Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
Billam Bawji Temple: मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद में स्थित बिल्लम बावजी को कुंवारों के देवता माना जाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मन्नत मांगने पर विवाह की बाधाएं दूर हो जाती हैं. हर साल होली के बाद रंगपंचमी से रंग तेरस तक बिल्लम बावजी का विशेष दरबार लगता है, जहां देशभर से कुंवारे युवक-युवतियां और उनके परिवार मन्नत मांगने आते हैं. मन्नत पूरी होने पर नवदंपती यहां आकर पान और नारियल चढ़ाकर धन्यवाद देते हैं. करीब 50-60 साल पहले मनोरंजन के रूप में शुरू हुई यह परंपरा आज लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बन चुकी है.
बिल्लम बावजी का दरबार
Billam Bawji Temple: मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद कस्बे में एक ऐसी अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जहां शादी की इच्छा लेकर देशभर से कुंवारे युवक-युवतियां मन्नत मांगने आते हैं. यहां विराजमान लोक देवता ‘बिल्लम बावजी’ को कुंवारों के देवता के रूप में माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से यहां मन्नत मांगने वालों की शादी की बाधाएं दूर हो जाती हैं. होली के बाद रंगपंचमी से लेकर रंग तेरस तक यहां विशेष दरबार लगता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
हर साल होली के बाद रंगपंचमी के दिन बिल्लम बावजी की भव्य सवारी पूरे नगर में निकाली जाती है. इसके बाद उन्हें पारंपरिक स्थान भगवान गणेश मंदिर के बाहर स्थापित किया जाता है. रंगपंचमी से लेकर रंग तेरस तक यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. इस दौरान खासकर वे युवक-युवतियां यहां आते हैं जिनकी शादी किसी कारणवश नहीं हो पा रही होती. कई लोग परिवार के साथ आते हैं तो कुछ अकेले ही मन्नत मांगने पहुंचते हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां मन्नत मांगने के बाद कई युवाओं की शादियां तय हो जाती हैं. इसलिए मन्नत पूरी होने पर नवविवाहित जोड़े यहां आकर माथा टेकते हैं और आभार प्रकट करते हैं. श्रद्धालु यहां पान और नारियल चढ़ाकर अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी जताते हैं. हर साल ऐसे कई नवदंपती यहां पहुंचते हैं, जिससे इस परंपरा के प्रति लोगों का विश्वास और भी मजबूत होता जा रहा है.
बताया जाता है कि करीब 50-60 साल पहले जावद के बाजार में व्यापारियों ने रंगपंचमी के अवसर पर मनोरंजन के लिए प्रतीक स्वरूप एक पत्थर स्थापित किया था. उन व्यापारियों में से एक को बिल्लम सेठ के नाम से जाना जाता था. धीरे-धीरे लोगों ने उसी नाम से इस लोक देवता को “बिल्लम बावजी” कहना शुरू कर दिया. समय के साथ यह परंपरा मजबूत होती गई और हर साल पंचमी से रंग तेरस तक यहां पूजा और प्रसादी का आयोजन होने लगा.आज यह परंपरा आस्था का रूप ले चुकी है. अब केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से भी लोग अपने परिवार के कुंवारे सदस्यों की शादी की मन्नत लेकर यहां पहुंचते हैं. मन्नत पूरी होने पर पान और नारियल चढ़ाकर आभार व्यक्त करने की परंपरा भी निभाई जाती है.
मुख्य रूप से यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाई गई योजना है. अगर आप बंगाल…
महाकुंभ में दिखी 'नीली आंखों वाली' वायरल गर्ल आखिर क्यों पहुंची केरल के पुलिस स्टेशन?…
Bodyguard Satellite: भारत अंतरिक्ष में मौजूद अपने सैटेलाइट्स को संभावित खतरों से बचाने के लिए…
PAK vs BAN: पहले वनडे मुकाबले में बांग्लादेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शाहीन अफरीदी…
अगर किसी महिला को हैवी ब्लीडिंग होती है, तो ये आम बात नहीं है. अगर…
इस योजना के तहत हर महीने महिलाओं के खाते में कुछ राशि डालकर उनकी मदद…