Eid ul Fitr 2026 Date India: भारत में 19 मार्च को चांद न दिखने से 20 को सउदी में और 21 मार्च को पूरे भारत में ईद मनाई जाएगी. ऐसा ही ऐलान भारत में किया गया है. अब सवाल है कि आखिर, भारत में ईद की तारीख कौन तय करता है? शाही इमाम क्या है कनेक्शन? आइए जानते हैं ईद से जुड़ी रोचक जानकारियां-
भारत में ईद का ऐलान, जानिए भारत में कैसे तय होती है ईद की तारीख.
Eid ul Fitr 2026 Date India: रमजान खत्म होने के करीब आते ही सभी का एक ही सवाल होता है कि ईद कब मनाई जाएगी. ऐसा हर साल होता है, क्योंकि ईद उल फितर की तारीख चांद दिखने पर तय होती है. बता दें कि, इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित होता है, इसलिए महीने की शुरुआत और अंत दोनों ही चांद देखने से तय होते हैं. जैसे ही रमजान के 29वें दिन शाम को नया चांद नजर आता है, उसके अगले दिन ईद मनाई जाती है. अगर किसी वजह से उस दिन शव्वाल के चांद का दीदार नहीं होता है, तो रमजान के 30 रोजे पूरे किए जाते हैं और उसके अगले दिन ईद होती है. ऐसा ही कुछ इस बार भारत में भी हुआ. भारत में 19 मार्च को चांद न दिखने से 20 को सउदी में और 21 मार्च को पूरे भारत में ईद मनाई जाएगी. ऐसा ही ऐलान भारत में किया गया है. अब सवाल है कि आखिर, भारत में ईद की तारीख कौन तय करता है? शाही इमाम क्या है कनेक्शन? आइए जानते हैं ईद से जुड़ी रोचक जानकारियां-
इस्लामिक धर्म के अनुसार, भारत में ईद का फैसला आमतौर पर सऊदी अरब और खाड़ी देशों में चांद दिखने के आधार पर होता है. रमजान के आखिरी दौर में 19 मार्च दिन गुरुवार शाम को चांद नजर नहीं आया, जिसके बाद ईद-उल-फितर 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया है. हालांकि, 29वें रोजे की शाम शहर के अलग-अलग इलाकों में चांद देखने की कोशिश की गई, लेकिन कहीं भी पुष्टि नहीं हुई. इसके बाद आधिकारिक तौर पर तय हुआ कि इस बार 30 रोजे पूरे किए जाएंगे और शनिवार को ईद मनाई जाएगी. गुरुवार को तरावीह की आखिरी नमाज अदा हुई, जबकि आज जुमातुल विदा होगा.
भारत में ईद की तारीख तय करने का काम अलग-अलग शहरों की चांद कमेटियां करती हैं. सबसे ज्यादा चर्चा में जो नाम आता है, वह है दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम. हालांकि, शाही इमाम खुद अकेले तारीख तय नहीं करते, बल्कि वे चांद कमेटियों से मिली जानकारी के आधार पर एलान करते हैं. देश के कई हिस्सों जैसे दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता में अलग अलग रूयत ए हिलाल कमेटियां होती हैं. ये कमेटियां लोगों से चांद दिखने की गवाही लेती हैं और फिर फैसला करती हैं कि चांद नजर आया है या नहीं.
इस्लाम धर्म में अपने कुछ नियम होते हैं, जिसके तहत ही ईद की तारीख तय होती है. बता दें किि, शाही इमाम का रोल ज्यादा प्रतीकात्मक और ऐलान करने वाला होता है. जब चांद दिखने की पुष्टि हो जाती है, तब जामा मस्जिद के शाही इमाम आधिकारिक तौर पर घोषणा करते हैं कि ईद किस दिन होगी. लोग उनके ऐलान को भरोसे के साथ मानते हैं, इसलिए मीडिया और जनता का ध्यान भी वहीं रहता है. लेकिन असल में यह एक सामूहिक प्रक्रिया होती है जिसमें कई जगहों की रिपोर्ट शामिल होती है.
आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि सउदी अरब में चांद दिखने के बाद ही भारत में ईद होती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. बता दें कि, भारत अपनी स्थानीय चांद देखने की प्रक्रिया पर चलता है. हालांकि, सउदी अरब में अगर चांद दिख जाता है, तो उसका असर जरूर पड़ता है और लोग उस खबर को ध्यान में रखते हैं. लेकिन, अंतिम फैसला भारत की चांद कमेटियों और स्थानीय गवाही पर ही निर्भर करता है.
islamic-relief.org.uk की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद अल-फितर मुसलमानों के लिए एक विशेष अवसर है और परिवार और प्रियजनों के साथ जश्न मनाने का समय है. ईद अल-फितर रमज़ान के महीने के अंत का प्रतीक है, जो दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक महीने का उपवास का समय होता है. बता दें कि, शव्वाल की शुरुआत का प्रतीक हैजो इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर का दसवां महीना है. इस्लामी (हिजरी) पंचांग में वर्ष में दो दिन ईद नामक उत्सव के लिए समर्पित हैं. ईद उल-फितर प्रत्येक वर्ष रमज़ान महीने के अंत में आती है और ईद अल-अधा इस्लामी वर्ष के अंतिम महीने धुल हिज्जा की 10वीं, 11वीं और 12वीं तारीख को पड़ती है.
ईद-उल-फितर रमज़ान के महीने के पूरा होने का जश्न परिवार और दोस्तों के साथ मनाने का अवसर है. यह अल्लाह के प्रति खुशी और कृतज्ञता व्यक्त करने का भी एक ज़रिया है, जिन्होंने हमें रमज़ान का महीना उनकी इबादत में बिताने का अवसर दिया. ईद-उल-फितर परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पूरे समुदाय के बीच अच्छे संबंध मजबूत करने का भी एक साधन है। ईद के दौरान लोग अपनों से मिलने जाते हैं, उपहार और भोजन साझा करते हैं और सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा करते हैं.
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