Chaitra Kalashtami 2026: कालाष्टमी प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को (Kalashtami) मनाई जाती है. जानें कुत्ते को बिस्किट खिलाने से कैसे आपकी परेशानी दूर हो सकती है?
चैत्र कालाष्टमी व्रत 2026
Chaitra Kalashtami 2026: कालाष्टमी प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को (Kalashtami) मनाई जाती है. यह भूतभावन भोलेनाथ के रौद्र रूप ‘काल भैरव’ को समर्पित होती है. चैत्र मास की कालाष्टमी बेहद खास मानी जाती है. यह मार्च 2026 में पड़ती है जो कि बहुत ही शुभ माना जाता है. श्रद्धालुओं का ऐसा मत है कि जो भी भक्त भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं उनके जीवन में कभी नेगेटिविटी नहीं रहती और अकाल मौत का डर नहीं रहता है.
भगवान काल भैरव को काल यानी समय का भैरव कहा गया है. इस दिन लाखों लोग अलग-अलग जगह पर उनकी पूजा करने मंदिर में जाते हैं. चलिए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित प्रशांत मिश्रा वैदिक से कालभैरव की सही तारीख के बारें में.
पं. प्रशांत मिश्रा कहते हैं कि वैदिक पंचांग के मुताबिक, इस बार चैत्र मास की अष्टमी तिथि 11 मार्च 2026 की देर रात 01:54 बजे से लगेगी यानी कि यह 12 मार्च को पड़ेगी. पंडित के अनुसार, इस तिथि का समापन 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर हो जाएगा. चूंकि, काल भैरव की मुख्य पूजा रात के वक्त निशा काल में की जाती है, इसलिए उदया तिथि और अर्धरात्रि पूजा के मेल को देखते हुए 11 मार्च को ही Kalashtami ka vrat और पूजन करना अच्छा माना गया है.
कालाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए और स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए. अपनी आसान पर आकर भगवान की पूजा करनी चाहिए. पौराणिक कथाओं और परंपराओं के अनुसार, भगवान कालभैरव की पूजा में कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए.
रात के वक्त काल भैरव की मूर्ति या चित्र के पास सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए.
भगवान भैरव की शोडषोपचार तौर पर पूजन करें. काले तिल, उड़द और नीले फूल, नारियल और इमरती जैसी सामग्री चढ़ानी चाहिए.
भक्त पूजन के बाद ‘भैरव चालीसा’ का पाठ कर सकते हैं या फिर ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करें. हो सके तो अपने गुरु के बताए अनुसार ही पूजन करें.
श्वान या कुत्ते को काल भैरव का वाहन माना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या बिस्कुट खिलाने से भगवान की कृपा होती है .
भगवान काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ और ‘समय का स्वामी’ कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि या राहु-केतु का अशुभ प्रभाव चल रहे हैं, उनके लिए यह काफी फायदेमंद है. यह व्रत साधक को मानसिक और साहस प्रदान करता है. इससे दुश्मनों पर विजय प्राप्त होती है. यह काफी पावरफुल व्रत है.
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं. इंडिया न्यूज डॉट इन इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. इंडिया न्यूज डॉट इन अंधविश्वास के खिलाफ है.
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