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Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन में उम्र का क्या है महत्व? जानिए हर उम्र की कन्या देती है अलग आशीर्वाद

Navratri Kanya Pujan: नवरात्रि   के समय कन्या पूजन सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है. इसमें कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी सेवा की जाती है.मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया कन्या पूजन जीवन में सुख, शांति और सफलता लाता है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 22, 2026 15:57:25 IST

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Navratri Kanya Pujan:  नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इन नौ दिनों में भक्त पूरी श्रद्धा के साथ देवी की पूजा करते हैं. इस दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसे अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है. इसलिए उनकी पूजा करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. आमतौर पर 2 से 9 साल तक की कन्याओं का पूजन करना शुभ माना जाता है.

 कैसे किया जाता है कन्या पूजन?

कन्या पूजन हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करता है. इसमें छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार या दक्षिणा दी जाती है.कुछ लोग हर दिन एक-एक कन्या की पूजा करते हैं, जबकि कुछ अष्टमी या नवमी के दिन एक साथ 9 कन्याओं का पूजन करते हैं. पूजा का असली भाव दूसरों के कल्याण की भावना रखना होता है, तभी इसका पूरा फल मिलता है.

 किस उम्र की कन्या से क्या मिलता है आशीर्वाद?

नवरात्रि में अलग-अलग उम्र की कन्याओं को अलग देवी स्वरूप माना गया है, और हर एक का अपना खास महत्व होता है

2 साल की कन्या (कुमारी)
  इसकी पूजा से दुख और गरीबी दूर होती है, साथ ही शक्ति और आयु में वृद्धि होती है.

3 साल की कन्या (त्रिमूर्ति)
  इससे धर्म, धन और इच्छाओं की पूर्ति होती है और घर में खुशहाली आती है.

4 साल की कन्या (कल्याणी)
  विद्या, सफलता और सुख की प्राप्ति के लिए इसका पूजन किया जाता है.

5 साल की कन्या (कालिका)
  यह शत्रुओं से रक्षा करती है और नकारात्मकता को दूर करती है.

6 साल की कन्या (चंडिका)
  धन और ऐश्वर्य पाने के लिए इस उम्र की कन्या की पूजा शुभ मानी जाती है.

7 साल की कन्या (शाम्भवी)
  इससे दुख कम होते हैं और जीवन की कठिन परिस्थितियों में विजय मिलती है.

8 साल की कन्या (दुर्गा)
  यह सांसारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति दोनों देती है.

9 साल की कन्या (सुभद्रा)
  इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सफलता मिलती है.

नवरात्रि में भोग का भी होता है महत्व

नवरात्रि के हर दिन देवी को अलग-अलग भोग लगाने का भी विशेष महत्व बताया गया है

  •  प्रतिपदा – घी (स्वास्थ्य लाभ के लिए)
  •  द्वितीया -चीनी (लंबी उम्र के लिए)
  •  तृतीया -दूध (दुखों से मुक्ति)
  •  चतुर्थी – मालपुआ (संकट दूर करने के लिए)
  •  पंचमी – केला (बुद्धि और ज्ञान के लिए)
  •  षष्ठी -शहद (आकर्षण और सुंदरता के लिए)
  •  सप्तमी – गुड़ (तनाव से राहत)
  •  अष्टमी – नारियल (मानसिक शांति)
  •  नवमी – धान का लावा (सुख-समृद्धि के लिए)

 

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 22, 2026 15:57:25 IST

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Navratri Kanya Pujan:  नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इन नौ दिनों में भक्त पूरी श्रद्धा के साथ देवी की पूजा करते हैं. इस दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसे अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है. इसलिए उनकी पूजा करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. आमतौर पर 2 से 9 साल तक की कन्याओं का पूजन करना शुभ माना जाता है.

 कैसे किया जाता है कन्या पूजन?

कन्या पूजन हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करता है. इसमें छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार या दक्षिणा दी जाती है.कुछ लोग हर दिन एक-एक कन्या की पूजा करते हैं, जबकि कुछ अष्टमी या नवमी के दिन एक साथ 9 कन्याओं का पूजन करते हैं. पूजा का असली भाव दूसरों के कल्याण की भावना रखना होता है, तभी इसका पूरा फल मिलता है.

 किस उम्र की कन्या से क्या मिलता है आशीर्वाद?

नवरात्रि में अलग-अलग उम्र की कन्याओं को अलग देवी स्वरूप माना गया है, और हर एक का अपना खास महत्व होता है

2 साल की कन्या (कुमारी)
  इसकी पूजा से दुख और गरीबी दूर होती है, साथ ही शक्ति और आयु में वृद्धि होती है.

3 साल की कन्या (त्रिमूर्ति)
  इससे धर्म, धन और इच्छाओं की पूर्ति होती है और घर में खुशहाली आती है.

4 साल की कन्या (कल्याणी)
  विद्या, सफलता और सुख की प्राप्ति के लिए इसका पूजन किया जाता है.

5 साल की कन्या (कालिका)
  यह शत्रुओं से रक्षा करती है और नकारात्मकता को दूर करती है.

6 साल की कन्या (चंडिका)
  धन और ऐश्वर्य पाने के लिए इस उम्र की कन्या की पूजा शुभ मानी जाती है.

7 साल की कन्या (शाम्भवी)
  इससे दुख कम होते हैं और जीवन की कठिन परिस्थितियों में विजय मिलती है.

8 साल की कन्या (दुर्गा)
  यह सांसारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति दोनों देती है.

9 साल की कन्या (सुभद्रा)
  इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सफलता मिलती है.

नवरात्रि में भोग का भी होता है महत्व

नवरात्रि के हर दिन देवी को अलग-अलग भोग लगाने का भी विशेष महत्व बताया गया है

  •  प्रतिपदा – घी (स्वास्थ्य लाभ के लिए)
  •  द्वितीया -चीनी (लंबी उम्र के लिए)
  •  तृतीया -दूध (दुखों से मुक्ति)
  •  चतुर्थी – मालपुआ (संकट दूर करने के लिए)
  •  पंचमी – केला (बुद्धि और ज्ञान के लिए)
  •  षष्ठी -शहद (आकर्षण और सुंदरता के लिए)
  •  सप्तमी – गुड़ (तनाव से राहत)
  •  अष्टमी – नारियल (मानसिक शांति)
  •  नवमी – धान का लावा (सुख-समृद्धि के लिए)

 

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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