Chandra Grahan On Holi 2026: नए साल यानी 2026 में सूर्य और चंद्र को मिलाकर कुल 4 ग्रहण लगेंगे. खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों को बता दें कि, इसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. 17 फरवरी से ग्रहणों की शुरुआत होगी. यह सूर्य ग्रहण होगा, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण या ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. इसी तरह साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च यानी होली के दिन लगेगा. कहा जाता है कि, होलिका दहन के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण साल का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण है. इस दिन चंद्रमा लाल रंग में नजर आएगा इसलिए इस घटना को ब्लड मून भी कहा जाएगा. अब सवाल है कि आखिर, इस साल पहला चंद्र ग्रहण कब लगेगा? होली के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं? चंद्र ग्रहण का समय क्या है? सूतक काल मान्य होगा या नहीं? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
भारत में दिखाई देगा यह चंद्र
होली पर चंद्र ग्रहण होना बेहद दुर्लभ संयोग माना जा रहा है. यह ग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण होने वाला है, जो भारत के कुछ ही हिस्सों में दिखाई देगा. चूंकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है, वहीं सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है. वैदिक ज्योतिष में ग्रहण काल को अशुभ माना गया है, फिर चाहें वह चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण.
किस राशि में होगा चंद्र ग्रहण?
होली पर चंद्र ग्रहण का होना एक दुर्लभ संयोग है. इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में रहेंगे, जहां वे केतु के साथ होंगे. साथ ही, यह ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. नए साल में लगने वाले पहले चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होने वाली है. फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि इस बार 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को है. बता दें कि, पूर्णिमा तिथि का आरंभ, दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू हो रही है और इसका समापन 6 बजकर 47 मिनट पर होगा.
चंद्र ग्रहण क्यों लगता है?
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही एक खगोलीय घटना है. चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है. इस प्रक्रिया में एक ऐसा भी समय आता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य एक ही सीध में आ जाते हैं. इस स्थिति में सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है, लेकिन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता. इसी घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है.
सूतक काल में क्या करें?
इस दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें.
ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र स्नान करें.
घर के मंदिर की सफाई करें और देवताओं की मूर्तियों को गंगाजल से शुद्ध करें.
ग्रहण के समय मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है.
सूतक काल में क्या ना करें?
भोजन और पानी का सेवन न करें.
किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य, हवन या पूजा-पाठ न करें.
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और इस समय बाहर ना निकलने की सलाह दी जाती है.
ग्रहण के दौरान सोने से बचें.