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Eid ul Fitra 2026: ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा में क्या अंतर? रमजान के बाद मीठी ईद, तो कुर्बानी वाली कब

Eid Mubarak 2026: रमजान के 30 रोजे के बाद आज पूरे भारत में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है. ईद का अर्थ है 'उत्सव' या 'त्योहार'. इस्लाम में यह एक प्रतिष्ठित शब्द है. बता दें कि, मुस्लिम समुदाय में साल में दो बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. पहला ईद-उल-फितर और दूसरा ईद-उल-अजहा. आम बोलचाल में इन्हें 'मीठी ईद' और 'बकरीद' कहा जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर, दोनों ईद में क्या अंतर है-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 21, 2026 12:59:08 IST

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Eid Mubarak 2026: रमजान के 30 रोजे के बाद आज पूरे भारत में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है. इस मौके को लेकर मुस्लिम समुदाय में जबरदस्त उत्साह, उल्लास और खुशी का माहौल है. बता दें कि, रमजान समाप्ति के बाद यह मीठी ईद है. ईद का अर्थ है ‘उत्सव’ या ‘त्योहार’. इस्लाम में यह एक प्रतिष्ठित शब्द है. बता दें कि, मुस्लिम समुदाय में साल में दो बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. पहला ईद-उल-फितर और दूसरा ईद-उल-अजहा. आम बोलचाल में इन्हें ‘मीठी ईद’ और ‘बकरीद’ कहा जाता है. इस दोनों ईद को मुसलमान पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) के मार्गदर्शन के अनुसार मनाते हैं. ये वो अवसर हैं जब अल्लाह (सुभान अल्लाह) अपने अनुयायियों की खुशी देखकर प्रसन्न होता है और सभी के बीच आनंद को प्रोत्साहित करता है. अच्छी बात यह है कि, ये दोनों ही ईद खुशी, इबादत और भाईचारे का प्रतीक हैं, लेकिन इनके मनाने का कारण और परंपराएं अलग-अलग हैं. तो आइए जानते हैं मीठी ईद और बकरीद में क्या अंतर है- 

ईद उल-फितर कब आती है? 

muslimaid.org की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-उल-फितर रमज़ान के बाद आती है, जो इस्लामी (चंद्र) कैलेंडर के नौवें महीने में मनाया जाता है. इसका मतलब है कि ईद-उल-फितर, ईद-उल-अधा से पहले आती है. बता दें कि, रमज़ान के आखिरी दस दिनों में हज़ार महीनों की बरकतें मिलने का वादा किया जाता है, और रोज़े और दान के इस महीने के बाद ईद मनाने से बेहतर कोई तरीका नहीं है. आधिकारिक तौर पर, ईद-उल-फितर का उत्सव शव्वाल के पहले दिन से शुरू होता है, जो साल का दसवां महीना है.

ईद उल-अधा कब आती है?

क़ुर्बानी मुसलमानों के लिए वर्ष के सबसे पवित्र समयों में से एक है और यह चंद्र वर्ष के बारहवें महीने में पड़ती है. क़ुर्बानी की शुरुआत के लिए ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा करना आवश्यक है. इस प्रकार ईद-उल-अज़हा की तिथि ईद-उल-फितर के बाद आती है, और ईद-उल-अज़हा धुल हिज्जा में पड़ती है. इस्लामी कैलेंडर चंद्र चक्र पर आधारित होने के कारण, ईद की सटीक तारीखें हर साल बदलती रहती हैं, और लगभग 10/11 दिन पहले हो जाती हैं.

क्या होती है ईद-उल-फितर ( मीठी ईद)?

ईद-उल-फितर रमजान के महीने के खत्म होने के बाद मनाई जाती है. रमजान इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना होता है, जिसमें रोजे रखे जाते हैं और अल्लाह की इबादत की जाती है. रमजान का चांद दिखने के बाद अगले दिन ईद मनाई जाती है, जिसे ‘चांद मुबारक’ के नाम से भी जाना जाता है. इस ईद को ‘मीठी ईद’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन सेवइयां और शीर खुरमा जैसे मीठे पकवान बनाए जाते हैं. रोजा खत्म होने की खुशी में मिठाइयां बांटी जाती हैं.

क्या होती है ईद-उल-अजहा (बकरीद)?

