What is Female Orgasm: महिलाओं के ऑर्गेज्म (Female Orgasm) को लेकर दुनियाभर में तमाम तरह की बातें होती हैं. असल में, कोई इस बारे में ठीक से बात नहीं करना ही नहीं चाहता है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि, फीमेल ऑर्गज्म महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से हेल्दी रखता है. अब सवाल है कि आखिर, फीमेल ऑर्गेज्म क्या होता है? क्या ऑर्गेज्म केवल पेनिट्रेशन से ही आता है? डॉ. तनया नरेंद्र ने इस बारे में एक इंटरव्यू में रोचक जानकारी शेयर की है.
जानिए, क्या फीमेल ऑर्गेज्म केवल पेनिट्रेशन से ही आता है? (Canva)
What is Female Orgasm: महिलाओं के ऑर्गेज्म (Female Orgasm) को लेकर दुनियाभर में तमाम तरह की बातें होती हैं. हैरत की बात ये है कि, इस पर हर किसी का तर्क अलग होता है. असल में, कोई इस बारे में ठीक से बात नहीं करना ही नहीं चाहता है. या यूं कहें कि, हर कोई इस पर बात करने से हिचकिचाता या शर्माता है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि, फीमेल ऑर्गज्म महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से हेल्दी रखता है. हेल्थ एक्सर्ट कहते हैं कि, यह न सिर्फ मन को खुश रखता है बल्कि शरीर के कई प्रकार के दर्द को भी कम करता है. हालांकि, इसके बारे में जानने के लिए आपको थोड़ा ज्यादा मेहनत करनी होगी. क्योंकि, आज के समय में भी फीमेल ऑर्गेज्म किसी बड़े रहस्य (Mystery) से कम नहीं है.
फीमेल ऑर्गेज्म पर आगे बढ़ने से पहले आपको सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि, आखिर फीमेल ऑर्गेज्म क्या होता है? क्या यह वह स्थिति है जब आपकी डिजायर पूरी हो जाती है? क्या ऑर्गेज्म केवल पेनिट्रेशन से ही आता है? हालांकि इसे समझना इतना आसान नहीं है जितना लगता है. डॉ. तनया नरेंद्र ने इस बारे में एक इंटरव्यू में रोचक जानकारी शेयर की है.
मूल रूप से शारीरिक संबंध तब होता है कपल्स परमानंद की अंतिम ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं. कभी-कभी ऑर्गेज्म यौनांगों में लयबद्ध तरीके से उत्पन्न होता है यानी इसका संचार पूरे शरीर पर धीरे धीरे होता है. यह मुख्य रूप से जननांगों के पास होता है. यह भी कहा जा सकता है कि जननांगों की उत्तेजना ऑर्गेज्म की ओर ले जाती है, लेकिन यह हर किसी के साथ संभव नहीं हो पाता है. वहीं, तनाव एक प्रमुख कारण है कि कई महिलाएं चरमोत्कर्ष तक नहीं पहुंच पाती हैं. तनाव न सिर्फ शारीरिक बल्कि मनोवैज्ञानिक परेशानी बनकर आपकी खुशी में बाधा डाल सकती है.
डॉ. तनया नरेंद्र (Dr. Cuterus) के अनुसार, यह एक बहुत बड़ा मिथक है कि ऑर्गेज्म (Orgasm) केवल पेनिट्रेशन (Penetration) से ही आता है. अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो आप निश्चित रूप से गलत है. क्योंकि, अधिकांश महिलाओं को सिर्फ पेनिट्रेशन (इंटरकोर्स) से ऑर्गेज्म नहीं होता है. इसके लिए महिलाओं को ऑर्गेज्म तक पहुंचने के लिए क्लिटोरल स्टिमुलेशन (Clitoris) की आवश्यकता होती है, जो पेनिट्रेशन के दौरान या उसके बिना भी किया जा सकता है.
फीमेल ऑर्गेज्म बहुत हेल्दी होता है. साइंस तो यहां तक कहती है कि, लंबी उम्र के लिए भी ऑर्गेज्म बहुत जरूरी है. इसका प्रभाव शरीर के कई हिस्सों और अंगों पर पड़ता है. स्टडीज से पता चलता है कि, जैसे ही सेक्सुअल गतिविधियां ऊपर की ओर बढ़ती हैं, तो स्तन कैंसर का खतरा कम होता जाता है. ऐसा संभव हो पाता है ऑर्गेज्म के साथ ही ऑक्सीटोसिन जैसे हॉर्मोन्स के सक्रिय हो जाने से. यह भी देखा गया है कि नियमित ऑर्गेज्म की प्राप्ति से हार्ट अटैक से बचाव होता है और ब्रेन हेल्दी रहता है. यह शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द के प्रभाव को कम करता है. यह पीरियड्स में होने वाले दर्द, माइग्रेन और अन्य दर्द को कम करने के लिए नैचुरल पेनकिलर की तरह काम करता है.
फोर प्ले: मेडिकलन्यूजटूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा हड़बड़ी न करें. सीधे संबंध बनाने से बेहतर है कि फोर प्ले को पूरा समय दें. अपना समय लें और उस उत्तेजना तक पहुंचने के लिए फोरप्ले का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आपका मस्तिष्क आपके दिल की धड़कनों के साथ थोड़ा मेल बैठा सकेगा. संभोग का मतलब सिर्फ पेनिट्रेशन ही नहीं है. आपको परमानंद की उस अवस्था तक पहुंचने के लिए अपने पार्टनर के साथ थोड़ा और कोजी होने की जरूरत हो सकती है.
कीगेल एक्सरसाइज: कीगेल एक्सरसाइज न केवल पेल्विक की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है बल्कि यह एक्सरसाइज ऑर्गेज्म तक पहुंचने और उत्तेजित करने में भी मदद करती है. कुछ ईजी कीगल एक्सरसाइज महिलाएं अपने घर पर ही कर सकती हैं जैसे ब्रिज पोज, जंपिंग जैक, और स्क्वाट्स. ये क्लाइमेक्स को और बेहतर बना देंगी.
कुछ अंगों को स्टिमुलेशन करना: आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि, यह एक दो-तरफ़ा एक्सरसाइज है. आपके साथी को उन उत्तेजक अंगों के बारे में पता होना चाहिए जो आपको अधिक उत्तेजित करते हैं. आपके उत्तेजक अंगों में गर्दन, कान के पीछे का हिस्सा, आपके जननांगों को उत्तेजित करने में मददगार होते हैं. यह आपकी कामेच्छा को भी बढ़ा देता है. इसलिए पेनिट्रेशन से पहले इन बिंदुओं पर भी समय दें. कई बार ऑर्गेज्म के बारे में ज्यादा सोचना भी ऑर्गेज्म तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न कर सकता है.
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