Dussehra 2026: भारत में दशहरे पर रावण दहन होता है, लेकिन श्रीलंका में यह परंपरा आम नहीं है. जानिए वहां दशहरा कैसे मनाया जाता है और रावण को लेकर क्या मान्यताएं हैं.
रावण की लंका में कैसे मनता है दशहरा?
Dussehra 2026: भारत में दशहरे का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान राम की रावण पर विजय की याद में जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस लंका के राजा रावण का दशहरे पर दहन किया जाता है, वहां यानी आज के श्रीलंका में यह त्योहार कैसे मनाया जाता है? क्या वहां भी भारत की तरह रावण के पुतले जलाए जाते हैं.
इस दिन को मनाने का तरीका बिल्कुल अलग है? रामायण में लंका को रावण का राज्य बताया गया है. आज के श्रीलंका को अक्सर उसी लंका से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, प्राचीन रामायण की घटनाओं और आधुनिक श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक संबंधों को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. आइए जानते हैं कि श्रीलंका में दशहरे और रावण से जुड़ी परंपराओं को किस नजरिए से देखा जाता है.
इसका सीधा जवाब है- श्रीलंका में भारत की तरह रावण दहन की परंपरा आम तौर पर नहीं है. भारत में दशहरे के दिन रावण के पुतले जलाकर भगवान राम की जीत का उत्सव मनाया जाता है. वहीं श्रीलंका में दशहरे का स्वरूप अलग है. यहां हिंदू तमिल समुदाय के लोग नवरात्रि और विजयादशमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाती है और मां दुर्गा तथा मां सरस्वती की आराधना भी होती है.
श्रीलंका में रावण को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. कुछ स्थानीय परंपराओं में उसे एक शक्तिशाली राजा, विद्वान और भगवान शिव का भक्त माना जाता है. इसी वजह से कुछ लोग रावण को केवल खलनायक के रूप में नहीं देखते. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि श्रीलंका के सभी लोग रावण की पूजा करते हैं या उसके बारे में एक जैसी राय रखते हैं.
श्रीलंका में रावण से जुड़ा एक दिलचस्प आयोजन भी होता है. कोलंबो के पास पन्निपिटिया स्थित श्री देव्रम विहार मंदिर में मार्च के दौरान मेदिन महा पेराहेरा (Medin Maha Perahera) नाम का धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन होता है. इसमें रावण की प्रतिमा को हाथी पर रखकर जुलूस निकालने की परंपरा बताई जाती है. इस आयोजन में पारंपरिक संगीत, नृत्य और धार्मिक रस्में भी शामिल होती हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आयोजन दशहरे के दिन नहीं, बल्कि बौद्ध कैलेंडर के मेदिन पोया से जुड़ा है. इसलिए इसे भारत की विजयादशमी या रावण दहन की परंपरा के समान नहीं समझना चाहिए.
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भारत में दशहरा मुख्य रूप से भगवान राम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. श्रीलंका में हिंदू समुदाय अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार विजयादशमी मनाता है, लेकिन रावण के पुतले जलाना वहां व्यापक परंपरा नहीं है. यानी रामायण से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत दोनों जगहों पर अलग-अलग रूप में दिखाई देती है. यही वजह है कि ‘लंकेश की लंका’ में दशहरे की परंपराएं भारत से काफी अलग नजर आती हैं.
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