Chaitra Navratri 2026: इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत भूतड़ी अमावस्या और खरमास के साय में हो रही है और ज्योतिष शास्त्र में खरमास अशुभ समय माना जाता है और इसलिए इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं. आइए जानते हैं इस दुर्लभ संयोग में चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और इस दौरान किन शुभ कामों से बचना होगा.
चैत्र नवरात्र 2026
Chaitra Navratri 2026: साल 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत भूतड़ी अमावस्या और खरमास के साय में हो रही है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार खरमास को अशुभ समय माना जाता है और इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि कहा जाता है कि खरमास के दौरान सूर्य की ऊर्जा कमजोर हो जाती है. ऐसे में भक्तों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खरमास में मां दुर्गा की पूजा सफल होगी? क्या इस दौरान रखा गया व्रत फलदायी होगा? आइए जानते हैं इस दुर्लभ संयोग में चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और इस दौरान किन शुभ कामों से बचना होगा.
हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र की शुरुआत होती है और यह त्योहार नौ दिनों तक चलता है. पंचांग के अनुसार साल 2026 में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च के दिन सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी से शुरू हो रही है, जो 20 मार्च के दिन सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. उदय तिथि के अनुसार नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है और सूर्य के मेष राशि में जाने पर यह समाप्त होता है. इस एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. साल 2026 में खरमास 14 मार्च की रात (15 मार्च के शुरुआती घंटे) रविवार से शुरू होकर 14 अप्रैल मंगलवार तक रहेगा.
पंचांग के अनुसार साल 2026 में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 मार्च बुधवार के दिन सुबह 8 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी, जो अगले दिन 19 मार्च गुरुवार के दिन सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी. हिंदू धर्म में ज्यादातर व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं. इसलिए इस साल भूतड़ी या चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. इस दिन स्नान, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है.
धर्म शास्त्र के अनुसार, खरमास के दौरान गुरु की राशि में सूर्य के होने से गुरु की शुभता कम हो जाती है, जिससे सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय, मुंडन या बड़े निवेश की शुरुआत, नामकरण संस्कार, यात्रा और जनेऊ जैसे काम नहीं किये जाते हैं, क्योंकि किसी भी मांगलिक काम के लिए गुरु का शुभ स्थिति में होना जरूरी सबसे जरूरी होता है. लेकिन जब बात शक्ति की उपासना की हो, यानी नवरात्र की, तो इसमें नियम बदल जाते हैं. क्योंकि नवरात्र अपने आप में एक सिद्ध और शुभ अवधि मानी जाती है, जिस पर खरमास का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ सकता है और शास्त्रों के अनुसार खरमास का समय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए, आप बिना किसी डर के व्रत रख सकते हैं और नवरात्र में घटस्थापना कर सकते हैं.
इस साल चैत्र नवरात्र खरमास के दौरान होने से शुभ मुहूर्त का महत्व बढ़ जाता है. इसलिए इस साल नवरात्र में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ रहेगा. वहीं अगर आप खरमास के दोषों को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं, तो नवरात्र पूजा की शुरुआत पहले भगवान गणेश के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देकर करें.
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