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JEE Success Story: जेईई में रैंक 16, 10वीं की रहीं स्टेट टॉपर, बनाई ऐसी रणनीति, मिला पहला स्थान

JEE Success Story: कुछ करने की चाहत और सही स्ट्रेटजी हो, तो किसी भी चीज को पाना असंभव नहीं है. ऐसी ही कहानी पश्चिम बंगाल की एक लड़की है, जिन्होंने जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में 16वीं रैंक हासिल की है.

JEE Success Story: अगर किसी के भीतर कुछ कर दिखाने का सच्चा जज्बा और जुनून हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता. इसी सोच को पश्चिम बंगाल की देवदत्ता माझी (Devdutta Majhi) ने सच कर दिखाया है. उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली JEE Advanced में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 16 हासिल की है. इतना ही नहीं, देवदत्ता इस परीक्षा में लड़कियों की कैटेगरी में टॉपर भी रही हैं, जिससे उनकी सफलता और भी खास बन जाती है.

देवदत्ता को JEE Advanced में 360 में से 312 अंक मिले हैं. वहीं जेईई मेंस सेशन 2 में रैंक 1 हासिल की थी. यह आंकड़ा सिर्फ अच्छे नंबरों की कहानी नहीं कहता, बल्कि उन अनगिनत घंटों की मेहनत को दर्शाता है, जो उन्होंने पढ़ाई में लगाए. यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का अनुशासन, निरंतर अभ्यास और खुद पर अटूट विश्वास रहा है.

बचपन से बड़ा सपना

देवदत्ता की शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही बेहतरीन रही है. साइंस और गणित में गहरी रुचि रखने वाली देवदत्ता ने बहुत कम उम्र में यह तय कर लिया था कि वह देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ाई करेंगी. परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उनके सपनों को दिशा दी, लेकिन असली ताकत उनकी स्व-अनुशासित पढ़ाई और सीखने की भूख रही. वह पुरबा बर्धमान ज़िले के छोटे से शहर कटवा में कटवा दुर्गादासी चौधरी गर्ल्स हाई स्कूल में बंगाली-मीडियम स्कूल में पढ़ाई की. उन्होंने माध्यमिक (10वीं की परीक्षा) में भी पहला स्थान हासिल की थी.

JEE Advanced 2026: कठिन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन

JEE Advanced को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है. इस परीक्षा में सिर्फ विषय ज्ञान ही नहीं, बल्कि कॉन्सेप्चुअल क्लैरिटी, समय प्रबंधन और मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है. देवदत्ता ने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स तीनों विषयों में संतुलित और मजबूत प्रदर्शन किया, जिसने उन्हें 312 अंकों तक पहुंचाया.

तैयारी का मंत्र: समझ, रटने से आगे

देवदत्ता मानती हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. उन्होंने रटने के बजाय कॉन्सेप्ट को समझने, नियमित रिवीजन और मॉक टेस्ट पर जोर दिया। गलतियों को पहचानना और उन्हें सुधारना उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खुद को मानसिक रूप से संतुलित रखने के लिए ब्रेक और सीमित स्क्रीन टाइम को भी महत्व दिया.

लाखों के लिए प्रेरणा

गर्ल्स कैटेगरी में AIR 16 हासिल करना सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देशभर की छात्राओं के लिए प्रेरणादायक संदेश भी है कि इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में वे किसी से कम नहीं हैं. देवदत्ता की सफलता यह दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उनका लक्ष्य न सिर्फ एक बेहतरीन इंजीनियर बनना है, बल्कि भविष्य में समाज और तकनीक के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान देना भी है. 

Munna Kumar

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