Celebration Of The Menstrual Cycle: ऐसी परंपरा, जिसमें मासिक धर्म चक्र का उत्सव मनाया जाता है. यह प्रथा असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित मां कामाख्या देवी में अंबुबाची मेले के दौरान की जाती हैं. आइये जानते हैं यहा इस अनोखी प्रथा के बारे में
Celebration Menstrual Cycle In Kamakhya Temple
Celebration Of The Menstrual Cycle: असम की राजधानी गुवाहाटी में मां कामाख्या देवी का मंदिर स्थित है, जो काफी मशहूर है और हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. कामाख्या देवी का यह मंदिर मां शक्ति के उपासकों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है. इस मंदीर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, खासकर तब, जब यहां अंबुबाची मेले लगता है, जो काफी ज्याका प्रसिद्ध है.
मां कामाख्या देवी के मंदिर में लगे अम्बुबाची मेला में देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दौरान मंदिर की अधिष्ठात्री देवी यानी देवी कामाख्या अपने वार्षिक मासिक धर्म चक्र से गुजरती हैं. इतना ही नहीं यह भी मान्यता है कि मानसून की बारिश के दौरान, धरती माता के ‘मासिक धर्म’ की रचनात्मक और पोषण शक्तियां भी मेले के दौरान इस स्थल पर भक्तों के लिए सुलभ होती है
अंबुबाची मेला का आयोजन हर साल जून महीने में कामाख्या देवी के मंदिर में लगाया जाता है और इस भव्य मेले में मां देवी कामाख्या के मासिक धर्म को रजस्वला के रूप में मनाया जाता है, जो महिला शक्ति और सृजन की शक्ति के सम्मान देता है. इस दौरान मंदिर के मुख्य द्वार (गर्भगृह) तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैंऔर इन दिनों में कामाख्या देवी के मंदिर में कोई भी पूजा-पाठ या दर्शन नहीं होते है, क्योंकि यह समय देवी के विश्राम का माना जाता है.
2026 के लिए अंबुबाची मेले की अभी तक कोई सटीक तारीखें घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन यह मेला हर साल जून के मध्य में होता है, आमतौर पर यह 22 जून से लेकर 26 जून के आसपास लगता है, जब मासिक धर्म के कारण कामाख्या मंदिर के कपाट देवी के बंद रहते हैं और चौथे दिन खुलता हैं. 2026 में अंबुबाची मेले जून में इसी अवधि के आसपास लगने की उम्मीद है
अंबुबाची मेले तांत्रिक साधना के लिए काफी मशहूर है. देश-विदेश से बड़ी संख्या में तांत्रिक भी इस मेले में मंदिर पहुंचते हैं और गुप्त साधनाओं में लीन रहते हैं. इस मेले के दौरान लोगों को खून से रंगे लाल कपड़े का प्रसाद भी दिया जाता है.इस दौरान कामाख्या देवी मंदिर के गर्भगृह में एक सफेद कपड़ा रखा जाता है, जो देवी के मासिक धर्म के दौरान लाल हो जाता है. इसे ‘रजस्वला वस्त्र’ भी कहते है. इस खून से रंगे लाल कपड़े को प्रसाद के रूप में भक्तों को दिया जाता है.
धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव से भी अंबुबाची मेला काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें विविध कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और लोक परंपराएं देखने को मिलती हैं और इसे लाखों की संख्या में श्रद्धालु देखने पहुंचते हैं
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