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Holi 2026: आग से न जलने का था वरदान, फिर भी क्यों भस्म हो गई होलिका? जानें कैसे बच गए प्रह्लाद

Holi 2026: होली के पर्व पर होलिका दहन की कथा सुनाई जाती है, जो बु्राई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, होलिका को भगवान ब्रह्मा से ऐसा वरदान मिला था कि वह आग में नहीं जलेगी,फिर भी अग्नि में होलिका जल गई थी.आइए जानते हैं पूरी बात विस्तार से.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-02-27 18:34:26

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Holika Dahan Story 2026: होली का त्योहार सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह आस्था, सत्य और धर्म की जीत की कहानी भी है. हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है. साल 2026 में होलिका दहन 2 मार्च को होगा और 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी. होलिका दहन की परंपरा के पीछे एक ऐसी कथा है, जो हमें बताती है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है. आइए जानते हैं कि आखिर प्रह्लाद कैसे बच गए और आग से न जलने का वरदान होने के बावजूद होलिका क्यों भस्म हो गई.

ब्रह्मा का वरदान और होलिका की शक्ति

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया था. प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उसे एक विशेष वरदान दिया. कहा जाता है कि उसे एक ऐसा दिव्य वस्त्र प्राप्त हुआ था, जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती थी.यही कारण था कि उसके भाई हिरण्यकश्यप ने इस वरदान का इस्तेमाल अपने बेटे प्रह्लाद को मारने के लिए करने की योजना बनाई.

 हिरण्यकश्यप का अहंकार और प्रह्लाद की अटूट भक्ति

हिरण्यकश्यप एक शक्तिशाली लेकिन घमंडी राजा था. वह चाहता था कि पूरा राज्य उसकी पूजा करे. लेकिन उसका बेटा प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था. वह हर समय ‘नारायण’ का नाम जपता रहता था.पिता ने कई बार प्रह्लाद को समझाने और डराने की कोशिश की, लेकिन उसकी भक्ति डगमगाई नहीं. क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने उसे कई तरीकों से मारने की कोशिश की, पर हर बार वह सुरक्षित बच गया.

 आग की लपटों में क्या हुआ?

अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया. योजना यह थी कि होलिका दिव्य वस्त्र ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठेगी. आग उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगी और प्रह्लाद जल जाएगा,लेकिन हुआ ठीक उल्टा. जब होलिका अग्नि में बैठी, तब प्रह्लाद भगवान विष्णु का स्मरण करता रहा. कहते हैं कि दैवी कृपा से वह दिव्य वस्त्र उड़कर प्रह्लाद पर आ गया और होलिका अग्नि की लपटों में जलकर भस्म हो गई.इस घटना ने साबित कर दिया कि वरदान का दुरुपयोग करने वाला अंततः नष्ट हो जाता है, जबकि सच्ची भक्ति और सत्य की हमेशा रक्षा होती है.

 क्यों मनाया जाता है होलिका दहन?

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. यह हमें याद दिलाता है कि छल, पाप और अहंकार की उम्र लंबी नहीं होती. वहीं सच्ची आस्था, धैर्य और सत्य अंत में विजयी होते हैं.इसी विश्वास के साथ हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों के साथ खुशियां मनाई जाती हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी  जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. इंडिया न्यूज सत्यता की पुष्टि नहीं करता है

 

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