JEE IIT Success Story: दो कमरे के घर और पिता की सड़क किनारे पानीपुरी की मेहनत के बीच हर्ष गुप्ता ने संघर्ष को हौसले में बदला और IIT में दाखिला पाने में कामयाब रहे.
JEE IIT Success Story: कहते हैं न कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादा मजबूत हो तो मंजिल जरूर मिलती है. ऐसी ही कहानी है महाराष्ट्र के कल्याण में रहने वाले हर्ष गुप्ता (Harsh Gupta) की. दो कमरों की छोटी सी चाल में पले-बढ़े हर्ष ने बचपन से संघर्ष देखा. उनके पिता सड़क किनारे पानीपुरी बेचकर परिवार के छह लोगों का गुज़ारा करते हैं. सीमित कमाई, ढेर सारी जिम्मेदारियां और तंग हालात, इन सबके बीच बड़े सपने देखना भी आसान नहीं था. लेकिन हर्ष ने हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
उन्होंने मुश्किलों को चुनौती की तरह लिया और खुद पर भरोसा बनाए रखा. उनका सफर सिर्फ IIT तक पहुंचने का नहीं, बल्कि हिम्मत, उम्मीद और आत्मविश्वास की सच्ची मिसाल है.
आर्थिक तंगी के साथ-साथ हर्ष एक गंभीर बीमारी, रेक्टल प्रोलैप्स, से भी जूझते रहे. लगातार इलाज, कमजोरी और अस्पताल के चक्कर उनकी पढ़ाई पर भारी पड़े और वे 11वीं कक्षा में असफल हो गए. यह किसी भी छात्र के लिए टूटने का पल हो सकता था, लेकिन हर्ष ने हार मानने के बजाय खुद से एक वादा किया “रुकना नहीं है.” उन्होंने दोबारा 11वीं और फिर 12वीं कक्षा पास की और इस बार 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर दिखाया कि इरादे मजबूत हों तो असफलता अंत नहीं होती.
IIT में दाखिले का सपना लेकर हर्ष अकेले कोटा, राजस्थान पहुंचे. न परिवार साथ था, न आर्थिक आराम बस एक लक्ष्य था. दो साल तक कोचिंग में रहकर उन्होंने कड़ी मेहनत की. पहली बार JEE-Main पास करने के बाद वे JEE-Advanced में सफलता नहीं पा सके. कई छात्र यहां हार मान लेते, लेकिन हर्ष ने एक और साल का ड्रॉप लिया. उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया, आत्मविश्वास बनाए रखा और फिर पूरी ताकत से परीक्षा दी.
इस साल हर्ष ने JEE-Advanced क्वालिफाई कर लिया और उन्हें Indian Institute of Technology Roorkee में जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग ब्रांच में सीट मिल गई. यह सिर्फ एक कॉलेज एडमिशन नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, धैर्य और परिवार के त्याग की जीत है.
हर्ष कहते हैं कि कई बच्चे कोटा दूसरों के सपनों के साथ आते हैं, मेरे पास सिर्फ मेरा सपना था. यही विश्वास उन्हें टिकाए रहा. आज उनकी सफलता उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक तंगी, बीमारी या असफलता के कारण खुद को कमजोर समझने लगते हैं.
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