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Bhanu Saptami and Shabari Jayanti Today: शबरी जयंती और भानु सप्तमी दोनों ही आस्था से जुड़े खास पर्व हैं. शबरी जयंती माता शबरी की भगवान राम के प्रति सच्ची भक्ति को याद करने का दिन है, वहीं भानु सप्तमी पर लोग सूर्य देव की पूजा कर अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा और तरक्की की कामना करते हैं. आइए जानते हैं, शुभ मुहूर्त, राहु काल और पूजा का सही समय
शबरी जयंती और भानु सप्तमी शुभ मुहूर्त
Bhanu Saptami and Shabari Jayanti: शबरी जयंती और भानु सप्तमी दोनों ही हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण पर्व हैं, जो भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देते हैं. शबरी जयंती माता शबरी की अटूट श्रद्धा और भगवान श्रीराम के प्रति उनके समर्पण की याद में मनाई जाती है, जो सच्चे प्रेम, धैर्य और विश्वास का प्रतीक है. वहीं भानु सप्तमी सूर्य देव को समर्पित पर्व है, जिसे 8 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा और इस दिन सूर्य की पूजा कर स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि की कामना की जाती है. इन दोनों अवसरों पर श्रद्धालु पूजा-पाठ, अर्घ्य और भक्ति के माध्यम से सकारात्मकता और ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.
भानु सप्तमी को सूर्य सप्तमी, रथ सप्तमी या सूर्य जयंती भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव ने अपनी किरणों से संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान की थी.इस दिन सूर्य की पूजा करने से स्वास्थ्य, आयु, धन और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं, जिसे शरीर और मन की शुद्धि के लिए शुभ माना जाता है.
1. सूर्योदय से पहले स्नान करें.
2. साफ स्थान पर खड़े होकर सूर्य को जल अर्पित करें.
3. “ॐ सूर्याय नमः” या गायत्री मंत्र का जाप करें.
4. फूल, धूप और फल अर्पित करें.
5. परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें.
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 8 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 2 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी और 9 फरवरी 2026 की सुबह करीब 5 बजकर 1 मिनट तक रहेगी.
इस पावन दिन पूजा-पाठ के लिए कुछ विशेष समय शुभ माने गए हैं-
इस दिन भक्त प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और घर के मंदिर में भगवान श्रीराम तथा माता शबरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करते हैं. पूजा के दौरान दीप, धूप, फूल और प्रसाद अर्पित किया जाता है.माता शबरी की भक्ति की स्मृति में बेर का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
माता शबरी को अटूट विश्वास और निष्काम भक्ति का प्रतीक माना जाता है. कथा के अनुसार उन्होंने वर्षों तक भगवान राम की प्रतीक्षा की और जब प्रभु उनके आश्रम पहुंचे तो उन्होंने प्रेम से बेर अर्पित किए. उनकी सच्ची भावना से प्रसन्न होकर भगवान राम ने उन्हें मोक्ष प्रदान किया.इसी कारण यह पर्व भक्ति, समर्पण और सादगी के महत्व को दर्शाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है.
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