इंदौर की पल्लवी वर्मा (IAS Pallavi Verma) ने असफलताओं से हार नहीं मानी. सही रणनीति और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने यूपीएससी में 340वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया.

UPSC IAS Success Story: असफलता अंत नहीं होती, बल्कि वह सफलता की तैयारी होती है. सही रणनीति, आत्मविश्वास और अटूट मेहनत के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है. ऐसी ही कहानी इंदौर की पल्लवी वर्मा (IAS Pallavi Verma) की है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ते. बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएट पल्लवी ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 340वीं रैंक हासिल कर IAS अफसर बनने का सपना साकार किया.

पल्लवी अपने परिवार की पहली लड़की थीं जो यूनिवर्सिटी तक पहुंचीं. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चेन्नई में करीब 11 महीने तक सॉफ्टवेयर टेस्टर के रूप में काम किया. एक स्थिर नौकरी होने के बावजूद उनके मन में देश सेवा का सपना पल रहा था. साल 2013 में उन्होंने तय किया कि वे सिविल सेवा में जाएंगी और पूरी गंभीरता से UPSC की तैयारी शुरू कर दी.

छह बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला

UPSC का सफर आसान नहीं होता. पल्लवी को लगातार छह बार प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू स्तर पर असफलता का सामना करना पड़ा. हर बार रिजल्ट निराशाजनक रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. इसी संघर्ष के दौरान उनकी मां कैंसर से जूझ रही थीं और कीमोथेरेपी का इलाज चल रहा था. मां को दर्द में देखना किसी भी बेटी के लिए बेहद कठिन होता है, लेकिन पल्लवी ने इस दर्द को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया.

बदली रणनीति, बदला परिणाम

लगातार असफलताओं के बाद पल्लवी ने अपनी तैयारी का तरीका बदला. उन्होंने अपनी पिछली गलतियों का विश्लेषण किया, कमजोर विषयों पर खास ध्यान दिया और उत्तर लेखन अभ्यास को प्राथमिकता दी. साल 2020 में अपने सातवें प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की. 340वीं रैंक के साथ उनका नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में आया और उनका वर्षों पुराना सपना सच हो गया.

संघर्ष से मिली सीख

पल्लवी वर्मा की सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह धैर्य, समर्पण और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल है. आज पल्लवी न केवल एक IAS अधिकारी हैं, बल्कि उन सभी के लिए उम्मीद की किरण भी हैं, जो मुश्किल हालात में अपने सपनों को बचाए रखते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल अभी वह तमिलनाडु के तिरुवरूर में एडिशनल कलेक्टर (डेवलपमेंट) हैं. 

Munna Kumar

11+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल में SEO-आधारित कंटेंट, डेटा इनसाइट्स और प्रभावी स्टोरीटेलिंग में विशेषज्ञ. रणनीति, क्रिएटिविटी और टेक्निकल स्किल्स के साथ उच्च-गुणवत्ता, आकर्षक और विश्वसनीय कंटेंट तैयार करना शामिल है. अभी इंडिया न्यूज में कार्यरत हूं. इससे पहले नेटवर्क18, जी मीडिया, दूरदर्शन आदि संस्थानों में कार्य करने का अनुभव रहा है.

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