Khallari Mata Mandir Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के महासमुन्द में स्थित खल्लारी माता मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है. पौराणिक कथाओं की मानें तो इसी स्थान पर भीम ने हिडिंब का वध किया था और माता कुंती के कहने पर राक्षस हिडिंब की बहन हिडिंबा से विवाह किया था.
Khallari Mata Mandir Mahasamund: छत्तीसगढ़ के महासमुन्द में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां निसंतान दंपती को संतान सुख मिलता है. हम बात कर रहे हैं खल्लारी माता मंदिर की. माना जाता है कि इस मंदिर का जुड़ाव महाभारत काल से है और आज भी मंदिर के आसपास पराक्रमी भीम के होने के चिन्ह मौजूद हैं. महासमुन्द से 25 किमी दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर मां का मंदिर है.
मंदिर के पहाड़ पर होने की वजह से भक्तों को मां के दर्शन के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, हालांकि अब रोप-वे की सुविधा उपलब्ध है. मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 800 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर जाना होता है. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता प्राकृतिक नजारे से भरा है. पहाड़ पर होने के कारण मंदिर के आसपास का नजारा मन को मोह लेने वाला है.
माना जाता है कि मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है. पौराणिक कथाओं की मानें तो इसी स्थान पर भीम ने हिडिंब का वध किया था और माता कुंती के कहने पर राक्षस हिडिंब की बहन हिडिंबा से विवाह किया था. इसी जगह पर भीम ने अज्ञातवास में कई दिनों तक विश्राम भी किया था.
इसके साक्ष्य आज भी मंदिर की पहाड़ी पर मौजूद हैं. पहाड़ी की चोटी पर भीम के विशाल पदचिन्ह हैं. इसके अलावा पहाड़ी के पास ही भीम चूल्हा और भीम की नाव भी मौजूद है. यही कारण है कि इस स्थान को भीम खोज के नाम से भी जाना जाता है.
गौरतलब है कि खल्लारी दशकों पहले हैहयवंश के राजा ब्रह्मदेव की राजधानी थी. उन्होंने ही मंदिर के निर्माण कार्य शुरू करवाया था. मंदिर की पौराणिक कथा की बात करें तो स्थानीय लोगों का मानना है कि मां जगदम्बा कन्या रूप में खल्लारी में लगने वाले बाजार में विचरण करने आती थीं. एक दिन एक बंजारा मां की सुंदरता पर मोहित हो उठा और उनके पीछे-पीछे पहाड़ की चोटी तक पहुंच गया.
लोगों के अनुसार मां ने क्रोधित होकर बंजारे को पत्थर बना दिया और पहाड़ी पर खल्लारी मां के नाम से विराजमान हुईं. प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ इस दुर्गम पहाड़ी पर स्थित मंदिर में दर्शन के लिए आती है. हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है. हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
इंडोनेशिया से एक विडियो एक व्यक्ति अपनी 122 वर्षीय वृद्ध मां के साथ रहता है…
FSSAI की जांच में 17% फूड सैंपल फेल! कंपनियों पर 154 करोड़ का जुर्माना लगा…
Maharashtra Latest News: महाराष्ट्र के चंद्रपुर में दर्दनाक घटना ने शादी की खुशियों को पल…
सुपर एल नीनो: प्रशांत महासागर में बन रहे सुपर एल नीनो से दुनिया में मौसम…
Dipika Kakar: दीपिका कक्कड़ इन दिनों कैंसर से जूझ रही है. जिसको लेकर उनका ट्रीटमेंट…
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो एक युवक ट्रेन में…