ईद-उल-अजहा को बकरीद या ‘कुर्बानी की ईद’ भी कहा जाता है. यह ईद, मीठी ईद के लगभग 70 दिन बाद मनाई जाती है. इस ईद का संबंध हजरत इब्राहिम की कुर्बानी से है. मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से उनके बेटे की कुर्बानी मांगी थी. उन्होंने अल्लाह की आज्ञा मान ली, लेकिन आखिरी समय में उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी हो गई. तभी से कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई.

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Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 21, 2026 12:59:08 IST

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Eid Mubarak 2026: रमजान के 30 रोजे के बाद आज पूरे भारत में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है. इस मौके को लेकर मुस्लिम समुदाय में जबरदस्त उत्साह, उल्लास और खुशी का माहौल है. बता दें कि, रमजान समाप्ति के बाद यह मीठी ईद है. ईद का अर्थ है ‘उत्सव’ या ‘त्योहार’. इस्लाम में यह एक प्रतिष्ठित शब्द है. बता दें कि, मुस्लिम समुदाय में साल में दो बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. पहला ईद-उल-फितर और दूसरा ईद-उल-अजहा. आम बोलचाल में इन्हें ‘मीठी ईद’ और ‘बकरीद’ कहा जाता है. इस दोनों ईद को मुसलमान पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) के मार्गदर्शन के अनुसार मनाते हैं. ये वो अवसर हैं जब अल्लाह (सुभान अल्लाह) अपने अनुयायियों की खुशी देखकर प्रसन्न होता है और सभी के बीच आनंद को प्रोत्साहित करता है. अच्छी बात यह है कि, ये दोनों ही ईद खुशी, इबादत और भाईचारे का प्रतीक हैं, लेकिन इनके मनाने का कारण और परंपराएं अलग-अलग हैं. तो आइए जानते हैं मीठी ईद और बकरीद में क्या अंतर है- 

ईद उल-फितर कब आती है? 

muslimaid.org की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-उल-फितर रमज़ान के बाद आती है, जो इस्लामी (चंद्र) कैलेंडर के नौवें महीने में मनाया जाता है. इसका मतलब है कि ईद-उल-फितर, ईद-उल-अधा से पहले आती है. बता दें कि, रमज़ान के आखिरी दस दिनों में हज़ार महीनों की बरकतें मिलने का वादा किया जाता है, और रोज़े और दान के इस महीने के बाद ईद मनाने से बेहतर कोई तरीका नहीं है. आधिकारिक तौर पर, ईद-उल-फितर का उत्सव शव्वाल के पहले दिन से शुरू होता है, जो साल का दसवां महीना है.

ईद उल-अधा कब आती है?

क़ुर्बानी मुसलमानों के लिए वर्ष के सबसे पवित्र समयों में से एक है और यह चंद्र वर्ष के बारहवें महीने में पड़ती है. क़ुर्बानी की शुरुआत के लिए ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा करना आवश्यक है. इस प्रकार ईद-उल-अज़हा की तिथि ईद-उल-फितर के बाद आती है, और ईद-उल-अज़हा धुल हिज्जा में पड़ती है. इस्लामी कैलेंडर चंद्र चक्र पर आधारित होने के कारण, ईद की सटीक तारीखें हर साल बदलती रहती हैं, और लगभग 10/11 दिन पहले हो जाती हैं.

क्या होती है ईद-उल-फितर ( मीठी ईद)?

ईद-उल-फितर रमजान के महीने के खत्म होने के बाद मनाई जाती है. रमजान इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना होता है, जिसमें रोजे रखे जाते हैं और अल्लाह की इबादत की जाती है. रमजान का चांद दिखने के बाद अगले दिन ईद मनाई जाती है, जिसे ‘चांद मुबारक’ के नाम से भी जाना जाता है. इस ईद को ‘मीठी ईद’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन सेवइयां और शीर खुरमा जैसे मीठे पकवान बनाए जाते हैं. रोजा खत्म होने की खुशी में मिठाइयां बांटी जाती हैं.

क्या होती है ईद-उल-अजहा (बकरीद)?

ईद-उल-अजहा को बकरीद या ‘कुर्बानी की ईद’ भी कहा जाता है. यह ईद, मीठी ईद के लगभग 70 दिन बाद मनाई जाती है. इस ईद का संबंध हजरत इब्राहिम की कुर्बानी से है. मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से उनके बेटे की कुर्बानी मांगी थी. उन्होंने अल्लाह की आज्ञा मान ली, लेकिन आखिरी समय में उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी हो गई. तभी से कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई.

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