JEE IIT Success Story: बचपन की जिज्ञासा और साइंस फिक्शन से उपजा जुनून रिशांग यादव को इंजीनियरिंग तक ले आया, जहां सवाल पूछना, प्रयोग करना और समाधान खोजना उनका स्वभाव बन गया.
JEE Success Story: कहते हैं कि अगर इंसान अपने बचपन के शौक को सच में जीना चाहता है, तो उसे उसी दिशा में लगातार मेहनत करनी पड़ती है. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है रिशांग यादव (Rishang Yadav) की, जिनके लिए इंजीनियरिंग कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि बचपन की जिज्ञासा का स्वाभाविक परिणाम रही है. साइंस फिक्शन की कहानियों ने पहले उनकी कल्पनाओं को पंख दिए और फिर वही कल्पनाएं इस सवाल में बदल गईं कि असल दुनिया में टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है. सवाल पूछना, प्रयोग करना और समस्याओं के समाधान ढूंढना, यही सोच धीरे-धीरे उन्हें इंजीनियरिंग की राह पर ले आई.
रिशांग यादव बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले के चिंतामनपुर गांव से ताल्लुक रखते हैं. हालांकि, भारतीय वायु सेना में उनके पिता की स्थानांतरणीय सेवा के कारण उनका बचपन और परवरिश देश के अलग-अलग शहरों में हुई. उन्होंने अपनी अधिकांश स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर 1, वायु सेना स्टेशन, आगरा से पूरी की. माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार, अनुशासन और शांत दृढ़ता आज भी उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बने हुए हैं. जब वह आज पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें स्कूल के दिन सबसे ज़्यादा याद आते हैं. वह सादगी भरा जीवन, घर का सुकून और वह समय जब ज़िम्मेदारियां बहुत कम थीं.
भारत के लाखों छात्रों की तरह, IIT रिशांग के लिए भी सिर्फ़ एक संस्थान नहीं, बल्कि उत्कृष्टता और अनुशासन का प्रतीक था. उन्होंने इसे केवल एक प्रतिष्ठित टैग के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक ऐसे वातावरण के रूप में समझा जहां जिज्ञासा को चुनौती दी जाती है और सोच को नया आयाम मिलता है. उनका JEE सफर 2023 में जनवरी और अप्रैल में JEE Main और मई में JEE Advanced से शुरू हुआ. इस कठिन और प्रतिस्पर्धी यात्रा का परिणाम JEE Advanced में AIR 4923 और JEE Main में AIR 2954 के रूप में सामने आया. यह सफर आसान नहीं था, लेकिन तैयारी के दौरान सीखा गया अनुशासन और धैर्य उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि साबित हुआ.
रिशांग ने 5 अगस्त 2023 को IIT मंडी जॉइन किया. हिमालय की गोद में बसे इस कैंपस की ख़ूबसूरती ने उनके परिवार से दूर होने की कमी को काफी हद तक भर दिया. ओरिएंटेशन वीक ने नए लोगों से जुड़ने और इस बदलाव को अपनाने में अहम भूमिका निभाई. समय के साथ यह संस्थान उनके लिए घर जैसा बन गया. IIT मंडी में उनकी पहचान केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही. क्विज़िंग क्लब, राइटिंग क्लब, रोबोटिक्स क्लब और टीम डेइमोस (Mars Rover Team) के साथ जुड़कर उन्होंने लीडरशिप, टीमवर्क और टाइम मैनेजमेंट सीखा. इन अनुभवों ने आत्मविश्वास बढ़ाया और ज़िम्मेदारी की वास्तविक अहमियत समझाई.
लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वर्तमान में रिशांग RWTH Aachen, जर्मनी में एक एक्सचेंज स्टूडेंट के रूप में अध्ययन कर रहे हैं. भविष्य में वह खुद को रोबोटिक्स के क्षेत्र में गहराई से काम करते हुए और दुनिया भर में सीखते-समझते हुए देखते हैं. आखिरकार, IIT की असली ताकत उसकी डिग्री नहीं, बल्कि वे लोग, अनुभव और सीख हैं जो इस सफ़र को अर्थपूर्ण बनाते हैं और यही उनकी कहानी की आत्मा है.
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