Vastu Tips For Eat: अक्सर आपने देखा होगा कि, लोग खाना खाने के बाद उसी थाली में हाथ धो देते हैं. लेकिन, शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित माना गया है. यह गंदी आदत आपको कई गंभीर परेशानियों में डाल सकती है. जानिए इसके पीछे का कारण-
जानिए, खाना खाने के बाद थाली में हाथ क्यों नहीं धोना चाहिए. (Canva)
Vastu Tips For Eat: अक्सर आपने देखा होगा कि, लोग खाना खाने के बाद उसी थाली में हाथ धो देते हैं. लेकिन, शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित माना गया है. यह गंदी आदत आपको कई गंभीर परेशानियों में डाल सकती है. बता दें कि, सनातन परंपरा में अन्न को देवता माना गया है. ऐसे में खाना खाने के बाद थाली में हाथ धुलने से बचे हुए खाने का अपमान होता है. ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं. कई बार यह परेशानी घर में दरिद्रता का कारण बन सकता है. यही नहीं, पाई-पाई को मोहताज हो सकते है. खाने के बाद थाली में हाथ न धुलने के पीछे और क्या कारण हैं? इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि कांत मिश्र-
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भोजन की थाली में हाथ धोने से मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा नाराज होती हैं. इसलिए हमें खाने के हर एक दाने का सम्मान करना करना चाहिए. थाली में खाना नहीं छोड़ना चाहिए. भोजन का एक दाना भी व्यर्थ होने से गलत प्रभाव पड़ता है. इतना ही नहीं, कई पुराणों में भी अन्न का अपमान करना पाप माना गया है.
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, कई बार हम खाने की क्षमता से अधिक भोजन थाली में रखवा लेते हैं. ऐसा करना गलत होता है. क्योंकि खाना बचने से अन्य देवता का अपमान होता है. जो अन्न की अहमियत नहीं समझता वो पाप का भागी बनता है. इसलिए थाली में खाना उतना ही लेना चाहिए जितना खा सके.
धार्मिक मान्यता है कि, थाली को हमेशा लकड़ी के पटरे पर रखकर भोजन करना चाहिए. हमें उन सभी नियमों को ध्यान में रखना चाहिए, जिससे अन्न का सम्मान होता रहे. यदि लकड़ी का पटरा न हो तो आप चटाई आदि का प्रयोग कर सकते हैं.
शास्त्र कहते हैं कि, भोजन की थाली को कभी एक हाथ से नहीं पकड़ना चाहिए. ऐसा करने से खाना प्रेत योनी में चला जाता है. शास्त्रों में भोजन से पहले भगवान का ध्यान लगाना उत्तम बताया गया है. कहा जाता है कि खाना खाते समय क्रोध, बातचीत नहीं करनी चाहिए.
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, भोजन की थाली लगाते समय अपशकुन न हो इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. कहा, जब भी खाने की थाली परोसें तो ध्यान रखें कि उसमें तीन रोटियां न हों. ये सनातन परंपरा के लिए अपशकुन होता है. वहीं, ऐसा भी माना जाता है कि 3 रोटी वाली थाली मृतक को समर्पित होती है. जिस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है उसके नाम की थाली में 3 रोटियां रखी जाती है.
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