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Chaitra Navratri 2026: अष्टमी या नवमी, कब करना सही होता है कन्या पूजन? जानें तिथि, विधि और शुभ मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में अष्टमी या नवमी, कन्या पूजन करना कब सही होता है? यह सवाल हर किसी के मन में आता है. आइए जानते हैं यहां इसका उत्तर

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: March 21, 2026 14:21:54 IST

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Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का त्योहार बेहद महत्वपुर्ण होता हैं, नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्त पूरे विधि विधान से मां दुर्गा के नो रूपों की पूजा करते है और व्रत रखते हैं अंत में यानी अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता हैं, क्योंकि इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि मान्याता है कि कंजक पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं. चैत्र नवरात्रि में अष्टमी या नवमी, कन्या पूजन करना कब सही होता है? यह सवाल हर किसी के मन में आता है. आइए जानते हैं यहां इसका उत्तर

कब हैं चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी?

पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि कके दिन दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है. इस बार चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च बुधवार के दिन दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर 26 मार्च गुरुवार सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक अष्टमी तिथि रहने वाली है. वहीं 26 मार्च गुरुवार सुबह 11 बजकर 49 मिनट से नवमी तिथी लग जाएगी, जो 27 मार्च सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी. इसलिए दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और महानमी 27 मार्च को रहेगी. . 

  • दुर्गा अष्टमी : 26 मार्च, गुरुवार
  • महानमी : 27 मार्च, शुक्रवार

अष्टमी या नवमी,  कन्या पूजन करना कब सही होता है?

चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन अष्टमी और नवमी दोनों ही तिथियों पर करना शुभ माना जाता है. यह पूरी तरह से आपकी पारिवारिक परंपरा और कुल की रीति पर निर्भर करता है.

अष्टमी पूजन: कई परिवारों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा होती है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में अक्सर अष्टमी को ही कन्या खिलाकर व्रत का पारण किया जाता है।

नवमी पूजन : उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व  माना जाता है. इस दिन को ‘पूर्ण पूजन’ माना जाता है और इसे अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी कहा गया है. इसी दिन भगवान राम का जन्मोत्सव यानी राम नवमी भी मनाई जाती है.

दुर्गा अष्टमी के शुभ मुहूर्त

  • शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 06:18 – सुबह 07:50 
  • चर-सामान्य मुहूर्त : सुबह 10:55 – दोपहर 12:27 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त : दोपहर 12:27 – दोपहर 01:59 

नवमी के शुभ मुहूर्त

  • सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:17- दोपहर 03:24
  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:02 – दोपहर 12:51 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 07:50 – सुबह 09:22

कन्या पूजन के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान 

  • 2 साल से 10 साल तक की बालिका को कन्या पूजन के लिए बैठाएँ.
  • कन्या पूजन के लिए कन्याओं की संख्या 2 से लेकर 9 तक होनी चाहिए।
  • कन्या पूजन में 1 बालक को भी रखना चाहिए.
  • कन्या पूजन में कन्याओं का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना जरूरी.
  • कन्या पूजन में कन्याओं की पूजा करें और फिर उनको खीर, पूड़ी, हलवा, चना, मिठाई की थाली में परोसें और भी उपहार दें
  • दक्षिणा दिशा से कन्याओं को विदा करें.
  •  कन्याओं से अगले वर्ष आने का निवेदन जरूर करें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: March 21, 2026 14:21:54 IST

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Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का त्योहार बेहद महत्वपुर्ण होता हैं, नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्त पूरे विधि विधान से मां दुर्गा के नो रूपों की पूजा करते है और व्रत रखते हैं अंत में यानी अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता हैं, क्योंकि इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि मान्याता है कि कंजक पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं. चैत्र नवरात्रि में अष्टमी या नवमी, कन्या पूजन करना कब सही होता है? यह सवाल हर किसी के मन में आता है. आइए जानते हैं यहां इसका उत्तर

कब हैं चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी?

पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि कके दिन दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है. इस बार चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च बुधवार के दिन दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर 26 मार्च गुरुवार सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक अष्टमी तिथि रहने वाली है. वहीं 26 मार्च गुरुवार सुबह 11 बजकर 49 मिनट से नवमी तिथी लग जाएगी, जो 27 मार्च सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी. इसलिए दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और महानमी 27 मार्च को रहेगी. . 

  • दुर्गा अष्टमी : 26 मार्च, गुरुवार
  • महानमी : 27 मार्च, शुक्रवार

अष्टमी या नवमी,  कन्या पूजन करना कब सही होता है?

चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन अष्टमी और नवमी दोनों ही तिथियों पर करना शुभ माना जाता है. यह पूरी तरह से आपकी पारिवारिक परंपरा और कुल की रीति पर निर्भर करता है.

अष्टमी पूजन: कई परिवारों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा होती है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में अक्सर अष्टमी को ही कन्या खिलाकर व्रत का पारण किया जाता है।

नवमी पूजन : उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व  माना जाता है. इस दिन को ‘पूर्ण पूजन’ माना जाता है और इसे अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी कहा गया है. इसी दिन भगवान राम का जन्मोत्सव यानी राम नवमी भी मनाई जाती है.

दुर्गा अष्टमी के शुभ मुहूर्त

  • शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 06:18 – सुबह 07:50 
  • चर-सामान्य मुहूर्त : सुबह 10:55 – दोपहर 12:27 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त : दोपहर 12:27 – दोपहर 01:59 

नवमी के शुभ मुहूर्त

  • सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:17- दोपहर 03:24
  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:02 – दोपहर 12:51 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 07:50 – सुबह 09:22

कन्या पूजन के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान 

  • 2 साल से 10 साल तक की बालिका को कन्या पूजन के लिए बैठाएँ.
  • कन्या पूजन के लिए कन्याओं की संख्या 2 से लेकर 9 तक होनी चाहिए।
  • कन्या पूजन में 1 बालक को भी रखना चाहिए.
  • कन्या पूजन में कन्याओं का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना जरूरी.
  • कन्या पूजन में कन्याओं की पूजा करें और फिर उनको खीर, पूड़ी, हलवा, चना, मिठाई की थाली में परोसें और भी उपहार दें
  • दक्षिणा दिशा से कन्याओं को विदा करें.
  •  कन्याओं से अगले वर्ष आने का निवेदन जरूर करें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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