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India News (इंडिया न्यूज), Reason For Shaving Head After Death At Home: हिंदू धर्मग्रंथों में गरुड़ पुराण का विशेष स्थान है, जो मृत्यु और उससे जुड़ी विभिन्न रीति-रिवाजों, परंपराओं और उनके आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी परिजन की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा की मुक्ति और शांति के लिए कई अनुष्ठान किए जाते हैं। इन अनुष्ठानों में सोलहवां संस्कार, जो अंतिम संस्कार भी कहलाता है, प्रमुख है। इस दौरान 13 दिनों तक परिजन विभिन्न विधानों का पालन करते हैं। इन्हीं विधानों में से एक है ‘मुंडन संस्कार’।
मुंडन संस्कार के पीछे गहरी आध्यात्मिक मान्यता है। इस प्रथा के अनुसार, सिर के बाल गर्व और अहंकार का प्रतीक माने जाते हैं। सिर मुंडवाना मृतक के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त करने का एक माध्यम है। यह कर्म यह दर्शाता है कि परिजन अपने अहंकार का त्याग कर, दिवंगत आत्मा के प्रति समर्पण और त्याग दिखा रहे हैं।
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सिर और चेहरे पर मौजूद बालों को प्रदूषित और नकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना जाता है। शोक और दुःख के समय ये बाल नकारात्मक विचारों के प्रवाह को बढ़ावा देते हैं। सिर मुंडवाने से परिजन इन नकारात्मकताओं को शारीरिक रूप से हटाकर नए जीवन की शुरुआत की ओर कदम बढ़ाते हैं। जब नए बाल उगते हैं, तो इसे जीवन में नई आशाओं और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। यह प्रक्रिया शोक को पीछे छोड़ने और जीवन में आगे बढ़ने का संकेत देती है।
गरुड़ पुराण में मृत्यु के समय और उसके बाद के अनुष्ठानों का विस्तार से वर्णन है। इसमें कहा गया है कि परिवार में किसी की मृत्यु होने पर ‘पातक’ लग जाता है, जो परिवार को अशुद्ध बनाता है। सिर मुंडवाने के साथ यह पातक समाप्त होता है, और पुरुषों की अशुद्धियां भी समाप्त हो जाती हैं।
यह भी कहा जाता है कि जब परिवार के पुरुष सदस्य मृतक को श्मशान ले जाते हैं और दाह-संस्कार करते हैं, तो मृत शरीर से जुड़े कुछ जीवाणु उनके शरीर में चिपक जाते हैं। विशेष रूप से, ये जीवाणु सिर में चिपक सकते हैं। मुंडन कर्म से बालों के साथ ये जीवाणु पूरी तरह से निकल जाते हैं। यही कारण है कि इस दिन स्नान, नाखून काटना और सिर मुंडवाने का विशेष महत्व बताया गया है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक की आत्मा शरीर छोड़ना नहीं चाहती और यमराज से याचना करके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास करती है। बालों को नकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना जाता है। इसीलिए सिर मुंडवाने से आत्मा का मोह भंग होता है, और वह परिजनों के प्रति अपनी आसक्ति को त्यागकर मुक्त हो जाती है।
पारंपरिक हिंदू समाज में विधवाओं के सिर मुंडवाने की प्रथा कभी-कभी देखी जाती थी। इसका मुख्य उद्देश्य था, विधवा को उसके मृत पति के मोह से मुक्त करना। ऐसा माना जाता था कि बालों के माध्यम से वह अपने पिछले जीवन और पति की आत्मा से जुड़ी रह सकती है।
हालांकि, आधुनिक हिंदू समाज में महिलाओं के सिर मुंडवाने को निषेध माना गया है। पहला कारण यह है कि महिलाएं श्मशान नहीं जातीं और मृतक के दाह संस्कार के संपर्क में कम रहती हैं। दूसरा कारण यह है कि हिंदू धर्म महिलाओं को दैवीय ऊर्जा का प्रतीक मानता है। बालों के सिरों से प्रसारित ऊर्जा उन्हें नकारात्मक प्रभावों से बचाती है। फिर भी, कई अवसरों पर महिलाएं स्वेच्छा से अपने बालों का त्याग करती हैं, जैसे देवताओं के प्रति श्रद्धा या किसी आध्यात्मिक संकल्प के अंतर्गत।
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मुंडन संस्कार न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक कारणों से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन के चक्र को समझने और दुःख से बाहर निकलने का एक साधन भी है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इस संस्कार से मृतक आत्मा को शांति मिलती है और परिजन अपने शोक को पीछे छोड़ते हुए जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह परंपरा जीवन और मृत्यु के संतुलन को दर्शाती है, जो हिंदू धर्म के गहन दर्शन का अभिन्न अंग है।
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