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महाभारत युद्ध के समय क्या थी अर्जुन और श्री कृष्ण की उम्र? यहां जानें क्या कहती है इसपर पुराण कथाएं

Shri Krishna & Arjuna Age During Mahabharat: महाभारत युद्ध के समय क्या था अर्जुन और श्री कृष्ण की उम्र

BY: Prachi Jain • UPDATED :
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India News (इंडिया न्यूज), Shri Krishna & Arjuna Age During Mahabharat: महाभारत के युद्ध और उससे संबंधित समयरेखा एक अद्भुत ऐतिहासिक और धार्मिक विषय है, जो हमें प्राचीन भारत की संस्कृति और महान विभूतियों के जीवन से परिचित कराता है। इस लेख में हम महाभारत युद्ध के समय श्रीकृष्ण और अर्जुन की उम्र और इससे संबंधित घटनाओं को कहानी के रूप में समझने का प्रयास करेंगे।

श्रीकृष्ण और उनकी उम्र का रहस्य

महाभारत का युद्ध 22 नवंबर 3067 ईसा पूर्व हुआ माना जाता है। यह वह समय था जब कौरव और पांडवों के बीच धर्म और अधर्म की लड़ाई चरम पर थी। श्रीकृष्ण, जो युद्ध में पांडवों के मार्गदर्शक और अर्जुन के सारथी थे, उस समय करीब 56 वर्ष के थे। हालांकि, कुछ विद्वानों का मानना है कि युद्ध के समय उनकी उम्र 83 वर्ष थी। यह अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि हम उनकी जीवन यात्रा के विभिन्न घटनाक्रमों को कैसे व्याख्या करते हैं।

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Shri Krishna & Arjuna Age During Mahabharat: महाभारत युद्ध के समय क्या था अर्जुन और श्री कृष्ण की उम्र

श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के 36 वर्ष बाद, 119 वर्ष की आयु में देह त्याग दिया। उनका जीवन न केवल उनकी अलौकिक लीलाओं से भरा हुआ था, बल्कि मानवता के लिए अनेक शिक्षाओं का स्रोत भी था। उनके द्वारा गीता का उपदेश, अर्जुन को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा, और युद्ध की रणनीतियां, सभी कालजयी हैं।

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अर्जुन की जीवन यात्रा

अर्जुन का जन्म महाभारत की प्रमुख घटनाओं से लगभग 40 वर्ष पहले हुआ था। वे पांडवों के बीच तीसरे स्थान पर थे और अपने पराक्रम और धनुर्विद्या के लिए प्रसिद्ध थे। जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ, उस समय अर्जुन की उम्र लगभग 55 वर्ष थी।

अर्जुन के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ महाभारत युद्ध था, जहां उन्होंने श्रीकृष्ण के निर्देशन में कौरवों के खिलाफ विजय प्राप्त की। गीता के उपदेश ने न केवल अर्जुन को धर्म और कर्म का महत्व समझाया, बल्कि यह समस्त मानवता के लिए अमूल्य धरोहर बन गया।

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युद्ध के बाद की घटनाएं

महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन और पांडवों ने लगभग 36 वर्षों तक हस्तिनापुर पर शासन किया। श्रीकृष्ण के देह त्याग के बाद, अर्जुन ने अपने शेष जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया। ऐसा कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन की उम्र 126 वर्ष तक पहुँच गई थी। यह समय उनके लिए आत्मचिंतन और साधना का काल था। उन्होंने अपने अंतिम वर्षों में अपने जीवन और कर्तव्यों के बारे में गहन चिंतन किया।

श्रीकृष्ण और अर्जुन की जीवन यात्रा हमें न केवल उनके समय की ऐतिहासिक घटनाओं से परिचित कराती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि धर्म और कर्म के मार्ग पर चलना क्यों महत्वपूर्ण है। महाभारत का युद्ध और उससे जुड़ी घटनाएं मानवता के लिए एक गहरा संदेश हैं। यह हमें अपने जीवन में सही निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

श्रीकृष्ण और अर्जुन की उम्र के रहस्यों पर आधारित यह कहानी हमें यह समझने में मदद करती है कि समय और इतिहास केवल घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के मूल्यों को समझने का मार्ग दिखाता है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है।पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इंडिया न्यूज इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

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