Vaibhav Suryavanshi: आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम के युवा ओपनर बल्लेबाज ‘वैभव सूर्यवंशी’ ने ऐसी तूफानी बल्लेबाजी की, जिसने क्रिकेट जगत को चौंका दिया. बड़े मंच पर दबाव भरे मुकाबले में वैभव ने अपने बल्ले से ऐसा तूफान उठाया कि रिकॉर्ड्स की लाइन लग गई.
फाइनल जैसे अहम मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ ’80 गेंदों में 175 रन’ ठोक दिए. इस विस्फोटक पारी के दौरान उन्होंने ’15 चौके और 15 छक्के’ जड़े. वैभव की यह पारी न सिर्फ टूर्नामेंट की सबसे बड़ी पारी साबित हुई, बल्कि ‘यूथ वनडे क्रिकेट के इतिहास में भी सबसे विशाल स्कोर’ के रूप में दर्ज हो गई.
कपिल देव की याद दिला गई ऐतिहासिक बल्लेबाजी
वैभव की इस धुआंधार पारी की तुलना अब भारतीय क्रिकेट के महान कप्तान ‘कपिल देव’ से की जा रही है. 1983 के विश्व कप में कपिल देव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी, जिसने भारत की किस्मत बदल दी थी.हालांकि तब मैच 60 ओवर का होता था, लेकिन जिस हालात में कपिल देव ने बल्लेबाजी की थी, वह किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जाती.
जब 17 रन पर गिर गए थे 5 विकेट
1983 के उस ऐतिहासिक मुकाबले में भारत ने महज 17 रन पर अपने 5 विकेट गंवा दिए थे. ऐसे मुश्किल समय में कप्तान कपिल देव ने मोर्चा संभाला और टनब्रिज के मैदान पर तूफानी बल्लेबाजी करते हुए 175 रन बनाए. उनकी उस पारी के दम पर भारत ने 266 रन खड़े किए और अंततः मुकाबला जीत लिया.वैभव सूर्यवंशी के सामने भी हालात कुछ अलग नहीं थे. पारी की शुरुआत में ही उनके ओपनिंग पार्टनर एरोन जॉर्ज सिर्फ 9 रन बनाकर आउट हो गए. लगा कि वैभव अब संभलकर खेलेंगे, लेकिन उन्होंने बिल्कुल उल्टा रास्ता चुना.
कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ आया बल्लेबाजी का तूफान
एरोन जॉर्ज के आउट होने के बाद वैभव ने कप्तान ‘आयुष म्हात्रे’ के साथ मिलकर इंग्लिश गेंदबाजों पर जबरदस्त हमला बोला. मैदान पर मौजूद हर गेंदबाज उनकी हिट-लिस्ट में था. चौके-छक्कों की बरसात देखकर ऐसा लग रहा था मानो वैभव दोहरा शतक भी पूरा कर लेंगे.हालांकि वैभव ‘मेनी लुम्सडन’ की गेंद पर आउट हो गए, लेकिन तब तक वह अपना काम कर चुके थे. उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड के सामने ’20 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन’ का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया.
भारतीय क्रिकेट को मिला नया सितारा
वैभव सूर्यवंशी की यह पारी सिर्फ एक स्कोर नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए एक मजबूत संकेत है. जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ उन्होंने फाइनल में बल्लेबाजी की, उसने साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट को एक नया मैच-विनर मिल चुका है.