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Amalaki Ekadashi Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरी है आमलकी एकादशी की पूजा, आज पढ़े जरूर!

Amalaki Vrat Katha in Hindi: फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की एकादशी रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi 2026) को आमलकी एकादशी का व्रत किया जाता है,लेकिन यह व्रत तभी पूरा माना जाता है जब इसकी व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाए. आइए जानते हैं आमलकी एकादशी व्रत की कथा

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: 2026-02-27 11:39:38

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 Amalaki Ekadashi Vrat Katha in Hindi: फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi 2026) भी कहा जाता है। हर एकादशी की तरह यह एकादशी भी बड़ी खास होती है और इसमें भी भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति एकादशी का व्रत करता है, उसे जीवन में सफलता मिलती है और तरक्की के अवसर प्राप्त होते हैं, धन लाभ होती है, परिवारिक माहौल खुशनुमा रहती है. घर की तंगी खत्म होती है, लेकिन एकादशी व्रत का फल तभी पूर्ण प्राप्त होता है, जब इसकी व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाए. आइए जानते हैं आमलकी एकादशी व्रत की कथा

 कब है आमलकी एकादशी व्रत ( Amalaki Ekadashi 2026 Date)

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (Rangbhari Ekadashi 2026) तिथी 27 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी। ये तिथि उसी दिन रात 10 बजकर 32 मिनट पर खत्म होगी। इसलिए आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। जानें शुभ मुहूर्त भी.

– अभिजीत मुहूर्त: 12:16 PM से 1:02 PM
– ब्रह्म मुहूर्त: 5:17 AM से 6:05 AM
– शुभ समय: 12:39 PM से 2:05 PM

आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैदिक नामक नगर में चंद्रवंशी राजा राज किया करता था और इस नगर के लोग भगवान विष्णु के परम भक्त थे, इसलिए एकादशी का व्रत पूरे विधिपूर्वक करते थे. एक दिन  फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आमलकी एकादशी पड़ी , लेकिन उस दिन नगर में एक महापापी शिकारी आया और वो वहा रुककरभगवान विष्णु की कथाएं सुनने लगा, इसके अलावा  उसने पूरी रात जागरण किया और व्रत के महत्व को समझा, इसके बाद वो अपने घर वापस लौटा और फिर सो गया. वहीं इसके कुछ दिनों बाद उसका देहांत हो गया। उसके पापों के अनुसार उसे नरक में जाना था. लेकिन यमराज को याद आया कि एक बार अनजाने में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी थी और जागरण भी किया था, इसी वजह से उसे उस व्रत का शुभ फल मिला. इसके बाद उसने राजा विदूर्थ के घर जन्म लिया, जहाँ उसका नाम वसुरथ रखा गया। वसुरथ बड़ा हुआ और एक दिन जंगल में घुमने निकल गया और एक पेड़ के नीचे सो गया, लेकिन वहां कुछ डाकुओं ने उस पर हमला कर दिया. लेकिन डाकुओं के सारे अस्त्र-शस्त्र का उस पर कोई असर नहीं हुआ और राजा निश्चिंत होकर सोता रहे, जब उनकी नींद खुली, तो उसने देखा कि आसपास कई लोग जमीन पर गिर हुए है, उन्हें समझ आया कि यह हमला उनके जीवन पर खतरा था। तभी आकाशवाणी हुई, “हे वसुरथ! जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने तेरी रक्षा की है। पिछले जन्म में तुमने आमलकी एकादशी व्रत किया था और कथा भी सुनी खी. यही व्रत तुम्हारे जीवन की रक्षा करने वाला फल बनकर आया है”

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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