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शव की राख का बनाकर पीते है सूप…मरते शरीर को पत्तों से दबा छोड़ देते है यूंही, क्या है ये रिवाज जिसमे इंसानियत ही हो जाती है खत्म?

Customs of Yanomani Tribe: शव की राख का बनाकर पीते है सूप क्या है ये रिवाज जिसमे इंसानियत ही हो जाती है खत्म

BY: Prachi Jain • UPDATED :
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India News (इंडिया न्यूज), Customs of Yanomani Tribe: दुनियाभर में कई जनजातियाँ और समुदाय अपनी अजीबो-गरीब परंपराओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें से कुछ हमें हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक जनजाति है यानोमानी जनजाति, जो दक्षिण अमेरिका के ब्राजील और वेनेजुएला में पाई जाती है। इस जनजाति के लोग अपनी विशिष्ट परंपराओं और रिवाजों के लिए प्रसिद्ध हैं, और उनमें से एक रिवाज तो इतना अजीब है कि जानकर आप चौंक जाएंगे।

यानोमानी जनजाति की परंपरा: एंडोकैनिबलिज्म

एंडोकैनिबलिज्म एक ऐसा रिवाज है, जो यानोमानी जनजाति के लोगों द्वारा अपनाया जाता है। इस रिवाज के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके परिवार और समुदाय के लोग उस मृत व्यक्ति की हड्डियों को एक विशेष तरीके से तैयार करते हैं और उसे सूप में मिलाकर पीते हैं। इस रिवाज को मृतक की आत्मा को सम्मान देने और उसे शांति प्रदान करने का एक तरीका माना जाता है।

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मृतक के शव के साथ की जाने वाली प्रक्रिया

शव को जंगल में रखना: यानोमानी लोग मृत व्यक्ति के शव को पास के जंगल में छोड़ देते हैं, जहाँ इसे पत्तों से ढक दिया जाता है। शव को लगभग एक महीने तक वहीं रखा जाता है, जिससे यह प्राकृतिक रूप से सड़ता है और उसकी हड्डियाँ बाहर आ जाती हैं।

हड्डियों की राख तैयार करना: जब शव पूरी तरह से सड़ जाता है, तो उसके बाद शव से हड्डियाँ इकट्ठा की जाती हैं। हड्डियों को जलाकर उनकी राख बनाई जाती है।

सूप बनाना और पीना: इस राख को फिर से एक विशेष प्रकार के सूप में मिलाकर पीने के लिए तैयार किया जाता है। यह सूप समुदाय के सभी सदस्य मिलकर पीते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए वे मृतक की आत्मा को सम्मान देने का प्रयास करते हैं, और यह भी माना जाता है कि इस रिवाज से मृतक को शांति मिलती है।

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एंडोकैनिबलिज्म का उद्देश्य

यह रिवाज कनिबलिज़्म (मनुष्य मांस खाने) से अलग है, क्योंकि इसमें शव के मांस को नहीं खाया जाता। इसके बजाय, केवल हड्डियों को जलाकर उनकी राख को सूप में मिलाकर पिया जाता है। यानोमानी जनजाति के लिए यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक रिवाज है, जो उनके विश्वासों के अनुसार मृतकों की आत्मा को शांति और सम्मान प्रदान करता है।

समाज में इसका महत्व

यानोमानी जनजाति में यह परंपरा सिर्फ शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि इसे मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी महत्व दिया जाता है। समुदाय के लोग इसे एक सामाजिक क्रिया के रूप में देखते हैं, जिससे वे मृतक के साथ अपने रिश्ते को बनाए रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वह शांति से आगे बढ़े। इस रिवाज को अपनाने के पीछे एक गहरी आस्थाएँ और विश्वास हैं, जो उनके जीवन और मृत्यु के दर्शन से जुड़ी हैं।

सफाई और स्वच्छता के आधुनिक दृष्टिकोण से देखने पर यह परंपरा बहुत अजीब और भयावह लग सकती है, लेकिन यानोमानी जनजाति के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक अभ्यास है। यह परंपरा न केवल उनके मृतकों के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विभिन्न संस्कृतियों के लिए मृत्यु और जीवन के बाद की प्रक्रिया कितनी अलग हो सकती है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है।पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इंडिया न्यूज इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

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