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Home > धर्म > Pradosh Vrat March 2026: मार्च का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानिए पूजा का सही समय और शिवजी को प्रसन्न करने के आसान उपाय

Pradosh Vrat March 2026: मार्च का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानिए पूजा का सही समय और शिवजी को प्रसन्न करने के आसान उपाय

Pradosh Vrat 2026: चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत  मार्च में रखा जाएगा. इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से प्रदोष काल में की जाती है. भक्त शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करते हैं तथा 'ॐ नमः शिवाय' जैसे मंत्रों का जप करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा से व्रत रखने और सफेद वस्तुओं का दान करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 12, 2026 12:06:29 IST

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 Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. यह व्रत हर महीने त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत ‘सोमवार, 16 मार्च 2026’ को पड़ रहा है. सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से शिव पूजा करने और व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, विशेष रूप से सफेद रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें.पूजा के दौरान शिवलिंग पर ‘पंचामृत’ से अभिषेक करें, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होता है.इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल अर्पित करें. धूप और दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते रहें.

शाम के समय  पूजा का महत्व

शाम के समय प्रदोष काल (लगभग शाम 6:30 बजे से रात 8:54 बजे तक) में दोबारा शिव जी की पूजा की जाती है. इस समय शिव कथा सुनना, शिव चालीसा और आरती करना भी शुभ माना जाता है. अंत में प्रसाद बांटकर सात्विक भोजन के साथ व्रत का पारण किया जाता है.

 शिव जी के शक्तिशाली मंत्र

सोम प्रदोष व्रत के दिन इन मंत्रों का जप करना बहुत फलदायी माना जाता है-

  • पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय
  • रुद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रूद्राय
  • शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात
  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

 इन चीजों  के करें दान

सोम प्रदोष व्रत के अवसर पर ‘सफेद वस्तुओं का दान’ करना बेहद शुभ माना जाता है. भक्त दूध, दही, चावल, चीनी या सफेद वस्त्र जरूरतमंद लोगों को दान कर सकते हैं. इसके अलावा गरीबों को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना गया है.धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख-शांति लाने के साथ कई मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 12, 2026 12:06:29 IST

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 Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. यह व्रत हर महीने त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत ‘सोमवार, 16 मार्च 2026’ को पड़ रहा है. सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से शिव पूजा करने और व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, विशेष रूप से सफेद रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें.पूजा के दौरान शिवलिंग पर ‘पंचामृत’ से अभिषेक करें, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होता है.इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल अर्पित करें. धूप और दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते रहें.

शाम के समय  पूजा का महत्व

शाम के समय प्रदोष काल (लगभग शाम 6:30 बजे से रात 8:54 बजे तक) में दोबारा शिव जी की पूजा की जाती है. इस समय शिव कथा सुनना, शिव चालीसा और आरती करना भी शुभ माना जाता है. अंत में प्रसाद बांटकर सात्विक भोजन के साथ व्रत का पारण किया जाता है.

 शिव जी के शक्तिशाली मंत्र

सोम प्रदोष व्रत के दिन इन मंत्रों का जप करना बहुत फलदायी माना जाता है-

  • पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय
  • रुद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रूद्राय
  • शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात
  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

 इन चीजों  के करें दान

सोम प्रदोष व्रत के अवसर पर ‘सफेद वस्तुओं का दान’ करना बेहद शुभ माना जाता है. भक्त दूध, दही, चावल, चीनी या सफेद वस्त्र जरूरतमंद लोगों को दान कर सकते हैं. इसके अलावा गरीबों को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना गया है.धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख-शांति लाने के साथ कई मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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