Dussehra 2026 Ravan Dahan Ash: मंगलवार 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरे का पावन पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा. इस दिन जगह-जगह रावण दहन होगा और भारी भीड़ इसे देखने उमड़ेगी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रावण जलने के बाद बची राख का क्या करना चाहिए? कई लोग इसे प्रसाद समझकर घर ले आते हैं, जो सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है.
रावण की राख क्यों है नकारात्मकता का प्रतीक?
धर्म शास्त्रों में रावण को अधर्म, अहंकार और बुरी शक्तियों का प्रतीक माना गया है. जब उसके पुतले को जलाया जाता है, तो वह सिर्फ एक पुतला नहीं, बल्कि बुराई का विनाश होता है. उसके जलने के बाद बची राख को पूरी तरह से नकारात्मक ऊर्जा, विनाश और पतन का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र कहता है कि ऐसी नकारात्मक चीज को घर लाने से घर की सारी पॉजिटिव एनर्जी खत्म हो जाती है.
घर में लाने से क्या होता है नुकसान?
वास्तु विज्ञान के अनुसार, अगर आप रावण दहन की राख को घर में रखते हैं तो इससे घर की सुख-शांति भंग हो सकती है. परिवार में बिना वजह लड़ाई-झगड़े, मानसिक तनाव और पैसों की तंगी शुरू हो सकती है. ये राख दुर्भाग्य को बुलावा देती है. इसलिए बड़े-बड़े ज्योतिषी भी इसे घर में रखने से साफ मना करते हैं. ये शुभ नहीं, बल्कि बेहद अशुभ मानी जाती है.
क्या तंत्र विद्या में होता है इसका इस्तेमाल?
हां, कुछ तांत्रिक परंपराओं में इस राख का इस्तेमाल शत्रु पर विजय पाने के लिए किया जाता है. लेकिन ये क्रियाएं बहुत ही कठिन और खतरनाक होती हैं, जो किसी सिद्ध तांत्रिक द्वारा ही की जाती हैं. आम गृहस्थ लोगों के लिए इसका इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित है. सामान्य लोगों को ऐसी तांत्रिक चीजों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए, वरना फायदे की जगह भारी नुकसान हो सकता है.
अगर भूल से घर ले आए तो क्या करें?
अगर आप अनजाने में राख घर ले आए हैं तो घबराएं नहीं. इसे तुरंत घर से बाहर निकाल दें. इसे किसी सुनसान जगह पर ले जाकर जमीन में गड्ढा खोदकर दबा दें. भूलकर भी इसे कचरे में या नदी में न फेंकें और पैरों के नीचे न आने दें. पुतले में केमिकल और जहरीले रंग होते हैं जो सेहत के लिए भी हानिकारक हैं. जमीन में दबाना ही सबसे सही और सुरक्षित उपाय है.