Budget 2026 Today: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) आज नौवें बजट के बाद वह लोकसभा में विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए छात्रों से संवाद कर लोकतांत्रिक अनुभव साझा करेंगी.
Education Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने जा रही हैं. यह उनका लगातार नौवां बजट भाषण होगा. बजट भाषण के बाद वित्त मंत्री लगभग 30 कॉलेज छात्रों के साथ संवाद करेंगी. ये छात्र लोकसभा गैलरी से बजट का लाइव प्रसारण देखेंगे, जिससे उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया की एक अहम झलक मिलेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये प्रतिभागी कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, मेडिकल, और वोकेशनल एजुकेशन जैसे विविध शैक्षणिक क्षेत्रों से आते हैं, जो भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली की व्यापकता को दर्शाता है.
शिक्षा बजट 2026 में शिक्षा क्षेत्र के केंद्र में रहने की संभावना है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भले ही भारत ने प्राथमिक स्तर पर लगभग सार्वभौमिक नामांकन हासिल कर लिया हो, लेकिन कक्षा 8वीं के बाद छात्रों को शिक्षा प्रणाली में बनाए रखना अब भी एक बड़ी चुनौती है.
सर्वे में बताया गया है कि माध्यमिक स्तर पर शुद्ध नामांकन दर (NER) सिर्फ 52.2 प्रतिशत है. यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि सेकेंडरी एजुकेशन में रिटेंशन बढ़ाने के लिए ठोस और लक्षित नीतियों की जरूरत है. ऐसे में सरकार से उम्मीद है कि वह स्कूल ड्रॉपआउट रोकने, लर्निंग आउटकम सुधारने और सेकेंडरी-हायर सेकेंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस करेगी.
आर्थिक सर्वेक्षण ने नामांकन और वास्तविक सीखने के स्तर के बीच बढ़ते अंतर पर चिंता जताई है, खासकर प्राथमिक शिक्षा के बाद. माध्यमिक और उच्च शिक्षा में ट्रांज़िशन की असमानता स्किल डेवलपमेंट और रोजगार क्षमता को प्रभावित कर रही है. ऐसे में शिक्षा बजट 2026 से उम्मीद है कि यह क्वालिटी एजुकेशन, हायर और प्रोफेशनल एजुकेशन में रिटेंशन, और कैपेसिटी बिल्डिंग पर विशेष जोर देगा. यह बजट न सिर्फ पुराने वादों को मजबूती देगा, बल्कि 2026-27 की व्यापक आर्थिक रणनीति के साथ शिक्षा सुधारों को जोड़ने का काम भी करेगा.
पिछले केंद्रीय बजट में सरकार ने मेडिकल एजुकेशन के विस्तार पर बड़ा ऐलान किया था. अगले पांच वर्षों में 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने और 2014 के बाद स्थापित IITs के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की योजना सामने रखी गई थी. इन पहलों का मकसद तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में बढ़ती मांग को पूरा करना था. वित्तीय स्तर पर, 2025 में शिक्षा क्षेत्र के लिए 1.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया था, जो पिछले साल की तुलना में 6.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.
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