Live
Search
Home > धर्म > Aaj Kaun si Mata ka Din hai: नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा करें? जानें पूजन विधि, मंत्र और कथा

Aaj Kaun si Mata ka Din hai: नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा करें? जानें पूजन विधि, मंत्र और कथा

Chaitra Navratri 2026 Day 3: शक्ति की साधना का 21 मार्च को तीसरा दिन है. इस दिन भगवती दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा पूजा की होती है. धार्मिक मान्यता है कि, देवी चंद्रघंटा के माथे पर आधे चंद्रमा के आकार का घंटा लटका है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें? आइए जानते हैं इस बारे में-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 20, 2026 11:38:06 IST

Mobile Ads 1x1

Chaitra Navratri 2026 Day 3: चैत्र नवरात्रि इस बार 9 दिनों की है. शक्ति की साधना का 21 मार्च को तीसरा दिन है. आज भगवती दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा पूजा की होती है. इस दिन देवी के साधक जप, व्रत आदि नियमों का पालन करते हुए मां चंद्रघंटा की विधि​-विधान से पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि, देवी चंद्रघंटा के माथे पर आधे चंद्रमा के आकार का घंटा लटका है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. कहने का मतलब देवी चंद्रघंटा का स्वरूप मनोरम और शांतिप्रद है. मां चंद्रघंटा की नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा करने से व्यक्ति को दिव्य वस्तुओं की प्राप्ति हो सकती है.अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें? चंद्रघंटा की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां चंद्रघंटा की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? नवरात्रि के दूसरे दिन मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं? मां चंद्रघंटा की कथा क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री- 

मां चंद्रघंटा का स्वरूप कैसा है?

मां चंद्रघंटा की सवारी सिंह है और उनका रूप सौम्य है. सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांतिदायक है. उनके माथे पर अर्धचंद्र है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. उनकी 10 भुजाएं हैं और सभी अलग-अलग शस्त्रों से विभूषित हैं. वह हाथ में गदा, त्रिशूल, तलवार और धनुष धारण करती हैं. उनकी मुद्रा ऐसी है, जैसे वह दुष्टों का दमन और विनाश करने में सदैव तत्पर हैं, इसलिए अपने भक्तों के कष्टों का निवारण वह त्वरित रूप से करती हैं.

मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए सामग्री 

  • मां चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र
  • घी, पवित्र जल (गंगाजल), दूध और शहद
  • फूल (विशेषकर पीले और चमेली के), सिंदूर और चंदन
  • धूप, दीप और घंटा
  • मिठाइयां (खीर, दूध से बनी मिठाइयां)
  • 5 तरह के फल
  • नारियल, पान और पान जैसे प्रसाद

मां चंद्रघंटा की पूजा करने की विधि

सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर देवी की पूजा ईशान कोण में स्वच्छ और पवित्र स्थान पर करें. पूजा की शुरुआत में सबसे पहले देशी घी का दीया जलाएं. इसके बाद फल-फूल, धूप-दीप और भोग आदि अर्पित करें. हिंदू मान्यता के अनुसार माता को लाल रंग प्रिय है. ऐसे में शुभता के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा में लाल रंग के वस्त्र (Navratri day 3 colour) अर्पित करें. ध्यान रहे कि, मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप और दुर्गा सप्तशती या फिर दुर्गा चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद शाम को भी पूजा करें और मां दुर्गा की आरती का पाठ करना चाहिए.

मां चंद्रघंटा की पूजा के मंत्र 

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता. प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ऐं श्रीं शक्तयै नम:॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की विशेष पूजा की जाती है. ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, उनकी उपासना करने से मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है. इस दिन माता को दूध से बनी मिठाइयां, खीर और अन्य स्वादिष्ट भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है.

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा भय को दूर करने और साहस की प्राप्ति के लिए की जाती है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को अपने शत्रुओं पर विजय पाने का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के तीसरे की यह पूजा सभी बाधाओं को दूर करे सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाली मानी गई है. 

मां चंद्रघंटा की व्रत कथा Chandraghanta Mata Vrat Katha 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया. वह स्वर्ग लोक में इंद्रदेव को हराकर अपना अधिपत्य जमाना चाहता था. इसलिए वह स्वर्ग लोक पर राज करने की इच्छा पूरी करने के लिए युद्ध कर रहा था. तब सभी देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों से सहायता मांगी. देवताओं की बात को सुनने के बाद तीनों को बहुत क्रोध आया. क्रोध के कारण तीनों के मुख से एक विकराल ऊर्जा उत्पन्न हुई, उससे एक देवी का प्रादुर्भाव हुआ. देवी को भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा, सूर्य ने अपना तेज, तलवार और सिंह प्रदान किया. इसी प्रकार अन्य सभी देवताओं ने भी माता को अपने-अपने अस्त्र सौंप दिए. इसके बाद मां चंद्रघंटा महिषासुर का वध करने पहुंची. महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं ने मां का धन्यवाद दिया. इसके बाद देवताओं को महिषासुर के आतंक से मुक्ति मिली.

