India News (इंडिया न्यूज), Rahu Ketu Ki Pahchan: ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को पाप ग्रहों में गिना जाता है। ये दोनों ग्रह शनि देव के अनुयायी माने जाते हैं और कुंडली में जहां भी स्थित होते हैं, वहां विशेष प्रभाव डालते हैं। राहु को सिर और केतु को धड़ माना जाता है। राहु बुद्धि को भ्रमित करता है, जबकि केतु व्यक्ति को बिना सोचे-समझे कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे कई बार हानि उठानी पड़ती है। राहु का संबंध ज्ञानेन्द्रियों से और केतु का संबंध कर्मेन्द्रियों से होता है। राहु की देवी माता सरस्वती हैं, जबकि केतु के देवता भगवान गणेश माने जाते हैं।
राहु और केतु को ज्योतिष में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका दी गई है। वे शनि देव के आदेश पर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। राहु का रंग काला और केतु का रंग सफेद माना जाता है। कुंडली में राहु की प्रतिकूल स्थिति होने पर अप्रत्याशित घटनाएं, भय और नकारात्मक विचार व्यक्ति को घेर लेते हैं। इसके विपरीत, शुभ स्थिति में राहु अचानक धन लाभ, राजनीतिक सफलता और प्रशासनिक क्षेत्रों में तरक्की दिलाता है। वहीं, केतु की प्रतिकूल स्थिति व्यक्ति को जेल जाने या सड़क पर भटकने की स्थिति में डाल सकती है।
Rahu Ketu Ki Pahchan: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गले के ऊपर की बीमारियों के लिए राहु जिम्मेदार होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गले के ऊपर की बीमारियों के लिए राहु जिम्मेदार होता है। राहु सिर और जबड़े को प्रभावित करता है, जबकि केतु रीढ़ की हड्डी, गुर्दे, घुटनों और जोड़ों पर प्रभाव डालता है।
राहु और केतु का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में गहरा होता है। ये ग्रह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर सामाजिक जीवन तक हर पहलू को प्रभावित करते हैं। उचित ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर इन ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। नियमित पूजा-पाठ और सत्कर्मों के माध्यम से राहु और केतु के अशुभ फलों से मुक्ति पाई जा सकती है।
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