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Indian Army Success Story: RMS से स्कूलिंग, पिता की वर्दी से प्रेरणा, बेटे का सपना बना हकीकत, ऐसे बने अफसर

Indian Army Success Story: भारतीय सेना से जुड़े परिवारों में देशसेवा की परंपरा पीढ़ियों तक चलती है. धीरज डिमथिया की कहानी भी ऐसी ही है, जिनका सफर राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल से NDA होते हुए सेना में ऑफिसर बनने तक पहुंचा.

Indian Army Success Story: अक्सर भारतीय सेना से जुड़े परिवारों में यह देखा जाता है कि देशसेवा की भावना पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है. पिता अगर फौज में होते हैं, तो बेटे के मन में भी वर्दी पहनने का सपना पलने लगता है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है धीरज डिमथिया (Dheeraj Dimathia) की, जिनकी सेना तक की यात्रा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल से शुरू होकर NDA और फिर ऑफिसर बनने तक पहुंची.

आर्मी परिवार में परवरिश का असर

जम्मू-कश्मीर के रहने वाले धीरज डिमथिया एक गौरवशाली सैन्य परिवार में पले-बढ़े हैं. उनके पिता ने भारतीय सेना में करीब 30 वर्षों तक सेवा दी है. सेना से जुड़ा परिवार होने का मतलब सिर्फ़ ट्रांसफर और यूनिफॉर्म नहीं होता, बल्कि अनुशासन, नैतिक मूल्य और जिम्मेदारी को बचपन से जीवन में उतारना होता है. धीरज की शुरुआती पढ़ाई अलग-अलग आर्मी पब्लिक स्कूलों में हुई, जहां उन्हें एक अनुशासित और संतुलित जीवनशैली की मजबूत नींव मिली.

RMS बैंगलोर: जहां सोच और दिशा बदली

धीरज के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्होंने क्लास 6 में राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS), बैंगलोर जॉइन किया. शुरुआत में हॉस्टल लाइफ का रोमांच आकर्षण था, लेकिन RMS ने उन्हें उससे कहीं ज़्यादा दिया.
RMS सिर्फ़ एक स्कूल नहीं, बल्कि संस्कार और नेतृत्व गढ़ने वाला संस्थान है. यहां अनुशासन, टीमवर्क, जिम्मेदारी और भाईचारे को सिर्फ़ सिखाया नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है. यही कारण है कि RMS को NDA के लिए एक मजबूत फीडर संस्थान माना जाता है.

NDA की तैयारी: मेहनत के साथ स्मार्ट प्लानिंग

क्लास 12 तक पहुंचते-पहुंचते धीरज का लक्ष्य पूरी तरह NDA पर केंद्रित हो गया. मॉक टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन, दोस्तों के साथ तैयारी और आख़िरी समय की रिवीजन रणनीति ने उनकी तैयारी को धार दी. उन्होंने यह समझा कि सिर्फ़ मेहनत करना काफी नहीं होता बल्कि स्मार्ट वर्क और सही रणनीति ही असली सफलता दिलाती है. परीक्षा जैसे माहौल में पहले से अभ्यास करना उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा.

पहले ही प्रयास में सफलता

मेहनत और अनुशासन का परिणाम 7 फरवरी 2020 को सामने आया, जब धीरज को अपने पहले ही प्रयास में NDA 144 के लिए SSB रिकमेंडेशन मिला. इसके बाद मेडिकल भी सफलतापूर्वक क्लियर हुआ. यह उनके लिए सिर्फ़ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि बचपन के सपने के सच होने जैसा पल था. धीरज मानते हैं कि SSB कोई रहस्यमयी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामान्य परीक्षा की तरह ही है. आत्म-ज्ञान, ईमानदार तैयारी और नियमित रिवीजन इसकी सबसे बड़ी कुंजी हैं.

Munna Kumar

11+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल में SEO-आधारित कंटेंट, डेटा इनसाइट्स और प्रभावी स्टोरीटेलिंग में विशेषज्ञ. रणनीति, क्रिएटिविटी और टेक्निकल स्किल्स के साथ उच्च-गुणवत्ता, आकर्षक और विश्वसनीय कंटेंट तैयार करना शामिल है. अभी इंडिया न्यूज में कार्यरत हूं. इससे पहले नेटवर्क18, जी मीडिया, दूरदर्शन आदि संस्थानों में कार्य करने का अनुभव रहा है.

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