FSSAI की जांच में 17% फूड सैंपल फेल! कंपनियों पर 154 करोड़ का जुर्माना लगा है. अब पनीर के पैकेट पर भी दिखेगा दूध का सच, ताकि आप और आपका परिवार रहे हमेशा सुरक्षित.
अब पनीर के पैकेट पर भी दिखेगा दूध का सच!
FSSAI Action: लगातार फूड एंड बेवरेज जुड़े कंपनियों के फूड आइटम्स को लेकर FSSAI और राज्य सरकारों को शिकायतें मिलती रहती है. ऐसे में पिछले साल 2025 में शिकायत मिलने के बाद सरकारी एजेंसियों ने उन कंपनियों के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन लिया जिसने कंज्यूमर को गलत ब्रांडिंग, सबस्टैंडर्ड्स, गलत प्रचारमिस्लिडिंग कर का ठग रही थी. FSSAI और राज्य सरकारों के तालमेल से पिछले साल 2025 में पिछली तिमाही तक 1,65,747 खाने के सैंपल्स की जांच की गई, जिनमें से 17.16% सैंपल्स नियमों के मुताबिक नहीं पाए गए. इसके बाद तुरंत रेगुलेटरी कार्रवाई की गई. 23,580 मामलों में फ़ैसले सुनाए गए, जबकि 1,756 मामलों में आपराधिक सजाएं हुईं. इस एक्शन से अधिकारियों ने खाने-पीने के कारोबार से जुड़े पूरे सिस्टम में जवाबदेही और भी मज़बूत होने का दावा किया.
पिछले साल 2025 में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कुल 154.87 करोड़ का जुर्माना लगाया गया जो कि नियमों को तोड़ने से रोकने के लिए एक कड़ा कदम साबित हुआ है. अधिकारियों ने खाने-पीने की जगहों पर 3,97,009 बार निरीक्षण किए. इतना ही नहीं,उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, इस साल 945 बार खाने के सामान को बाज़ार से वापस मंगाया गया.
FSSAI सूत्रों के मुताबिक, FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया) ने सोशल मीडिया में अलग अलग फूड आइटमस की क्वालिटी को लेकर डाले गए video की जांच करने पर 56% वीडियो फेक पाए गए.
इसके अलावा, FSSAI सूत्रों के मुताबिक, बाजार में उपलब्ध पनीर की क्वालिटी को लेकर FSSAI ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार को टेस्ट ड्राइव चलाने, एक्शन लेने और लोगों को जागरूक करने के लिए कहा है. पनीर की मिसब्रांडिंग को लेकर FSSAI सख्ती दिखा रही है. जल्द FSSAI आइसक्रीम के तर्ज पर दूध वाले पनीर और दूसरे पनीर के पैकेट की लेबलिंग को लेकर बड़ा फैसला ले सकता है. अभी स्टेक होल्डर्स से बातचीत जारी है.
हालांकि, FSSAI के अधिकरियों का कहना है कि ये ऑथोरिटी सिर्फ फूड एंड बेवरेज आइटम की क्वालिटी से जुड़ी गाइडलाइंस और नियम बनाती है और राज्य सरकारें कानून को लागू करने और एक्शन लेने का काम करती है. जन विश्वास बिल पास होने के बाद असुरक्षित फूड भी अब अपराध की श्रेणी में आ चुका है. मतलब, अगर किसी फूड आइटम के खाने से आप बीमार हो जाते हैं या फूड कंपनियां गलत ब्रांडिंग करती है या सबस्टैंडर्ड फूड को बेचती है तो इस कानून के तहत आएगी. नॉन क्रिमिनल मामले में पहले से फूड कंपनियों के खिलाफ 10 लाख का जुर्माना लगाने का प्रावधान है.
नई दिल्ली से मनोहर केसरी की रिपोर्ट
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