Infant Tossing Ritual: भारत के अलग-अलग देशों में कई तरह की परंपराएं प्रचलित हैं, लेकिन अंधविश्वास से भरी एक ऐसी परंपरा, जिसे सुनते ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. पुराने समय से चली आ रही इस परंपरा में नवजात बच्चों को 50 फीट ऊपर से फेंका जाता है. भारत के महाराष्ट्र में 500 वर्षों से चली आ रही यह डरा देने वली इस प्रथा को जोरों शोरों किया जाता है. इस प्रथा में माता-पिता अपने बच्चे को खुशी-खुशी जान बूझकर 50 फीट ऊपर इमारत से फेक देते हैं. इस प्रथा को ‘गुड लक बेबीज’ के नाम से जाना जाता है. लेकिन ऐसा खोफनाक परंपरा क्यों चल रही हैं आइये जानते है यहां
नवजात बच्चों को 50 फीट ऊपर फेंकने वाली यह प्रथा क्या है?
भारत के महाराष्ट्र और कर्नाटक में बच्चों के पैदा होने के बाद उनके माता-पिता एक अनुष्ठान करते हैं, जिसमें वो अपने नवजात बच्चों को 50 फीट की ऊंचाई से फेंक देते हैं. यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथा है और इस प्रथा के पीछे की मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे को अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है.
50 फीट ऊपर से बच्चों को फेंकने की यह परंपरा रही विवादों में
नवजात बच्चों को 50 फीट ऊपर फेंकने की यह परंपरा महाराष्ट्र, कर्नाटक और तुर्कियें, लेकिन यह प्रथा काफी ज्यादा विवादों में रही है, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा के लिए इसे बेहद खतरनाक माना जाता है. यह वजह है कि 500 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में सरकार और बाल सुरक्षा संगठन ने दखल दिया, जिसके बाद इस प्रथा पर रोक लगाई गई. लेकिन फिर भी उत्तरी कर्नाटक में आज भी इस प्रथा को उत्सव की तरह मनाया जाता है.
कर्नाटक में अभी भी जारी है यह खोफनाक प्रथा
‘बच्चों को ऊंचाई से गिराने’ वाली यह प्रथा भारत के महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर अभी भी होती है. इस पुरानी चली आ रही परंपरा में माता-पिता अपने नवजात शिशुओं को 30 या फिर 50 फीट ऊंचे मंदिर या धार्मिक स्थल से नीचे गिराते थे, वहां नीचे लोग चादर या कोई बड़ा कपड़ा पकड़कर खड़े होते हैं, ताकी बच्चों को कुछ ना हो. वहा के लोगों की ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चा भाग्यशाली होता है और उसे स्वस्थ जीवन और दीर्घायु मिलत है. यह प्रथा कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ आज भी देखने को मिलती है
बच्चों को ऊंचाई से गिराने की यह परंपरा क्या यह कानूनी रूप से सही है?
बाल अधिकार संगठनों और सरकार के अनुसार यह प्रथा बेहद खोफनाक है और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा है, इसलिए इस प्रथा को गैरकानूनी बताया गया है. भारत के बाल अधिकार आयोग (Ncpcr) ने इस पर बैन भी लगाया है. वहीं, तुर्किये में भी इस प्रथा को रोकने के लिए सरकार सख्त निगरानी रखती है.
अंधविश्वास से भरी यह प्रथा…
बच्चों को ऊंचाई से गिराने की यह प्रथा अंधविश्वास से भरी है और यह एक तरह का बाल शोषण माना जाता है. इससे बच्चों पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव पड़ सकता हैं. सरकार और बाल सुरक्षा संगठनों ने इसे गैरकानूनी घोषित किया है. जब भी ऐसा मामला सामने आता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाती है.
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