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विदुर की वो भूल जिसने रच दिया महाभारत का इतिहास, पितामह भीष्म ने दी थी कई चेतावनियां, फिर भी नहीं रुका विनाश!

Mahabharat story: द्वापर युग में महाभारत का युद्ध पांडवों और कौरवों के बीच हुआ था। पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य और अन्य महापुरुषों को न चाहते हुए भी छली दुर्योधन की ओर से युद्ध का हिस्सा बनना पड़ा था। यह बात उन्हें बार-बार कचोटती थी, लेकिन वे विवश होकर अपने प्रिय पांडवों के विरुद्ध हस्तिनापुर की ओर से युद्ध लड़ने को विवश थे।

BY: Preeti Pandey • UPDATED :
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India News (इंडिया न्यूज़),Mahabharat story: द्वापर युग में महाभारत का युद्ध पांडवों और कौरवों के बीच हुआ था। पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य और अन्य महापुरुषों को न चाहते हुए भी छली दुर्योधन की ओर से युद्ध का हिस्सा बनना पड़ा था। यह बात उन्हें बार-बार कचोटती थी, लेकिन वे विवश होकर अपने प्रिय पांडवों के विरुद्ध हस्तिनापुर की ओर से युद्ध लड़ने को विवश थे। दुर्योधन को युद्ध टालने के लिए मनाने के बहुत प्रयास किए गए, लेकिन अपने भाइयों के प्रति ईर्ष्या की सारी हदें पार कर चुका धृतराष्ट्र का पुत्र पांडवों को पांच गांव भी देने को तैयार नहीं था। क्या यह युद्ध केवल दुर्योधन और धृतराष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं के कारण हुआ था? पितामह भीष्म की मानें तो युद्ध भले ही दुर्योधन की जिद के कारण हुआ हो, लेकिन इसके लिए विदुर की कुछ गलतियां भी जिम्मेदार हैं।

कौरवों के नाश का कारण

महात्मा विदुर धर्मराज यमराज के अवतार थे। विदुर नीति पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। उन्होंने धृतराष्ट्र को कई बार गलतियां करने से रोका था। जब भी धृतराष्ट्र कुछ गलत करते थे तो विदुर खुद को उन्हें टोकने से नहीं रोक पाते थे। धृतराष्ट्र ने उनकी सलाह नहीं मानी जिसके कारण कौरवों का नाश हो गया। हम जिस प्रसंग की बात कर रहे हैं वह वर्णावृत कांड से जुड़ा है। दुर्योधन ने पांडवों को लाक्षागृह में जिंदा जलाने की साजिश रची थी। लाक्षागृह में लाक्षागृह बनाकर एक महल तैयार किया गया था ताकि उसमें तुरंत आग लग जाए और सभी पांडव महल के अंदर ही जलकर मर जाएं। विदुर को दुर्योधन के इरादों की भनक लग गई और जमीन में बनी एक सुरंग के जरिए समय रहते पांडवों को बचा लिया गया।

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Mahabharat story: विदुर की वो भूल जिसने रच दिया महाभारत का इतिहास

पांडवों को हस्तिनापुर लौटने की अनुमति नहीं दी गई थी

जब लाक्षागृह कांड हुआ तो युधिष्ठिर को हस्तिनापुर का युवराज घोषित किया गया। इस पूरे षड्यंत्र की जड़ तक पहुंचने के लिए विदुर ने पांडवों को हस्तिनापुर लौटने की बजाय कुछ समय तक अज्ञातवास में रहने की सलाह दी। उनका यही निर्णय आगे चलकर महाभारत का वास्तविक कारण बना। लाक्षागृह कांड में पांडवों की मृत्यु की गलत सूचना के आधार पर दुर्योधन को हस्तिनापुर का नया युवराज घोषित किया गया। कुछ समय बाद जब पांडव हस्तिनापुर लौटे तो बड़ा सवाल यह था कि क्या दुर्योधन युवराज बना रहेगा या यह पद वापस युधिष्ठिर को दिया जाएगा। इसके बाद देश का बंटवारा कर पांडवों को इंद्रपद देने का निर्णय लिया गया।

भीष्म पितामह ने इसे विदुर की भूल क्यों बताया?

महाभारत से ठीक पहले भीष्म पितामह अपने ही प्रिय पांडवों के विरुद्ध युद्ध भूमि में उतरने की विवशता के कारण दुःखी थे। बीआर चोपड़ा की महाभारत के अनुसार इस दौरान विदुर पितामह के पास उन्हें अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने और पांडवों के विरुद्ध युद्ध में न उतरने की सलाह देने पहुंचे। इस समय भीष्म पितामह ने विदुर को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यदि विदुर ने समय रहते लाक्षागृह की घटना के बारे में बता दिया होता तो वह महाराज धृतराष्ट्र को तत्कालीन युवराज यानी युधिष्ठिर की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दुर्योधन को मृत्युदंड देने के लिए मजबूर कर देते। ऐसी स्थिति में एक ही समय में दो युवराजों की समस्या उत्पन्न नहीं होती।

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