Chaitra Navratri 2026 Day 6: शक्ति साधना का चैत्र नवरात्रि महापर्व इस बार 9 दिन का है. इस महापर्व का छठा दिन दुर्गा के माता कात्यायनी स्वरूप की पूजा के लिए है. यानी 23 मार्च को भक्त मां कात्यायनी की पूजा करेंगे. धार्मिक मान्यता है कि, देवी कात्यायनी नवरात्रि के दौरान स्वयं पृथ्वी पर आकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इसलिए देवी के दिव्य स्वरूप की पूजा करने पर साध को सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है. मां कात्यायनी की नवरात्रि के छठे दिन पूजा करने से व्यक्ति को दिव्य वस्तुओं की प्राप्ति हो सकती है. अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा कैसे करें? कात्यायनी की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां कात्यायनी की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को क्या भोग लगाएं? मां कात्यायनी की कथा क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
मां कात्यायनी का स्वरूप कैसा है?
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं, जिनका जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था. इसी कारण उन्हें कात्यायनी कहा जाता है.माता चार भुजाओं वाली हैं, जिनमें अस्त्र-शस्त्र और कमल का पुष्प सुशोभित होता है और उनका वाहन सिंह है. वे ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं. इस दिन भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से मां कात्यायनी की पूजा कर सुख, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं.
मां कात्यायनी की पूजा के लिए सामग्री
- मां की प्रतिमा/चित्र
- पीले या लाल वस्त्र
- पीले फूल (विशेषकर गेंदा या गुलाब)
- शहद
- हल्दी
- सिंदूर
- कुमकुम
- अक्षत
- नारियल
- पान-सुपारी
- धूप-दीप
- शृंगार सामग्री (चूड़ियां, बिंदी)
मां कात्यायनी की पूजा करने की विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंद माता का पूजन करने के लिए कात्यायनी मां की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें. फिर मंदिर में मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. इसके बााद घी का दीपक जलाकर कात्यायनी मां को रोली, अक्षत, धूप और पीले फूल अर्पित करें.अब मां कात्यायनी को भोग लगाएंगे. इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्रों का जाप करें और अंत में मां की आरती उतारें और परिवार में मां का प्रसाद बाटें.
मां कात्यायनी की पूजा के मंत्र
- कात्यायनी महामाये , महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।। - ॐ ह्रीं नम:।।
- चन्द्रहासोज्जवलकराशार्दुलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।। - ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
मां कात्यायनी का प्रिय भोग
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. इस दिन देवी को शहद का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है. श्रद्धा और विधि-विधान से शहद चढ़ाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में सभी में बांट देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. मां कात्यायनी की कृपा से हर क्षेत्र में सफलता मिलने के योग बनते हैं.
मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा को जीवन में विशेष फलदायी माना गया है. खासकर विवाह संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए, मान्यता है कि जो कन्याएं सच्चे मन से माता की आराधना करती हैं, उनके विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शीघ्र ही योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. मनचाहे या प्रेम विवाह की इच्छा रखने वालों के लिए भी यह पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है. यही नहीं, यदि कुंडली में विवाह योग कमजोर हों, तो भी उनकी पूजा से सकारात्मक परिणाम मिल सकते है.
मां कात्यायनी की व्रत कथा Maa katyayani Vrat Katha
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती जगदम्बा की कठोर तपस्या की थी. उनकी इस तपस्या से मां इतनी खुश हुईं कि उन्होंने महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री बनकर जन्म लेने का वरदान दिया. मां जगदम्बा ने महर्षि के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, जिसके बाद वे मां कात्यायनी कहलाईं. माना जाता है कि मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया था, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है.