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कलियुग की शादी को लेकर कही श्रीकृष्ण की वो 5 बातें, जो आज पत्थर की लकीर की तरह हो रही है सच, जानें क्या?

Shri Krishna's Word About Kaliyug Marriages: कलियुग में विवाह की प्रकृति और समाज में रिश्तों की महत्ता को लेकर भगवान श्रीकृष्ण ने जो भविष्यवाणी की थी

BY: Prachi Jain • UPDATED :
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India News (इंडिया न्यूज़), Shri Krishna’s Word About Kaliyug Marriages: भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में ही कलियुग के बारे में कई भविष्यवाणियाँ की थीं, जो न केवल धर्म और समाज से जुड़ी थीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन, रिश्तों और विवाह जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक परंपराओं को भी प्रभावित करती थीं। श्रीकृष्ण ने जो भविष्यवाणियाँ की थीं, उनमें से एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी कलियुग में विवाह से जुड़ी है। यह भविष्यवाणियाँ आज के समाज की वास्तविकता से बहुत मेल खाती हैं, और उनका दर्शन हमें कलियुग के विवाह संस्कारों की बदलती प्रवृत्तियों को समझने में मदद करता है।

श्रीकृष्ण की भविष्यवाणियाँ 

श्रीकृष्ण ने कहा था कि कलियुग में विवाह की प्रकृति पूरी तरह से बदल जाएगी। इस बदलाव में प्रेम, सम्मान, और परंपराओं की जगह दिखावा, धन का प्रदर्शन और स्वार्थपूर्ण उद्देश्य लेने लगेंगे। आइए, जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने कलियुग में विवाह को लेकर क्या भविष्यवाणियाँ की थीं:

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Shri Krishna’s Word About Kaliyug Marriages: कलियुग में विवाह की प्रकृति और समाज में रिश्तों की महत्ता को लेकर भगवान श्रीकृष्ण ने जो भविष्यवाणी की थी

1. विवाह में प्रेम और सम्मान की कमी

श्रीकृष्ण ने भविष्यवाणी की थी कि कलियुग में विवाह में प्रेम और सम्मान की भावना कम हो जाएगी। इस समय लोग विवाह के समारोहों में अधिक रुचि लेंगे, न कि एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान की भावना को महत्व देंगे। विवाह समारोह की भव्यता और चकाचौंध पर ध्यान दिया जाएगा, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक सच्चाइयाँ और रिश्तों की गहरी समझ छुपी रहेगी।

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2. धन का प्रदर्शन और सामाजिक भेदभाव

भगवान श्रीकृष्ण ने यह भी कहा कि कलियुग में धनवान लोग विवाह समारोह में अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करेंगे। उनके लिए विवाह एक तरह से अपने धन और संसाधनों का प्रदर्शन बन जाएगा। आमतौर पर देखा जाएगा कि जिनके पास ज्यादा पैसा होगा, वे विवाह के दौरान अपने भव्य महल, आलीशान साज-सज्जा, और महंगे तोहफे दिखाकर दूसरों को प्रभावित करेंगे। इसके परिणामस्वरूप, जो गरीब या साधारण लोग होंगे, वे विवाह समारोहों में स्वयं को हीन महसूस करेंगे और उनके लिए यह एक असहज स्थिति बन जाएगी।

3. धन की तलाश में विवाह

कलियुग में लोग धनवान लोगों के साथ विवाह करना चाहेंगे, और उनके लिए एक अच्छे जीवन साथी की पहचान धन ही बन जाएगी। श्रीकृष्ण ने कहा कि लोग गुण, सम्मान, और प्रेम को छोड़कर विवाह में केवल धन को प्राथमिकता देंगे। इस समाज में लोग यह देखेंगे कि भविष्य में उन्हें किससे आर्थिक लाभ हो सकता है, और उसी व्यक्ति के साथ विवाह करेंगे। गुणवान और अच्छे चरित्र वाले लोग केवल इसलिए अयोग्य माने जाएंगे क्योंकि उनके पास पर्याप्त धन नहीं होगा।

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4. विवाह का रूप एक व्यापार बन जाएगा

श्रीकृष्ण ने यह भी कहा था कि कलियुग में विवाह एक व्यापार बनकर रह जाएगा। लोग अब रिश्तों में लाभ की तलाश करेंगे और विवाह को केवल एक व्यापारिक लाभ के रूप में देखेंगे। जिनका उद्देश्य केवल धन, शक्ति या सामाजिक स्थिति बढ़ाना होगा, वे इस सोच के तहत विवाह करेंगे कि इससे उन्हें भविष्य में व्यक्तिगत लाभ होगा। यह परंपरा पारंपरिक विवाह की गरिमा और उद्देश्य को पूरी तरह से खो देगी।

5. रिश्तों की गरिमा का नुकसान

श्रीकृष्ण ने यह भविष्यवाणी की थी कि कलियुग में लोग अपने रिश्तों की गरिमा को तोड़ देंगे। विवाह में अब केवल लोभ, कामवासना और स्वार्थ की भावना पर जोर दिया जाएगा। यही कारण होगा कि लोग अपनी खून के रिश्तों में भी विवाह करने से नहीं हिचकेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य केवल भौतिक लाभ होगा, चाहे वह भाई-बहन, चचेरे भाई-बहन या अन्य रिश्तेदारों के बीच क्यों न हो।

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6. संबंधों का उद्देश्य केवल स्वार्थ होगा

इस भविष्यवाणी के अनुसार, लोग अब संबंधों को केवल अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए बनाएंगे। विवाह का उद्देश्य पहले जैसा नहीं रहेगा, जो समाज में प्यार, देखभाल और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होता था। बल्कि, यह केवल कामवासना, लोभ और स्वार्थ तक सीमित हो जाएगा। विवाह अब एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और आर्थिक लाभ के रूप में देखा जाएगा।

श्रीकृष्ण की ये भविष्यवाणियाँ आज के समाज की कई सच्चाइयों से मेल खाती हैं। कलियुग में विवाह की प्रकृति और समाज में रिश्तों की महत्ता को लेकर भगवान श्रीकृष्ण ने जो भविष्यवाणी की थी, वह आज हमारे चारों ओर दिखाई देती है। समाज में दिखावा, भव्यता, और धन की भूमिका विवाह में अत्यधिक बढ़ गई है, जबकि प्रेम, सम्मान और रिश्तों की गहराई कम होती जा रही है। श्रीकृष्ण की इन भविष्यवाणियों को समझना हमें विवाह के वास्तविक उद्देश्य और उसके सामाजिक महत्त्व पर पुनर्विचार करने का अवसर देता है, ताकि हम इस स्वार्थपूर्ण और भौतिकवादी समाज में सच्चे प्रेम और सम्मान की भावना को फिर से जीवित कर सकें।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है।पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इंडिया न्यूज इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

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