UPSC IFS Story: 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में पीएम मोदी (PM Narendra Modi) के पास दिखे शांत चेहरे ने सबका ध्यान खींचा. वह 2017 बैच के IFS अधिकारी हैं, जिन्होंने AIR 15 के बावजूद IAS नहीं चुना.
IFS Story: भारत की 77वीं गणतंत्र दिवस परेड के दौरान जब पूरा देश भव्य झांकियों, अनुशासित मार्चिंग टुकड़ियों और ऐतिहासिक समारोह में डूबा हुआ था, तभी एक शांत और आत्मविश्वास से भरा चेहरा लोगों की नज़रों में आ गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष व मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयेन के ठीक पास खड़े एक युवा अधिकारी को दोनों के बीच सहजता से संवाद कराते हुए देखा गया. उनकी सादगी और पेशेवर अंदाज़ ने बिना किसी शोर-शराबे के सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.
यह अधिकारी थे 2017 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अफसर सिद्धार्थ बाबू (IFS Sidharth Babu). कर्तव्य पथ के VIP मंच पर मौजूद सिद्धार्थ बाबू ने जिस तरह शांति और कुशलता से अपनी भूमिका निभाई, उसने उन्हें अनजाने में ही चर्चा का विषय बना दिया. खास बात यह है कि जहां अधिकांश उम्मीदवार IAS बनने के लिए टॉप रैंक हासिल करने की कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं सिद्धार्थ बाबू ने एक अलग रास्ता चुना. वर्ष 2017 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल करने के बावजूद उन्होंने IAS को प्राथमिकता न देकर IFS को चुना.
कर्तव्य पथ के VIP पोडियम पर तैनात सिद्धार्थ बाबू प्रधानमंत्री और मुख्य अतिथि के बीच लगातार अनुवाद कर रहे थे. उनकी सहज बॉडी लैंग्वेज, आत्मविश्वास और शांति ने दर्शकों को प्रभावित किया. सोशल मीडिया पर भी लोग जानने को उत्सुक हो गए कि आखिर यह अधिकारी कौन हैं, जो इतनी सहजता से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम हिस्सा बने दिखे.
केरल के कोच्चि से ताल्लुक रखने वाले सिद्धार्थ बाबू की कहानी प्रेरणादायक है. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और कुछ समय तक ई-कॉमर्स सेक्टर में काम भी किया. लेकिन हॉलीवुड की जासूसी थ्रिलर फिल्मों और ‘इंडियाज़ वर्ल्ड’ जैसे प्रोग्रामों ने उनके भीतर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर गहरी रुचि जगा दी. यहीं से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की ओर कदम बढ़ाया.
UPSC सिविल सेवा परीक्षा का पहला प्रयास उनके लिए सीखने का अनुभव रहा. उन्हें समझ आया कि यह परीक्षा सिर्फ किताबें याद करने की नहीं, बल्कि सही रणनीति, फोकस और परीक्षा पैटर्न को समझने की मांग करती है. दूसरे प्रयास में ज्यादा संतुलित सोच और शांत मानसिकता के साथ सिद्धार्थ बाबू ने ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल कर इतिहास रच दिया.
सिद्धार्थ को बाकी उम्मीदवारों से अलग बनाता है उनका दृष्टिकोण। तैयारी के दौरान उन्होंने खुद को तनाव में नहीं डाला. दोस्तों से मिलना, रिटायर्ड राजनयिकों से बातचीत करना और जीवन को व्यापक नजरिए से देखना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा.
वर्तमान में सिद्धार्थ बाबू विदेश मंत्रालय में उप सचिव (EA) के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, मोंटेरे से प्रशिक्षण लिया है. भाषाओं पर उनकी पकड़ और कूटनीतिक समझ यह साबित करती है कि शांत दिमाग और सच्ची लगन से वैश्विक मंच पर भी प्रभाव छोड़ा जा सकता है.
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