MORE NEWS

Home > धर्म > Aaj Kaun si Mata ka Din hai: नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा करें? जानें पूजन विधि, मंत्र और कथा

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 20, 2026 11:38:06 IST

Mobile Ads 1x1

Chaitra Navratri 2026 Day 3: चैत्र नवरात्रि इस बार 9 दिनों की है. शक्ति की साधना का 21 मार्च को तीसरा दिन है. आज भगवती दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा पूजा की होती है. इस दिन देवी के साधक जप, व्रत आदि नियमों का पालन करते हुए मां चंद्रघंटा की विधि​-विधान से पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि, देवी चंद्रघंटा के माथे पर आधे चंद्रमा के आकार का घंटा लटका है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. कहने का मतलब देवी चंद्रघंटा का स्वरूप मनोरम और शांतिप्रद है. मां चंद्रघंटा की नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा करने से व्यक्ति को दिव्य वस्तुओं की प्राप्ति हो सकती है.अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें? चंद्रघंटा की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां चंद्रघंटा की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? नवरात्रि के दूसरे दिन मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं? मां चंद्रघंटा की कथा क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री- 

मां चंद्रघंटा का स्वरूप कैसा है?

मां चंद्रघंटा की सवारी सिंह है और उनका रूप सौम्य है. सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांतिदायक है. उनके माथे पर अर्धचंद्र है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. उनकी 10 भुजाएं हैं और सभी अलग-अलग शस्त्रों से विभूषित हैं. वह हाथ में गदा, त्रिशूल, तलवार और धनुष धारण करती हैं. उनकी मुद्रा ऐसी है, जैसे वह दुष्टों का दमन और विनाश करने में सदैव तत्पर हैं, इसलिए अपने भक्तों के कष्टों का निवारण वह त्वरित रूप से करती हैं.

मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए सामग्री 

  • मां चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र
  • घी, पवित्र जल (गंगाजल), दूध और शहद
  • फूल (विशेषकर पीले और चमेली के), सिंदूर और चंदन
  • धूप, दीप और घंटा
  • मिठाइयां (खीर, दूध से बनी मिठाइयां)
  • 5 तरह के फल
  • नारियल, पान और पान जैसे प्रसाद

मां चंद्रघंटा की पूजा करने की विधि

सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर देवी की पूजा ईशान कोण में स्वच्छ और पवित्र स्थान पर करें. पूजा की शुरुआत में सबसे पहले देशी घी का दीया जलाएं. इसके बाद फल-फूल, धूप-दीप और भोग आदि अर्पित करें. हिंदू मान्यता के अनुसार माता को लाल रंग प्रिय है. ऐसे में शुभता के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा में लाल रंग के वस्त्र (Navratri day 3 colour) अर्पित करें. ध्यान रहे कि, मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप और दुर्गा सप्तशती या फिर दुर्गा चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद शाम को भी पूजा करें और मां दुर्गा की आरती का पाठ करना चाहिए.

मां चंद्रघंटा की पूजा के मंत्र 

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता. प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ऐं श्रीं शक्तयै नम:॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की विशेष पूजा की जाती है. ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, उनकी उपासना करने से मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है. इस दिन माता को दूध से बनी मिठाइयां, खीर और अन्य स्वादिष्ट भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है.

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा भय को दूर करने और साहस की प्राप्ति के लिए की जाती है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को अपने शत्रुओं पर विजय पाने का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के तीसरे की यह पूजा सभी बाधाओं को दूर करे सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाली मानी गई है. 

मां चंद्रघंटा की व्रत कथा Chandraghanta Mata Vrat Katha 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया. वह स्वर्ग लोक में इंद्रदेव को हराकर अपना अधिपत्य जमाना चाहता था. इसलिए वह स्वर्ग लोक पर राज करने की इच्छा पूरी करने के लिए युद्ध कर रहा था. तब सभी देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों से सहायता मांगी. देवताओं की बात को सुनने के बाद तीनों को बहुत क्रोध आया. क्रोध के कारण तीनों के मुख से एक विकराल ऊर्जा उत्पन्न हुई, उससे एक देवी का प्रादुर्भाव हुआ. देवी को भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा, सूर्य ने अपना तेज, तलवार और सिंह प्रदान किया. इसी प्रकार अन्य सभी देवताओं ने भी माता को अपने-अपने अस्त्र सौंप दिए. इसके बाद मां चंद्रघंटा महिषासुर का वध करने पहुंची. महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं ने मां का धन्यवाद दिया. इसके बाद देवताओं को महिषासुर के आतंक से मुक्ति मिली.

MORE NEWS