India Pakistan Final: भारत-पाकिस्तान के एशियन गेम्स गोल्ड मेडल मुकाबले से पहले टीम इंडिया के सहायक कोच ऋषिकेश कानितकर ने 1998 के उस भारत-पाकिस्तान फाइनल को याद किया, जिसमें उनके एक चौके ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा कि बड़े मुकाबलों में निर्णायक पलों को जीतना बेहद जरूरी होता है. कानितकर ने विराट कोहली और तिलक वर्मा के उदाहरण देते हुए कहा कि हाई-स्टेक्स मुकाबलों में ऐसे ही छोटे पल मैच का रुख तय करते हैं.
भारत-पाकिस्तान गोल्ड मेडल मुकाबले से पहले कानितकर का संदेश
India Pakistan Final: भारत और पाकिस्तान के बीच एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले टीम इंडिया के सहायक कोच ऋषिकेश कानितकर को 28 साल पुराना वह पल याद आ गया, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट की यादगार कहानियों का हिस्सा बना दिया था. 1998 में ढाका के बंगबंधु स्टेडियम में खेले गए इंडिपेंडेंस कप फाइनल में कानितकर ने पाकिस्तान के ऑफ स्पिनर सकलैन मुश्ताक की गेंद को डीप मिडविकेट के ऊपर से सीमा रेखा के पार पहुंचाकर भारत को जीत दिलाई थी. अब 3 अक्टूबर को निशिन में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले एशियन गेम्स फाइनल से पहले उन्होंने कहा कि बड़े मुकाबलों में निर्णायक पलों को अपने नाम करना बेहद जरूरी होता है.
कानितकर का अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन भारत-पाकिस्तान फाइनल में खेला गया उनका वह निर्णायक शॉट आज भी याद किया जाता है. 1998 के इंडिपेंडेंस कप फाइनल में उन्होंने सकलैन मुश्ताक की गेंद पर डीप मिडविकेट के ऊपर से चौका लगाकर भारत की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई थी. 28 साल बाद पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़े फाइनल से पहले वही अनुभव उनके जेहन में है.
कानितकर ने कहा कि हाई-स्टेक्स मुकाबलों में पूरे मैच के दौरान कई अहम पल आते हैं और उनमें जीत हासिल करना फर्क पैदा करता है. उन्होंने इसी संदर्भ में विराट कोहली और तिलक वर्मा का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, 2022 टी20 वर्ल्ड कप में विराट ने ऐसा निर्णायक पल जीता था, जबकि तिलक वर्मा ने पिछले साल हारिस रऊफ के खिलाफ छक्का लगाकर बड़े मौके का फायदा उठाया था.
एशियन गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय वॉलीबॉल टीम की 0-3 हार और हॉकी टीम की सेमीफाइनल में 4-3 की जीत से जुड़े सवाल पर कानितकर ने कहा कि इसका क्रिकेट टीम पर अतिरिक्त दबाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर मुकाबला दबाव वाला होता है और खिलाड़ियों का ध्यान सिर्फ अपने खेल और प्रदर्शन पर रहना चाहिए. कानितकर के मुताबिक, पेशेवर खेल का हिस्सा यही है कि खिलाड़ी बाहरी दबाव और शोर से खुद को अलग रखें. भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर भले ही काफी चर्चा हो, लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों का ध्यान आखिरकार गेंदबाज और बल्लेबाज के बीच की सीधी टक्कर पर ही रहेगा.
भारत और पाकिस्तान की पुरुष क्रिकेट टीमें 3 अक्टूबर 2026 को जापान के निशिन में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक मुकाबले में आमने-सामने होंगी. भारत ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जबकि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को हराकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भी दोनों टीमों के फाइनल में पहुंचने की पुष्टि की है. भारत एशियन गेम्स में लगातार दूसरा क्रिकेट गोल्ड जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरेगा. कानितकर ने कहा कि देश के पदक खाते में एक और स्वर्ण जोड़ना टीम के लिए खास होगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पदक जीतना आसान नहीं होता और इसके लिए सभी खिलाड़ियों को काफी मेहनत करनी पड़ती है.
भारत-पाकिस्तान मुकाबले की अतिरिक्त चर्चा के बावजूद कानितकर का कहना है कि खिलाड़ियों को अपने तय प्लान और भूमिका पर ध्यान देना होगा. उनके मुताबिक, बड़े मैच में बाहरी माहौल से ज्यादा जरूरी यह है कि खिलाड़ी निर्णायक मौकों पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें.
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